राहुल गांधी की ताजपोशी की तैयारी तो नहीं?

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- Author, नारायण बारेठ
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, राजस्थान, जयपुर से
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में बढ़ती बेरोज़गारी, आर्थिक स्थिति, किसानों की बदहाली और विदेशों में भारत की छवि को मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है.
राहुल मंगलवार को जयपुर में पार्टी की युवा आक्रोश रैली में छात्र युवा वर्ग का रुख़ अपनी पार्टी की और मोड़ने पर ज़ोर देते हुए दिखाई दिए.
लोकसभा चुनावों में हार और पार्टी अध्यक्ष का पद छोड़ने के कुछ महीनों बाद राहुल गांधी का यह पहला बड़ा कार्यक्रम था. विश्लेषक कहते हैं कि यह पार्टी में फिर से उनकी ताजपोशी करने की तैयारी का संकेत है.
उधर बीजेपी ने राहुल से राजस्थान में चुनावी वादों का हिसाब माँगा है.
राहुल गांधी अपने भाषण में केंद्र की बीजेपी सरकार को लेकर आक्रामक थे. लेकिन उन्होंने नागरिकता संशोधन क़ानून जैसे मुद्दों पर अधिक ज़ोर देने की बजाय विद्यार्थियों और युवाओं को केंद्र में रखा.
उन्होंने कहा नरेंद्र मोदी ने हर साल दो करोड़ रोज़गार देने का वादा किया था. लेकिन देश में एक करोड़ युवाओं के हाथों से रोज़गार चला गया.
उन्होंने कहा, "पिछले 45 साल में ये सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी का दौर है. यूपीए सरकार के दौरान ग्रोथ रेट 9 प्रतिशत थी, पूरी दुनिया भारत की तारीफ़ कर रही थी. लेकिन अब दर ये घट कर पांच फीसदी रह गई है. विकास दर नापने के पैमाने भी बदल दिए गए हैं. अगर पुराने मापदंड से विकास दर का हिसाब लगाया जाए यह और भी कम होगी."
राजस्थान में बीते एक साल से कांग्रेस सत्ता में है. रैली का आयोजन भी सत्तारूढ़ पार्टी ने ही किया था. पार्टी ने इसमें अपने छात्र और युवा संगठन को आगे रखा था और युवा वर्ग से जुड़े गीत संगीत को भी स्थान दिया.
साथ ही वक्ताओं में युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास जैसे नेताओं को भी खासी तवज्जो दी गई थी.
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राहुल गांधी ने रैली में कहा, "छात्र और युवा इस मुश्किल दौर में रोशनी की राह दिखा सकते हैं."
उन्होंने अपने भाषण में एक-एक कर छात्र और युवा वर्ग से जुड़े मुद्दों को रेखांकित किया और सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर हमला किया. उन्होंने कहा प्रधानमंत्री देश की किसी भी विश्वविद्यालय या कॉलेज में जाकर छात्र वर्ग को सुनें तो उन्हें हक़ीकत का पता चल जाएगा."
देश में चल रहे नागरिकता संशोधन क़ानून विरोधी आंदोलन के बीच कांग्रेस ने इस रैली में राष्ट्रीय बेरोज़गारी रजिस्टर का मुद्दा खड़ा कर युवाओं से कहा उन्हें बीजेपी सरकार से रोज़गार के बारे में सवाल पूछना चाहिए.
राहुल गांधी ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार ने देश के किसान, मज़दूर, छोटे कारोबारी और व्यापरियों की जेब से पैसा निकालकर अमीर वर्ग की झोली में डाल दिया."
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने देश में चोटी के दो उद्योगपतियों का नाम लेकर कहा "सरकार सब कुछ इन दो अमीरों को दे रही है."
उन्होंने कहा "प्रधानमंत्री नागरिकता क़ानून और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर पर तो खूब भाषण देते हैं. लेकिन ग़रीबी, बेरोज़गारी और जनता के दुःख दर्द पर एक शब्द भी नहीं बोलते है."
गांधी ने आर्थिक हालात को लेकर कहा, "प्रधानमंत्री सबसे बड़े व्यापारियों की मदद करते है तो उन्हें किसानों और बेरोज़गारों की भी सहायता करनी चाहिए. लेकिन वो पूरा लाभ चुनिंदा 15 व्यापरियों को दे रहे हैं. लेकिन जब हमारे युवा लोग प्रधानमंत्री से सवाल पूछते हैं तो उनके साथ बल प्रयोग किया जाता है, गोलियां चलाई जाती हैं."

