कर्नाटक उपचुनावः बीजेपी की झोली में 12 सीटें

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरू से, बीबीसी हिन्दी के लिए

कर्नाटक में 15 विधासनभा सीटों पर हुए उपचुनावों में बीजेपी का पलड़ा भारी है.

बीजेपी ने 15 में से 12 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को सिर्फ़ दो सीटों पर संतोष करना पड़ा है.

एक सीट पर बीजेपी के बाग़ी उम्मीदवार को जीत मिली जबकि जनता दल को कोई सीट नहीं मिली.

नतीजों के बाद बीएस येदियुरप्पा के कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में बने रहना तय माना जा रहा है.

नतीजों पर मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा, "मैं ख़ुश हूँ कि लोगों ने बहुत अच्छा फ़ैसला दिया है. अब हम बिना किसी परेशानी के जनता के हितों वाली और स्थायी सरकार दे पाएँगे."

झारखंड की एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक की जनता का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा, "राजनीतिक स्थिरता के लिए देश की जनता बीजेपी पर कितना भरोसा करती है, ये आज हम सबके सामने है. बीजेपी क़रीब क़रीब हर सीट पर आगे है. मैं कर्नाटक की जनता के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूँ."

224 सीटों वाले विधानसभा में बीजेपी को खुद के दम पर सरकार बनने के लिए कम से कम सात सीटें जीतनी होंगी.

इन सभी 15 सीटों पर 5 दिसंबर को उपचुनाव हुए थे.

बीजेपी के सत्ता में आने से पहले राज्य में कांग्रेस और जेडीएस की सरकार थी लेकिन राजनीतिक जोड़-घटाव के बाद बीजेपी सत्ता में आने में कामयाब रही थी.

साल 2018 में हुए चुनावों में बीजेपी ने 105 सीटों पर जीत का परचम लहराया था. सत्तासीन होने से पार्टी महज 7 सीटों से पीछे रह गई थी.

इसके बावजूद बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले त्यागपत्र दे दिया.

इसके बाद 80 सीटों वाली कांग्रेस ने 37 सीटों वाले जेडीएस को समर्थन दे दिया था और दोनों ने मिल कर राज्य में सरकार का गठन किया था.

इस गठबंधन की सरकार में मुख्यमंत्री का पद जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को दिया गया था, लेकिन बीच में कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और राज्य में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिर गई.

इस्तीफ़े के बाद विधानसभा के स्पीकर ने सभी को अयोग्य ठहरा दिया था और उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी थी. इसके बाद 17 में से 15 ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और दो ने हाईकोर्ट का.

सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अयोग्यता को बरकरार रखा लेकिन चुनाव लड़ने पर लगी रोक को हटा दिया. वहीं दो विधायकों के मामले अभी चल रहे हैं, इसलिए 15 सीटों पर ही उपचुनाव कराए गए हैं.

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