You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पुतिन को सत्ता के गलियारे तक लाने वाला व्यक्ति
- Author, स्टीव रोज़नबर्ग
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, मॉस्को
इतिहास देखें तो पता चलता है कि रूसी शासकों को अलग-अलग तरीक़ों से सत्ता मिली है.
ज़ार यानी राजा के लिए सत्ता जन्म के साथ सौगात के रूप में आई, व्लादिमीर लेनिन को क्रांति के बाद सत्ता मिली, सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं के लिए महासचिव बनने का रास्ता पार्टी में तरक्की करते हुए पोलित ब्यूरो तक पहुंचने के ज़रिए खुला.
लेकिन बीस साल पहले व्लादिमीर पुतिन को सत्ता की चाबी थाली में सजा कर पेश की गई थी.
पूर्व राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन और उनके निकटतम सहयोगियों ने देश को इक्कीसवीं सदी में ले जाने के लिए रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी केजीबी के पूर्व अधिकारियों को ख़ुद चुना था. उन्हीं में से एक थे व्लादिमीर पुतिन.
लेकिन पुतिन ही क्यों?
व्लादिमीर पुतिन के रूस के राष्ट्रपति बनने में बेहद अहम भूमिका निभाई थी वेलेन्टिन युमाशेव ने. युमाशेव पूर्व पत्रकार हैं और बाद में वो रूसी सरकार में अधिकारी बने. रूसी सरकारी अधिकारी मीडिया से कम ही बात करते हैं, लेकिन युमाशेव मुझसे मुलाक़ात करने के लिए राज़ी हो गए.
युमाशेव, बोरिस येल्तसिन के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक थे. उनकी शादी येल्तसिन की बेटी तात्याना से हुई थी.
1997 में येल्तसिन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ के रूप में उन्होंने ही पुतिन को क्रेमलिन में सबसे पहले काम करने की पेशकश की थी.
युमाशेव बताते हैं, "प्राशासनिक प्रमुख आनातोली चुवाए का कार्यकाल ख़त्म होने वाला था. उन्होंने मुझसे कहा कि उनकी नज़र में एक व्यक्ति है जो उनका डिप्टी बन सकता है और अच्छे तरीके से कार्यभार संभाल सकता है."
"उन्होंने ही मेरा परिचय व्लादिमीर पुतिन से करवाया था और फिर हम लोग साथ काम करने लगे थे. मैंने देखा कि पुतिन अपने काम में बेहद अच्छे हैं. वो आइडिया देने में और उसके बारे में विश्लेषण करने में बेहतर हैं."
लेकिन उस वक़्त मेरे मन में कहीं से भी ये विचार नहीं आया था कि ये व्यक्ति आगे चल कर देश का राष्ट्रपति बन सकता है.
युमाशेव बताते हैं, "येल्तसिन के दिमाग़ में कई नाम थे, जैसे बोरिस नेमत्सोव, सर्गेई स्टेपाशिन और नकोलाई आक्सेनेन्को. उनके साथ कई बार इस बारे में मेरी बात हुई कि कौन इस पद के लिए संभावित उम्मीदवार हो सकता है. एक वक़्त ऐसा भी आया जब हमने पुतिन के नाम पर भी विचार किया."
"येल्तसिन ने मुझसे पूछा कि पुतिन के बारे में मेरा क्या ख़याल है? मैंने उनसे कहा कि वो एक बढ़िया उम्मीदवार हैं और मुझे लगता है कि आपको उनके नाम पर भी विचार करना चहिए. वो जिस तरह से अपना कम करते हैं उससे स्पष्ट पता चलता है कि वो मुश्किल से मुश्किल काम के लिए तैयार होंगे."
लेकिन क्या पुतिन के केजीबी से जुड़े होने के कारण कोई प्रभाव पड़ा?
युमाशेव बताते हैं, "पुतिन की तरह केजीबी से जुड़े कई एजेंटों को एजेंसी के कम होते महत्व का अहसास था और इस कारण उन्होंने संस्था को छोड़ दिया थी. उनके पूर्व में केजीबी से जुड़े होने का कोई अर्थ बाक़ी नहीं रह गया था. पुतिन ख़ुद को एक आज़ाद ख़याल वाले गणतंत्र के समर्थक के रूप में पेश करते थे जो बाज़ारों में सुधार के पक्षधर थे."
ख़ुफ़िया तरीक़े से मिली गद्दी
अगस्त 1999 में बोरिस येल्तसिन ने व्लादिमीर पुतिन को प्रधानमंत्री नियुक्त किया. यह स्पष्ट संकेत था कि राष्ट्रपति येल्तसिन क्रेमलिन यानी देश का नेतृत्व करने के लिए पुतिन को तैयार कर रहे थे.
येल्तसिन के पद छोड़ने में अभी एक साल बाक़ी था. लेकिन दिसंबर 1999 में उन्होंने अचानक पद त्याग करने की घोषणा कर दी.
"नए साल से ठीक तीन दिन पहले, येल्तसिन ने पुतिन को अपने घर पर बुलाया. उन्होंने मुझे और नए चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ अलेक्जेंडर वोलोशिन को भी उपस्थित होने के लिए कहा. उन्होंने कहा कि वो 31 दिसंबर को इस्तीफा दे देंगे. पुतिन से उन्होंने कहा कि वह जुलाई तक उनके साथ रहेंगे."
"इसके बारे में केवल हम कुछ लोग ही जानते थे - मैं, वोलोशिन, पुतिन और येल्तसिन की बेटी तात्याना. येल्तसिन ने अपनी पत्नी तक को इस बारे में नहीं बताया था."
