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CAA: जिग्नेश मेवाणी ने बिहार में मोदी-शाह पर क्या कहा?
- Author, नीरज प्रियदर्शी
- पदनाम, अररिया (बिहार) से बीबीसी हिंदी के लिए
गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी ने गुरुवार को बिहार के अररिया में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के ख़िलाफ़ एक रैली में शामिल हुए.
जिग्नेश मेवाणी ने यहां अपने भाषण में सीएए और एनआरसी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, '"ये फणीश्वरनाथ रेणु की धरती है. उस रेणु की जिन्होंने अपने दौर की हालत देखकर मैला आंचल लिखा. अगर आज रेणु होते तो नरेंद्र मोदी और अमित शाह की इस फासीवादी सरकार को देखकर मैला आंचल की जगह लिखते मैली नीयत."
यह रैली पटना से क़रीब 350 किमी दूर अररिया के आज़ाद एकेडमी में आयोजित हुई. इसमें बड़ी संख्या में लोग जुटे.
आज़ाद एकेडमी मैदान का यह इलाका मुस्लिम बहुल आबादी के बीच स्थित है. इसके आस-पास आज़ाद नगर और मीर नगर दो प्रमुख मोहल्ले हैं.
आयोजकों में से एक दीपक दास ने बताया, "हम वो लोग हैं जो सीएए और एनआरसी जैसे काले क़ानून के ख़िलाफ़ सबसे पहले विरोध दर्ज कराएं. हमारे साथ पूर्व आईपीएस अफ़सर कन्नन गोपीनाथन आए. उन्होंने इस पूरे इलाक़े का दौरा किया. अलग-अलग ज़िलों में गए. पांच जनवरी से ही लोगों के साथ संवाद कर रहे हैं. लोगों को जगा रहे हैं. "हम हैं भारत" के लोग जागे हुए लोगों का एक समूह है."
अररिया में शाहीन बाग का ज़िक्र
पटना से आए सामाजिक कार्यकर्ता रुपेश कुमार ने कहा, "यहां पर जो लोग आए हैं ये वो लोग हैं जिन्होंने हाल ही में बाढ़ की तबाही झेली है. दूर-दराज के गांवों से आए हैं. इनमें बहुत से लोग ऐसे हैं जिनका सब कुछ बर्बाद हो चुका है. अब फिर से घर बसाने की जिम्मेदारी थी. खेती-बाड़ी का समय था. लेकिन सरकार के इस काले क़ानून ने सबको सड़क पर ला खड़ा किया है. लोग इस बात को समझ रहे हैं कि अगर अभी नहीं खड़े हुए तो देश खत्म हो जाएगा, संविधान खत्म हो जाएगा."
रुपेश आगे कहते हैं, "जिस वक़्त आधार बन रहा था उस वक्त भी विरोध हुआ था. लेकिन बाद में हम सब लोगों को मजबूर कर दिया गया बनवाने के लिए. हम झुक गए. आधार बनवा लिए. लेकिन इस बार संविधान का सवाल है. केवल पहचान का सवाल नहीं है. इस बार झुकना नहीं है."
इस रैली में शाहीनबाग, पटना के सब्जीबाग और फुलवारी शरीफ में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का बार-बार ज़िक्र हुआ.
29 फरवरी को होगी बड़ी रैली
मंच से इस बात को भी कई बार दोहराया गया कि आने वाली 29 फरवरी को पटना के गांधी मैदान में अब तक की सबसे बड़ी रैली होगी. उस रैली में कन्हैया कुमार भी शामिल होंगे.
इन आयोजनों की को-ऑर्डिनेशन समिति के सदस्य आशीष रंजन ने कहा, "हमारा लक्ष्य है कम से कम पांच लाख लोगों को पटना की रैली से जोड़ सकें. पूर्णिया की सभा और आज की रैली उसका आगाज़ कह सकते हैं. हर ज़िले और हर प्रखंड तक हम लोगों के बीच जाएंगे उनसे संवाद बनाएंगे और उन्हें अपने साथ जोड़ेंगे. अभी इतने विरोध पर ही सरकार को समर्थन के लिए अभियान और यात्राएं निकालनी पड़ रही हैं. स्पष्ट है सरकार हमसे डर रही है."
जेएनयू की छात्र नेता प्रियंका भारती रैली को संबोधित किया. उन्होंने कहा, "भारत की आवाम अब जाग चुकी है. यह विश्व को एक नया पैगाम देगी. इतिहास में दर्ज किया जाएगा कि कैसे जीवन भर चूल्हा-चौका और घर-गृहस्थी संभालने वालीं महिलाएं देश का संविधान बचाने के लिए सड़कों पर उतर आई हैं."
गांव और ब्लॉक स्तर पर चलेगा अभियान
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की छात्रा लदीदा फरजाना और चंदा यादव ने जामिया हिंसा के दौरान पुलिसिया ज़ुल्म की कहानी लोगों को बतायी.
अररिया में पांच दिसंबर से ही नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के ख़िलाफ़ धरना प्रदर्शन चल रहा है. सुबह के 10 बजे से लेकर शाम के आठ बजे तक सैकड़ों लोग जुटते हैं.
दीपक दास कहते हैं, "22 जनवरी को हमलोग यह धरना खत्म करेंगे. उस मौके पर भी एक विशाल जनसभा का आयोजन किया जाएगा. इसके बाद हम लोग गांव और ब्लॉक स्तर पर लोगों को जागरूक करने के लिए निकलेंगे. अररिया के लोगों ने संविधान बचाने के लिए जो आवाज उठाई है वह इतिहास में दर्ज होगी."
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