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CAA: ममता बनर्जी के मुआवज़े के ऐलान पर कर्नाटक में चढ़ा सियासी पारा
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बंगलुरू से बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक के मंगलुरू में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवज़ा देने के ममता बनर्जी के ऐलान पर सत्तारूढ़ बीजेपी के नेताओं में नाराज़गी है.
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस मृतकों के परिजनों को पाँच-पाँच लाख रुपये का मुआवज़ा देगी.
कोलकाता में गुरुवार को एक रैली में ममता ने कहा था, "कर्नाटक बीजेपी के नेता कह रहे हैं कि उनके पास पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों की मदद के लिए पैसा नहीं है. मैं आपको एक बात बताना चाहती हूँ कि हमारी तृणमूल कांग्रेस भले ही ग़रीब हो, लेकिन हमेशा लोगों के क़रीब रही है. हम मानवता के आधार पर लोगों के साथ हैं."
ममता ने कहा कि उनकी पार्टी की ट्रेड यूनियन का प्रतिनिधिमंडल मंगलुरू जाएगा और पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए लोगों के परिजनों को पाँच-पाँच लाख रुपये की सहायता राशि देगा.
ममता का ये बयान तब आया जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने 10 लाख रुपये मुआवज़े के ऐलान पर अपना मन बदल दिया.
येदियुरप्पा के मुआवज़े ऐलान के कुछ देर बाद ही मंगलुरू पुलिस ने दावा किया कि वीडियो में दिख रहा है कि जो लोग पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए हैं वो 19 दिसंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान दंगा भड़काने में शामिल थे.
येदियुरप्पा ने कहा, "अगर जाँच में ये पाया गया कि नागरिकता संशोधन क़ानून के दौरान हुए प्रदर्शन के बाद हिंसा भड़काने वालों में मृतक भी शामिल थे तो उनके आश्रितों को हम एक भी पैसा नहीं देंगे."
मृतकों के परिवारवालों का दावा है कि मारे गए लोगों का प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था और वो सिर्फ़ वहाँ खड़े थे.
ममता की आलोचना
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने पहले पुलिस फ़ायरिंग की सीआईडी से जाँच कराने का आदेश दिया था, लेकिन विपक्षी कांग्रेस पार्टी की आलोचना के बाद मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए थे.
कर्नाटक के बीजेपी नेताओं कह रहे हैं कि सरकार ने मुआवज़ा राशि जाँच पूरी होने तक रोकी है. अगर मृतकों पर लगे आरोप सही नहीं पाए गए तो परिजनों को मुआवज़ा दिया जाएगा.
लेकिन, ममता बनर्जी के बयान की बीजेपी नेता तीखी आलोचना कर रहे हैं.
बीजेपी सांसद शोभा करांदलजे ने ममता बनर्जी की आलोचना की और कहा कि ममता जब लोकसभा की सदस्य थी तो नागरिकता क़ानून की मांग को लेकर सदन के वैल में पहुँच गई थीं, लेकिन अब वो इस मुद्दे पर यू-टर्न ले रही हैं.
उन्होंने सवाल किया, "कर्नाटक में क्या हो रहा है, इससे ममता बनर्जी को क्या लेना-देना. उन्हें उन सैकड़ों हिंदुओं को मुआवज़े की परवाह करनी चाहिए जो राजनीतिक हिंसा में मारे गए हैं."
राज्य के पर्यटन मंत्री सीटी रवि ने बीबीसी से कहा, "ममता बनर्जी हमेशा राजनीति करती हैं. जब वो विपक्ष में थी, तब उन्होंने एनआरसी और नागरिकता क़ानून की मांग की थी. अब वो बदल गई हैं. उनका फ़ैसला राज्य या देश के हित में नहीं है. वो सिर्फ़ सियासत कर रही हैं."
रवि कहते हैं, "अगर वो बेक़सूर हैं, तो हमारी सरकार वो पूरी राशि देगी, जिसका ऐलान मुख्यमंत्री ने किया है."
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