एयर इंडिया बेचने के ख़िलाफ़ कोर्ट जाएंगे सुब्रमण्यम स्वामी

एयर इंडिया

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केंद्र सरकार ने एयर इंडिया को ख़रीदने की चाहत रखने वालों के लिए एक अच्छी ख़बर है. सरकार एयर इंडिया की 100 फ़ीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. एयर इंडिया को ख़रीदने के लिए प्रस्ताव सौंपने की आख़िरी तारीख़ 17 मार्च तय की गई है. सरकार 31 मार्च तक इसके ख़रीदार के नाम का एलान भी कर देगी.

सरकार के इस एलान के साथ ही बीजेपी राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट किया, "ये डील पूरी तरह से देश हित में नहीं है. ऐसा करके मुझे कोर्ट जाने पर मजबूर किया जा रहा है. हम अपने परिवार के सदस्य को इस तरह से बेच नहीं सकते?"

एक घंटे के अंतराल में किए गए दूसरे ही ट्वीट में उन्होंने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई, "एयर इंडिया रिकवरी मोड में आ गई है. अप्रैल से दिसंबर के महीने में घाटा कम हुआ है. प्रधानमंत्री जी, हम इसे मज़बूत करने के बजाए क्यों बेच रहे हैं."

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इससे पहले दावोस में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था, "अगर मैं आज केंद्र सरकार में मंत्री नहीं होता तो मैं एयर इंडिया को ख़रीदना चाहता और उसके लिए बोली लगाता."

पीयूष गोयल का ये बयान चार दिन पहले ही आया है.

उसी इंटरव्यू में रेल मंत्री ने एयर इंडिया और बीपीसीएल के बेचने को लेकर हुई देरी को लेकर जवाब में कहा, "केंद्र सरकार ने पिछले टर्म में इसको लेकर ज़्यादा दिलचस्पी इसलिए नहीं दिखाई थी, क्योंकि तब अर्थव्यवस्था बहुत ख़राब हालात में थी. हमने अपना सारा फोकस इकोनॉमी को वापस पटरी पर लाने में लगाया था. अगर उस समय हम एयर इंडिया या फिर बीपीसीएल के बेचने की सोचते तो हमें बहुत अच्छे रिटर्न नहीं मिलते. मुझे ख़ुशी है कि पिछले कार्यकाल में हमने ये क़दम नहीं उठाया."

गौरतलब है कि सरकारी अनुमान के मुताबिक़ एयर इंडिया और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को बेच कर सरकार एक लाख करोड़ रुपए जुटाने का दावा कर रही है.

लेकिन ऐसा क्या है कि सरकार के एक मंत्री और दूसरे सांसद एक कंपनी की बिक्री को लेकर दूसरे से इतनी अलग राय रखते हैं.

दरअसल सरकार ने पिछले साल भी एयर इंडिया को बेचने की योजना बनाई थी लेकिन तब निवेशकों ने एयर इंडिया को ख़रीदने में ज्यादा उत्साह नहीं दिखाया था इसलिए इसे बेचा नहीं जा सका था.

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क्या इस बार मिल सकेगा एयर इंडिया का ख़रीदार

एयर इंडिया पर तकरीबन 60 हज़ार करोड़ का क़र्ज़ है. इस क़र्ज़ को कम करने के लिए सरकार ने ऋण विशेष इकाई (एसपीवी) का गठन भी किया है. जिसके बाद ख़रीदार को तकरीबन 23,286 करोड़ रुपए चुकाने होंगे. इसके साथ ही सरकार ने कुछ और शर्तों में भी ढील दी है, ताकि इस बार उन्हें ख़रीदार मिल सकते.

एविएशन एक्सपर्ट हर्षवर्धन के मुताबिक़ इस बार सरकार 76 फ़ीसदी के बजाए 100 फ़ीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है.

पिछली बार के मुकाबले अब ख़रीदारों को क़र्ज़ की रकम भी कम चुकानी होगी.

और तो और एयर इंडिया का रियल एस्टेट एसेट इस बार बिक्री के लिए नहीं रखा गया है. यानी इस बार सरकार केवल 'ऑपरेशनल एसेट' बेचना चाहती है.

हर्षवर्धन के मुताबिक़ सरकार का ये क़दम दिखाता है कि सरकार पूरी तरह से हार मान चुकी है. न सिर्फ़ कंपनी के मैनेजमेंट के स्तर पर, बल्कि मंत्री और सरकार के स्तर पर भी. कंपनी में इच्छाशक्ति की कमी है. लेकिन सरकार ने अपनी तरफ़ से लेनदारों को बेस्ट डील देने की पूरी कोशिश की है.

हर्षवर्धन के मुताबिक़ एयर इंडिया के ख़रीदार के लिए शर्तों में जो नेट वर्थ रखा है, उतना नेट वर्थ रखने वाले भारतीय बहुत कम है. इसके आलावा विदेश में ऐसे लोग कम हैं.