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राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार ने विदेशों में भारत की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाया है. उन्होंने कहा, "पहले लोग भारत में शांति, प्रेम मोहब्बत और भाईचारे के लिए तारीफ़ करते थे. जबकि पड़ोसी पाकिस्तान हिंसा और अराजकता के लिए चर्चा में रहता था. लेकिन अब भारत की उस छवि को नुकसान पहुंचा है."
गांधी ने कहा, "भारत ही चीन का मुकाबला कर सकता है. पश्चिम के अनेक देश चीन की बजाय भारत में निवेश करना चाहते हैं. लेकिन इस माहौल को देख कर वे ठिठक जाते हैं."
दिल्ली विधानसभा के लिए इस समय चुनाव प्रचार परवान पर हैं. ऐसे में राहुल गांधी की जयपुर रैली में हाजिरी और सक्रियता को सियासी पंडित पार्टी के राजनीतिक फलक पर फिर से अवतरण की तैयारी के रूप में देख रहे हैं.
स्थानीय पत्रकार अवधेश अकोदिया कहते हैं, "ऐसे संकेत मिल रहे है कि राहुल गांधी जल्द ही फिर से पार्टी अध्यक्ष का पद संभाल सकते हैं. यह रैली इसी कड़ी का एक हिस्सा हो सकती है. साथ ही चर्चा है राहुल गांधी कुछ और राज्यों में ऐसी ही बड़ी रैलियों को संबोधित कर सकते हैं."
अकोदिया कहते हैं, "इस रैली के ज़रिए कांग्रेस, बीजेपी के ध्रुवीकरण करने के प्रयासों की काट करती दिखती है और उन मुद्दों को लोगों के बीच ले जाना चाहती है जो सीधे अवाम से जुड़े हैं."
लेकिन वो ये भी कहते हैं कि यह दुखद है कि दिल्ली में कांग्रेस गंभीरता से चुनाव प्रचार में लगी नहीं दिख रही है. वो कहते हैं नतीजे जो भी रहें लेकिन देश की एक प्रमुख पार्टी के रूप में उसे पूरी शिद्दत से लड़ते हुए दिखना चाहिए था.

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वहीं प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता अर्चना शर्मा कहती हैं, "दिल्ली में पार्टी पहले ही बड़ी रैली कर चुकी है. चूँकि राजस्थान में कांग्रेस सरकार और पार्टी ने बहुत सारे मामलों में पहल की है और राजनैतिक क़दम उठाए हैं, लिहाजा यहां रैली करना ठीक था."
शर्मा के मुताबिक़, "राजस्थान सरकार ने मुफ्त दवा योजना लागू की है और बेरोजगारों के लिए भत्ता देने जैसे काम किया है."
जयपुर में पत्रकार राजेश असनानी कहते हैं, "राहुल गांधी का भाषण अपनी जगह, लेकिन जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ,मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस सरकारों के कार्य प्रदर्शन पर भी नज़र रखेगी. लोग यह भी देख रहे है कि कैसे सत्तारूढ़ पार्टी के नेता समय-समय पर इन राज्यों में अंतर्कलह में उलझे रहते हैं."
इससे पहले विपक्ष में बैठी बीजेपी ने राजस्थान में नागरिकता क़ानून को लेकर जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में आयोजन किए और कांग्रेस को घेरने का प्रयास किया.
क्योंकि राजस्थान में पाकिस्तान से शरण मांगने आए हिंदू अल्पसंख्यकों की नागरिकता एक बड़ा मुद्दा है, कांग्रेस ने पिछले माह 23 दिसंबर को जयपुर में अन्य दलों और नागरिक अधिकार संगठनों को लेकर जयपुर में एक बड़ा शांति मार्च निकाला था.
कांग्रेस ने इसमें वामपंथी दलों, जनता दल ,आरजेडी और आम आदमी पार्टी जैसी पार्टियों को भी अपने साथ लिया था. कुछ विश्लेषक कहते हैं कांग्रेस की राजनीति में इस समय राजस्थान का महत्व बढ़ गया है, क्योंकि राजस्थान दिल्ली के नजदीक है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत केंद्र की बीजेपी सरकार पर हमला करने के मामले में मुखर होकर उभरे हैं. ऐसे में कांग्रेस और बीजेपी दोनों इस राज्य पर खासा ध्यान दिए हुए हैं.