येल्तसिन का इस्तीफ़ा (विदाई भाषण) लिखने की ज़िम्मेदारी युमाशेव को सौंपी गई थी.
युमाशेव कहते हैं "मेरे लिए ये बेहद मुश्किल भाषण था. ये कुछ ऐसा था जो जल्द ही इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो जाने वाला था. लेकिन संदेश देना ज़रूरी था और इसी कारण इसमें लिखा 'मुझे माफ़ कर दो'."
"नब्बे के दशक में रूसी लोगों को काफ़ी कुछ सहना पड़ा था और येल्तसिन को इस बारे में बोलना था."
1999 में नए साल की पूर्व संध्या पर, बोरिस येल्तसिन ने क्रेमलिन में अपना विदाई संदेश रिकॉर्ड करवाया.
"देश के लोगों के लिए ये एक झटके की तरह था. शायद मैं अकेला ही था जो शांत था क्योंकि मैंने ही स्पीच लिखी थी. लोग रोने लगे थे. ये एक बेहद भावनात्मक क्षण था."
"ये जरूरी था कि ख़बर किसी भी तरह से लीक न हो. आधिकारिक घोषणा से चार घंटे पहले तक हम सभी एक ही कमरे में थे. किसी को कहीं जाने की इजाज़त नहीं थी. मैं ख़ुद वीडियो टेप लेकर टेलिविज़न स्टूडियो पहुंचा. दोपहर के वक़्त स्पीच का ब्रॉडकास्ट किया गया.
इसके बाद व्लादिमीर पुतिन कार्यवाहक राष्ट्रपति बने और फिर तीन महीने बाद उन्होंने चुनाव जीता.
युमाशेव क्या परिवार के एक सदस्य थे?
कहा जाता है कि वेलेन्टिन युमाशेव, बोरिस येल्तसिन के निकटतम सहयोगियों में से एक थे. उन्हें अक्सर इस "परिवार का सदस्य" भी कहा जाता है. कथित तौर पर 1990 के दशक के अंत येल्तसिन पर जिन लोगों का प्रभाव हुआ करता था उनमें से एक युमाशेव थे.
युमाशेव इन बातों को सिरे से खारिज करते हैं और इसे कल्पना मात्र कहते हैं.
हालांकि इसमें संदेह नहीं है कि नब्बे के दशक में जब राष्ट्रपति येल्तसिन का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था और वो अपने निकट सहयोगियों, दोस्तों और व्यापारी वर्ग के लोगों से जुड़ने लगे थे.
राजनीतिक विश्लेषक वैलरी सोलोवेई बताते हैं, "पुतिन औरों से अलग हैं. उन पर उनके सहयोगियों का कम ही प्रभाव पड़ता है."
वो कहते हैं, "पुतिन दो तरह के लोगों से अधिक संपर्क रखते हैं, पहला उनके बचपन के दोस्त जैसे कि रॉटनबर्ग बंधु और दूसरा वो जिन्होंने केजीबी के लिए काम किया है."
लेकिन वो किसी की वफादारी को अधिक कर नहीं आंकते. येल्तसिन अपने परिवर के लोगों पर बहुत भरोसा करते थे. पुतिन किसी पर भरोसा नहीं करते.
'रूसियों को पुतिन पर भरोसा है'
बीते 20 साल से राष्ट्रपति या प्रधान मंत्री के रूप में पुतिन सत्ता में बने रहे हैं. इस दौरान उन्होंने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जो उनके इर्दगिर्द घूमता रहता है. उनके शासनकाल में रूस एक निरंकुश शासन व्यवस्था बनता जा रहा है, जिसमें लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार और स्वतंत्रता कम हुई है.
सोलोवेई मानते हैं, "येल्तसिन मानते थे कि उनके पास एक मिशन था और पुतिन भी यही मानते हैं. येल्तसिन खुद को मूसा के रूप में देखाते थे और अपने देश को कम्युनिस्ट ग़ुलामी से बाहर निकालना चाहते थे."
"वहीं पुतिन का मिशन अतीत में लौटने का है. वो 20 वीं शताब्दी की सबसे बड़ी तबाही (सोवियत संघ के विघटन) का बदला लेना चाहते हैं. वो और पूर्व केजीबी अधिकारी रहे उनके सहयोगी मानते हैं कि पश्चिमी ख़ुफ़िया तंत्र के कारण सोवियत संघ का विघटन हुआ.
युमाशेव कहते हैं कि जिस आज़ाद ख़याल पुतिन को वो पहचानते थे वो आज कहीं है ही नहीं.
तो क्या पुतिन के पूर्व बॉस को पुतिन को अपने साथ काम करने का मौक़ा देने का पछतावा है?
युमाशेव कहते हैं, "बिल्कुल नहीं. मुझे कोई पछतावा नहीं है. यह स्पष्ट है कि रूस के लोग अभी भी पुतिन पर भरोसा करते हैं."
हालांकि उन्हें लगता है कि बोरिस येल्तसिन का इस्तीफ़ा देना रूस के सभी राष्ट्रपतियों के लिए एक सबक की तरह है.
वो कहते हैं कि येल्तसिन का इस्तीफ़ा बताता है कि "ये बेहद ज़रूरी है आप गद्दी को मोह छोड़ें और युवा पीढ़ी को रास्ता दें. कम से कम येल्तसिन के लिए ये बेहद महत्वपूर्ण था."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)