नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ अब बंगाल में भड़की आग

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- Author, प्रभाकर एम.
- पदनाम, कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
असम और पूर्वोत्तर भारत के बाद शनिवार को पश्चिम बंगाल में भी नागरिकता संशोदन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन और भड़क उठा.
प्रदर्शनकारियों ने मुर्शिदाबाद ज़िले में कृष्णपुर और लालगोला स्टेशनों पर कम से कम चार ट्रेनों में आग लगा दी. इससे उनके कई कमरे जल कर राख हो गए. उन स्टेशनों पर तैनात कर्मचारियों ने वहां से भाग कर अपनी जान बचाई. राज्य में कई जगह रेलवे स्टेशनों और पटरियों में भी आग लगा दी गई.
भीड़ ने मालदा, फरक्का और हरिश्चंद्रपुर स्टेशनों पर खड़ी ट्रेनों में भी तोड़फोड़ की. हावड़ा और मुर्शिदाबाद ज़िलों में कम से कम 15 बसों को आग लगा दी गई. इसके अलावा जगह-जगह नेशनल हाइवे पर टायर जला कर और अवरोधक खड़े कर वाहनों की आवाजाही ठप कर दी गई.
बड़े पैमाने पर होने वाले इन विरोध प्रदर्शनों से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
दक्षिण पूर्व रेलवे ने लंबी दूरी की कम से कम एक दर्जन ट्रेनें रद्द कर दी हैं. कई ट्रेनों को मंजिल से पहले ही रोक दिया गया है. दूरदराज से आने वाली कुछ ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोक कर रखा गया है. इससे यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

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भीड़ ने हावड़ा जिले के सांकराइल स्टेशन के टिकट काउंटर में आग लगा दी और वहां तैनात आरपीएफ के जवानों के साथ मारपीट की. विभिन्न स्टेशनों और रेलवे पटरियों पर आग लगाने और धरना देने की वजह से पूर्व और दक्षिण पूर्व रेलवे के तमाम सेक्शनों में रेल सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं.
हावड़ा-खड़गपुर सेक्शन में कम से कम 40 लोकल ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं. रेलवे ने पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलने तक ट्रेनों के संचालन से इनकार कर दिया है.
उग्र भीड़ ने मुर्शिदाबाद ज़िले में नेशनल हाइवे पर बने एक टोल प्लाजा में भी आग लगा दी. उसी जिले में भाजपा के एक कार्यालय में भी आग लगा दी गई.
राज्यपाल जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारियों से क़ानून हाथ में नहीं लेने की अपील की है.
राज्यपाल ने कहा, "हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है. राज्य में शांति बनाए रखें."

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दूसरी ओर, ममता ने अपने एक वीडियो संदेश में प्रदर्शनकारियों से लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने की अपील की है. उन्होंने क़ानून हाथ में लेने वालों और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है.
ममता ने दोहराया कि बंगाल में इस क़ानून को लागू नहीं किया जाएगा. लेकिन बावजूद इसके विभिन्न इलाकों में जारी हिंसा और आगजनी पर अंकुश नहीं लगाया जा सका.
भाजपा ने ममता को जिम्मेदार ठहराया
दूसरी ओर, भाजपा ने इस हिंसा के लिए तृणमूल कांग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है.
पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस की वजह से ही हालात इतने बिगड़े हैं. मुख्यमंत्री को उपद्रवियों को गोली मारने का आदेश देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पूरा राज्य जल रहा है. अगर यही स्थिति जारी रही तो यहां राष्ट्रपति शासन लागू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा."

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प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने दावा किया कि इतने बड़े पैमाने पर हिंसा करने वाले लोग बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं.
घोष का सवाल था, "क्या भारतीय नागरिक इस कानून के खिलाफ ऐसा कर सकते हैं?"
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और शहरी विकास मंत्री फ़िरहाद हकीम ने भी लोगों से हिंसा में शामिल नहीं होने की अपील की है.
उन्होंने कहा, "इस उपद्रव से आम लोगों को परेशानी हो रही है. यह हिंदू बनाम मुसलमान की लड़ाई नहीं है. हमें एनआरसी और नागरिकता क़ानून का मिल कर मुक़ाबला करना होगा."

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हकीम ने कहा कि हिंसा और आगजनी करने वाले भाजपा की ही सहायता कर रहे हैं.
सीपीएम नेता मोहम्मद सलीम ने भी लोगों से शांति बहाल करने की अपील की है.
उन्होंने कहा, "हिंसा और अशांति से आम लोगों को नुकसान पहुंचा कर विरोध जताने का तरीका सही नहीं है."
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