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राजनीतिक विश्लेषक डॉ राजीव गुप्ता कहते हैं, "कांग्रेस के लिहाज से जयपुर रैली महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि एक सफल रैली राजनैतिक संदेश देने का ज़रिया बन जाती है. यही रैली दिल्ली की जाती तो उतनी कामयाबी नहीं मिलती. चूँकि राहुल गाँधी कांग्रेस के प्रमुख नेता है ,इसलिए पार्टी ने जयपुर में रैली आयोजित कर ठीक ही किया है."
डॉ गुप्ता कहते हैं इस समय देश में छात्र और नौजवान खासे सक्रिय है और कांग्रेस को यह ठीक लगा होगा कि उन्हें वैचारिक रूप से जोड़ा जाए.
युवक कांग्रेस के महासचिव आयुष भारद्वाज कहते हैं जब पार्टी के प्रमुख नेता किसी राज्य में जाते हैं और नौजवानों से बात करते हैं, उससे पार्टी संगठन को लाभ मिलता है.
वो कहते हैं, "यह ऐसा समय है जब छात्र नौजवान बेरोज़गारी से परेशान हैं. पार्टी उनकी आवाज़ को उठाना चाहती है."

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अल्पंसख्यक समुदाय से संबद्ध एक आर्थिक विशेषज्ञ अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर कहते हैं, "कांग्रेस दुविधा में उलझी नज़र आती है, उसे कभी लगता है कि हिन्दू विरोधी न मान लिया जाए और कभी वो धर्मनिरपेक्षता को लेकर भी ठिठक जाती है. लेकिन बीजेपी में ऐसी कोई दुविधा नहीं है. उसे पता है कौन सा जज्बाती मुद्दा कब उठाना है."
उधर राज्य बीजेपी ने कांग्रेस की इस रैली की खिल्ली उड़ाई है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया कहते हैं, "कांग्रेस सरकार ने इस रैली में भीड़ जुटाने के लिए सत्ता का दुरूपयोग किया है."
पूनिया ने कहा सरकार ने कर्मचारियों पर भीड़ के लिए दबाव डाला है. बीजेपी अध्यक्ष पूनिया का आरोप है कि "कांग्रेस राज्य में झूठे वादे कर सत्ता में आ गई और फिर कर्ज माफ़ी और बेरोज़गारी भत्ता जैसे मुद्दों को भूल गई, राहुल गांधी को इसका हिसाब देना चाहिए."
बीजेपी कहती है, राज्य में क़ानून व्यवस्था चरमरा गई है और महिलाओं पर अत्याचारों की घटनाएं बढ़ी हैं.
इधर कांग्रेस की राजनीति में राजस्थान की भूमिका बढ़ी है. इससे पहले महाराष्ट्र में सरकार गठन के दौरान वहां के विधायकों की बाड़ेबंदी के लिए राजस्थान को काम सौंपा गया था.
यह भी इत्तेफाक ही है कोई सात साल पहले जयपुर में कांग्रेस के चिंतन शिविर में राहुल गांधी को पार्टी में उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई थी, पर तब से अब तक दरिया में बहुत पानी बह गया है.
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