वित्त मंत्रालय का विज्ञापन

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इमेज कैप्शन, वित्त मंत्रालय एयर इंडिया को बेचने के लिए वैश्विक स्तर पर ऐजेंसियों से निविदाएं आमंत्रित कर रही है

ख़रीदार के लिए अड़चनें क्या हैं?

सरकार की ओर से शर्तों में ढील देने का ये मतलब कतई नहीं कि ख़रीदार आसानी से मिल जाएंगे. किसी भी ख़रीदार के लिए ये राह आसान नहीं होगी.

ख़रीदार को तकरीबन साढ़े 23 हजार करोड़ तो क़र्ज़ के देने होंगे, साथ ही इसकी चिंता भी करनी होगी की कम हो रही पैसेंजर ग्रोथ से कैसे निपटा जाए.

हर्षवर्धन कहते हैं, "एक साल पहले एयर इंडिया का सालाना घाटा जहां 5000 करोड़ का था, इस बार बढ़ कर 8000 करोड़ हो गया था. इसलिए ख़रीदार को मानसिक तौर पर कुछ साल कंपनी के साथ साथ घाटा सहने की आदत भी होनी चाहिए."

इतना ही नहीं गिरते रुपए ने एविएशन सेक्टर में 'ऑपरेशनल लॉस' को और बढ़ा दिया है. अब ईंधन ख़रीदने में ज़्यादा ख़र्च करना पड़ता है. इसके लिए भी तैयार रहना होगा.

जो भी ख़रीदार एयर इंडिया को ख़रीदेगा उसको नए एयर फ्लीट भी ख़रीदने होंगे. एयर इंडिया का फ्लीट अब बहुत पुराना हो गया है. ख़रीदार को नए निवेश करने को भी तैयार होना होगा.

कुल मिला कर क़र्ज़ के आलावा ख़रीदार को एयर इंडिया को दोबारा ज़िंदा करने के लिए तकरीबन 25 हजार करोड़ और लगाना होगा.

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सुब्रमण्यम स्वामी की दलीलें

तो फिर सुब्रमण्यम स्वामी कैसे कह रहे हैं कि एयर इंडिया को बिकने नहीं देंगे.

बीबीसी से बातचीच में सुब्रमण्यम स्वामी ने अपने ट्वीट को दोहराते हुए अपना रुख़ स्पष्ट किया.

उन्होंने कहा, "2004 तक तो यही एयर इंडिया फ़ायदे में चल रही थी. उसके बाद नुक़सान में चली गई. आपने 70000 करोड़ का ख़र्च करके 100 से ज़्यादा प्लेन ख़रीदे. फ़ायदे वाले रूट आपने दूसरी कंपनियों को दे दिया. घाटे में लाने के लिए भी सरकार ही ज़िम्मेदार है. अब लॉस भी कम हुआ है और आप बेच रहे हैं. इन सब वजहों से ही कंपनी लॉस में आई है. एयर इंडिया के पास जितने एरोब्रिज और हैंगर्स हैं उतना किसी दूसरी एयरलाइंस के पास नहीं है."

वो आगे कहते हैं, "एयर इंडिया के पास जितने अनुभवी पायलट है, उतने किसी के पास नहीं है. सरकार ने अभी तक ये नहीं बताया कि एयर इंडिया के कर्मचारियों का क्या होगा? 11-12 हज़ार कर्मचारी हैं उनका क्या होगा?"

स्वामी ने साफ़ कहा, "वो सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ कोर्ट जाने का मन बना चुके हैं."

एयर इंडिया की बिक्री के लिए सरकार ने एक कंस्लटेटिव कमेटी बनाई है. जिसमें पीयूष गोयल भी हैं और स्वामी ख़ुद भी हैं.

सुब्रमण्यम स्वामी का दावा है कि इस कमेटी में सभी सदस्य एयर इंडिया को बेचने के ख़िलाफ़ हैं.

एयर इंडिया का मैसकट

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एयर इंडिया के बारे में कुछ दिलचस्प बातें

एयर इंडिया पहले 'टाटा एयरलाइंस' थी और आज़ादी के बाद यानी 1947 में इसकी 49% भागीदारी सरकार ने ले ली थी.

एयर इंडिया की पहली अंतरराष्ट्रीय उड़ान 8 जून, 1948 को लंदन के लिए थी.

दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा इसका प्रमुख हब है.

एयर इंडिया ने अब तक सबसे ज़्यादा लोगों को सुरक्षित एयरलिफ़्ट कराया है. 1990 में इराक़ ने जब क़ुवैत पर हमला किया तब 59 दिनों के भीतर 10 लाख से ज़्यादा भारतीयों को एयर इंडिया के 488 विमानों से सुरक्षित भारत पहुंचाया गया.

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