You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पुतिन 2024 के बाद रूस की सत्ता में बनने रहने के लिए क्या चाल चलेंगे?
इसकी भनक किसी को नहीं थी. मॉस्को में जो हुआ, सब अचानक हुआ. यहाँ तक कि मंत्रियों को भी पता नहीं था कि उनके पद से हटने का समय आ गया है.
एक बात साफ़ है कि रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी के टॉप जासूस रहे, 67 साल के व्लादीमिर पुतिन के दिमाग़ में कुछ चल रहा है जो शायद ख़ुफ़िया है.
ज़ाहिर है, वे आगे की तैयारी कर रहे हैं. वे 20 साल तक सत्ता में रह चुके हैं. राष्ट्रपति के तौर पर मौजूदा कार्यकाल के चार साल अभी बाकी हैं.
पुतिन के राष्ट्रपति बनने के बाद से उनके साथ साये की तरह रहने और काम करने वाले दिमित्री मेदवेदेव को जनता की नज़रों के सामने से हटाया जा रहा है.
मेदवेदेव तो पुतिन की जगह चार साल तक राष्ट्रपति भी रह चुके हैं जब संवैधानिक प्रावधानों के तहत पुतिन राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे.
मेदवेदेव यूनाइटेड रशिया पार्टी के अलोकप्रिय प्रमुख थे. उनकी नई भूमिका अब रूसी रक्षा परिषद के उपाध्यक्ष की होगी जो बैकग्राउंड में रहकर काम करेंगे.
थिंक टैंक 'कार्नेगी मॉस्को' से जुड़े विश्लेषक एलेक्ज़ेंडर बाउनोव कहते हैं, "यह एक ग्लोडेन पैराशूट है, रक्षा परिषद पुतिन का इनर सर्किल है, यह पुतिन की निजी मिनी गवर्नमेंट है."
ग्लोडेन पैराशूट का मतलब है कि सुरक्षित तरीक़े से पुतिन ने मेदवेदेव को जनता की नज़रों से हटाकर अपने निजी दायरे में रखा है.
अब उनकी जगह मिखाइल मिशुस्तिन ले रहे हैं जो एक टेक्नोक्रेट हैं. उन्होंने रूस की टैक्स प्रणाली को दुरुस्त करने काम पूरा करके वाहवाही लूटी है.
पुतिन दोबारा वैसी ही हालत में पहुँच गए हैं जैसे वे अपने दूसरे कार्यकाल के अंत में पहुँचे गए थे, जब मेदवेदेव उनके डिप्टी के तौर पर काम कर रहे थे.
लेकिन इस बार राष्ट्रपति झूठ-मूठ का प्रधानमंत्री बनकर राष्ट्रपति की तरह काम नहीं करेंगे.
ऐसा माना जा रहा है कि राष्ट्रपति के तौर पर चौथा कार्यकाल पुतिन का राष्ट्रपति के तौर पर अंतिम कार्यकाल होगा.
संविधान में बदलाव के लिए मतदान
अब सवाल ये है कि पुतिन के दिमाग़ में चल क्या रहा है? वे क्या चाहते हैं?
अब पुतिन ने मिखाइल मिशुस्तिन को मेदवेदेव की जगह लेने के लिए चुन लिया है. अब संसद को नए प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट पर मुहर लगानी है, लेकिन इसमें अभी समय लगेगा.
संसद के पास कितने अधिकार होंगे यह भी साफ़ नहीं है.
बीबीसी रूसी सर्विस के वरिष्ठ पत्रकार सर्गेई गोरिएस्को कहते हैं, "सांसद तो सब वही होंगे, कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है."
ऐसा लग रहा है कि राष्ट्रपति पुतिन संविधान में बदलाव के लिए मतदान कराएंगे, ऐसा मतदान इससे पहले 1993 में हुआ था.
रूसियों को बदलाव का अंदाज़ा तब हुआ जब पुतिन ने बुधवार की सुबह संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया.
जिस बड़े बदलाव की ओर पुतिन ने इशारा किया वह है स्टेट काउंसिल को संविधान के तहत सरकारी एजेंसी के तौर पर मान्यता देना.
इस समय स्टेट काउंसिल एक सलाहकार परिषद की तरह है जिसमें 85 क्षेत्रीय गवर्नर और राजनीतिक नेता हैं.
सबसे बड़ी चुनौती
यह काउंसिल इतनी बड़ी है कि जब इसकी बैठक होती है तो क्रेमलिन का सबसे बड़ा हॉल पूरी तरह भर जाता है.
एक अंदाज़ा यह लगाया जा रहा है कि स्टेट काउंसिल को ढेर सारे अधिकार देकर पुतिन उसके शीर्ष नेता बन जाएंगे.
राजनीतिक विश्लेषक बुआनोव कहते हैं, "उन्होंने स्टेट काउंसिल की बात छेड़कर यह अंदाज़ा दिया है कि वे ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं जो भरपूर शक्तिशाली हो जिसकी कमान संभाल कर पुतिन अधिकारों के मामले में राष्ट्रपति से भी ऊपर हो जाएं."
बीबीसी रूसी सर्विस के सर्गेई गोरिएस्को कहते हैं कि पुतिन चौथे कार्यकाल के बाद भी सत्ता में बने रहना चाहते हैं, सवाल बस इतना ही है कि वे ऐसा कैसे करेंगे?
अब यह तक़रीबन साफ़ हो गया है कि 2024 के बाद वे राष्ट्रपति पद पर नहीं रहेंगे लेकिन सत्ता में बने रहेंगे.
इतना ही जानना है कि वे किस कुर्सी पर बैठकर देश चलाएंगे. उनकी मौजूदा भूमिका यानी सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख की तरह भी वे देश चलाते रह सकते हैं.
किंग्स कॉलेज लंदन में रशिया इंस्टीट्यूट के प्रमुख, सैम ग्रीन मानते हैं कि रूस के शक्तिशाली लोग जो 2024 के बाद अपना भविष्य सुनिश्चित करना चाहते हैं, उन्हें एक साथ तीन बिसातों पर शतरंज खेलेनी पड़ेगी, पहला ड्यूमा यानी संसद, फिर स्टेट काउंसिल और फिर व्लीदिमीर पुतिन के दरबार में.
मेदवेदेव को पद से हटाकर, संविधान में बड़े बदलाव करके पुतिन ने परिवर्तन का दौर शुरू कर दिया है. 2021 तक रूस में नई राजनीतिक व्यवस्था और नए पुतिन सामने आ जाएंगे.
आप सोच रहे होंगे कि रूस में कोई विपक्ष नहीं है?
एक एलेक्सी नावाल्नी हैं जिन्हें पुतिन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया जाता है.
उन्होंने कहा है कि सोवियत स्टाइल की राजनीति है, उन्होंने संविधान पर किसी तरह की वोटिंग को धोखाधड़ी बताया है.
एक और विपक्षी राजनीतिक कार्यकर्ता लुबोव सोबोल ने कहा कि कुछ पुराने धोखेबाज़ लोगों की जगह नए धोखेबाज़ों को बिठाने देने को राजनीतिक सुधार नहीं कहा जा सकता.
मेदवेदेव के उत्तराधिकारी मिखाइल मिशुत्सिन की तारीफ़ टैक्स व्यवस्था में सुधार के लिए भले ही जाना जाता हो, आम रूसी लोगों के लिए वे एक अजनबी ही हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)