RTI में पूछा टुकड़े-टुकड़े गैंग में कौन हैं? गृह मंत्रालय ने नहीं दिया जवाब - पाँच बड़ी ख़बरें

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'टुकड़े-टुकड़े गैंग' के सदस्य कौन हैं?
एक आरटीआई याचिका में गृह मंत्रालय के अधिकारियों से यही सवाल पूछा गया है, जिसका जवाब मंत्रालय अब तक नहीं दे पाया है.
वरिष्ठ पत्रकार साकेत गोखले ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत पिछले साल 26 दिसंबर को एक अर्ज़ी डाली थी.
अर्जी में जो सवाल पूछे गए थे, वो कुछ इस तरह थे:
-टुकड़े-टुकड़े गैंग कैसे और कब बना?
-इसके सदस्य कौन-कौन हैं?
-इसे यूएपीए (अनलॉफ़ुल एक्टिविटीज़ प्रिवेंशन एक्ट) के तहत पाबंदी क्यों नहीं लगाई गई?
याचिकाकर्ता साकेत गोखले का कहना है कि उन्होंने ये सवाल पूरी गंभीरता से पूछे हैं और अगर तय अवधि के भीतर (26 जनवरी तक) अर्ज़ी का जवाब नहीं मिला तो वो मामले को मुख्य सूचना आयुक्त तक लेकर जाएंगे.
'टुकड़े-टुकड़े गैंग' शब्द का प्रयोग अमूमन सत्ताधारी बीजेपी और दक्षिणंथी संगठन जेएनयू के छात्रों और वामपंथी विचारधारा के युवाओं के लिए करते हैं.
कुछ दिनों पहले ही जेएनयू के पूर्व छात्र रहे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि उनके समय में जेएनयू में टुकड़े-टुकड़े गैंग नहीं था.

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JNU हिंसा: महिला आयोग पहुंचीं कोमल शर्मा
जेएनयू परिसर में कथित तौर पर नक़ाब पहन कर हमला करने वाली कोमल शर्मा ने एक टीवी चैनल के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत दर्ज कराई है.
कोमल शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा हैं और उनका आरोप है कि चैनल ने उन्हें ग़लत तरीक़े से नक़ाबपोश हमलावर बताकर बदनाम करने की कोशिश की.
जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में पाँच जनवरी की शाम हुए हमले की वीडियो फ़ुटेज में चेक शर्ट पहने और नीले स्कार्फ़ से चेहरा ढंके एक लड़की की तस्वीर देखी गई थी. वीडियो में लड़की दो अन्य नक़ाबपोश हमलावरों के साथ थी और उसके हाथ में लाठी भी थी.
यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफ़ी वायरल हुई थी और कहा जा रहा था कि यह लड़की कोमल शर्मा ही है.
सोशल मीडिया पर फ़ेसबुक मेंसेजर के ज़रिए हुई एक बातचीत का स्क्रीनशॉट भी वायरल हुआ था, जिसमें कोमल अपनी एक दोस्त से बता रही थीं कि वो पाँच जनवरी की शाम जेएनयू में थीं.
हालांकि कोमल का कहना है कि वीडियो में नज़र आ रही नक़ाबपोश लड़की वो नही हैं और उन्हें ग़लत तरीक़े से बदनाम किया जा रहा है.
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जम्मू-कश्मीर जाएंगे केंद्र सरकार के 36 मंत्री
केंद्र सरकार ने अपने 36 मंत्रियों को जम्मू-कश्मीर के दौरे पर भेजने का फ़ैसला किया है.
तय योजना के अनुसार ये मंत्री केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानीय लोगों से मिलकर उन्हें अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फ़ायदे बताएंगे.
मंत्रियों का ये दौरा 18 जनवरी से शुरू होगा. दौरे पर जाने वालों में स्मृति इरानी, रविशंकर प्रसाद और पीयूष गोयल समेत कुल 36 मंत्री शामिल हैं.
इससे पहले पिछले सप्ताह क़रीब 15 विदेशी सांसदों को केंद्र सरकार कश्मीर दौरे पर ले गई थी.
जम्मू-कश्मीर में संचार माध्यमों पर लगी पाबंदियों के लिए केंद्र सरकार को लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है.

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NPR के लिए दस्तावेज़ नहीं मांगे जाएंगे: गृह मंत्रालय
गृह मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के लिए किसी भी तरह के काग़ज़ात या दस्तावेज़ नहीं मांगे जाएंगे.
मंत्रालय ने कहा कि इसके लिए किसी तरह की बायोमेट्रिक जानकारी देने की ज़रूरत भी नहीं होगी.
मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि एनपीआर के मद्देनज़र पूछे जाने वाले अलग-अलग सवालों वाले फ़ॉर्म को जल्दी ही अंतिम रूप दे दिया जाएगा.
एनपीआर की प्रक्रिया लेकर पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों और विपक्षी दलों ने कई तरह की चिंताएं जताई थीं.
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और गर्म होगा आने वाला दशक: संयुक्त राष्ट्र
संयुक्त राष्ट्र ने चेताया है कि साल 2020 और आने वाले वक़्त में बढ़ते तापमान की वजह से मौसम बेहद गर्म और ठंडा रहेगा.
ऐसा वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के अधिक गर्मी सोख लेने की वजह से होगा.
संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को ये भी बताया कि पिछला दशक अब तक का सबसे गर्म दशक था. पिछले पाँच साल, पिछले 170 वर्षों में सबसे ज़्यादा गर्म रहे.
संयुक्त राष्ट्र ने ये जानकारी तीन वैश्विक एजेंसियों की रिसर्च के हवाले से दी है.
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