You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
नरेंद्र मोदी पर लेख लिखने वाले आतिश अली तासीर का OCI कार्ड रद्द होने पर विवाद
ब्रिटिश लेखक और पत्रकार आतिश अली तासीर ने कहा है कि उनका ओवरसीज़ सिटीज़न ऑफ़ इंडिया (ओसीआई) दर्जा एक "कुटिल योजना" के तहत ख़त्म किया गया.
भारत सरकार ने आतीश का ओसीआई कार्ड रद्द कर दिया है जिसे लेकर विवाद पैदा हो गया है.
कई लोग इस फ़ैसले को टाइम पत्रिका में छपे उनके लेख से जोड़कर देख रहे हैं जिसमें उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री की आलोचना करते हुए उन्हें 'India's Divider In Chief' या 'महाविभाजनकारी' बताया था.
भारत के गृह मंत्रालय ने गुरुवार को ये कहते हुए आतिश का ओसीआई दर्जा ख़त्म कर दिया कि उन्होंने ये बात "छिपाई कि उनके पिता पाकिस्तानी मूल के थे".
लेकिन आतीश का कहना है कि उन्हें अपना जवाब देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया.
आतिश अली तासीर के पिता सलमान तासीर पाकिस्तान के उदारवादी नेता थे. सलमान को उनके अंगरक्षक ने ही पाकिस्तान में ईशनिंदा क़ानून के ख़िलाफ़ बोलने पर गोली मार दी थी. तासीर की मां भारत की जानी-मानी पत्रकार तवलीन सिंह हैं.
ओसीआई कार्ड भारतीय मूल के विदेशी लोगों को भारत आने, यहां रहने और काम करने का अधिकार देता है. हालांकि, उन्हें वोट देने और संवैधानिक पद प्राप्त करने जैसे कुछ अन्य अधिकार नहीं होते.
भारतीय मूल के लोगों (पीआईओ) को ओसीआई (विदेश में रहने वाले भारतीय) कार्ड दिया जाता है.
फ़ैसले पर आतिश की प्रतिक्रिया
आतिश तासीर ने बीबीसी संवाददाता सौतिक बिस्वास को बताया कि वे अपना ओसीआई कार्ड रद्द करने के फ़ैसले से काफ़ी आहत हैं और उन्हें लगता है कि "जिस तरह से ऐसा किया गया वो बहुत कुटिल योजना थी".
उन्होंने कहा, "पहले उन्होंने अपने एक आदमी से मुझे उग्र इस्लामी कहलवाकर मेरी छवि ख़राब की और फिर इस घटना को प्रेस को लीक करवाया."
आतिश ने बताया कि उनके पास 2000 से ही पीआईओ कार्ड है जिसे बाद में ओसीआई कार्ड में बदल दिया गया.
उन्होंने बताया कि वो दो साल से 10 साल और फिर 26 साल से 35 साल की उम्र तक भारत में रहे हैं. उनका कहना है कि उनके पास भारत में बैंक खाते हैं, आधार कार्ड है और वे भारत में टैक्स भी भरते रहे हैं.
आतिश ने कहा,"मेरे पिता का नाम इन दस्तावेज़ों में दर्ज है. मेरे पास इस बात को साबित करने का कोई काग़ज़ी सबूत नहीं है क्योंक हमारे बीच कोई संपर्क नहीं था और मेरी मां भी उनसे अलग रहती थीं".
आतिश तासीर ने अपने पिता के साथ संबंध के बारे में विस्तार से एक किताब में लिखा था जो 2007 में प्रकाशित हुई थी. उनकी मां तवलीन सिंह एक पत्रकार हैं. उनके माता और पिता की शादी नहीं हुई थी और आतिश ने अपने जवाब में लिखा है कि उनकी मां ही क़ानूनन उनकी अभिभावक हैं.
आतिश ने कहा, "अगर कोई भ्रम था तो वो मुझसे पूछ सकते थे क्योंकि उन्हें पता था कि मैं जान-बूझकर कुछ भी ग़लत नहीं कर रहा. अपने पिता का नाम छिपाने का कोई सवाल ही नहीं हैः उनका नाम दस्तावेज़ पर है, और मैं उनके बारे में लिखता भी रहा हूँ."
क्या है मामला
मामले ने तूल गुरुवार को अंग्रेज़ी न्यूज़ वेबसाइट 'द प्रिंट' के एक लेख से पकड़ा जिसमें लिखा था कि 'टाइम पत्रिका में मोदी की आलोचना वाले लेख के बाद सरकार लेखक आतिश अली तासीर के ओसीआई कार्ड को रद्द करने पर विचार कर रही है.'
आतिश तासीर ने अमरीका की प्रतिष्ठित पत्रिका 'टाइम' के इस साल के मई अंक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक लेख लिखा था.
पत्रिका के 20 मई 2019 वाले अंतरराष्ट्रीय संस्करण के कवर पेज पर छपे उस लेख के शीर्षक में नरेंद्र मोदी की तस्वीर के साथ 'India's Divider In Chief (महाविभाजनकारी)' लिखा गया था. इस लेख को लेकर भारत में काफ़ी विवाद भी हुआ था.
मगर 'द प्रिंट' की इस स्टोरी पर आपत्ति जताते हुए गृह मंत्रालय की प्रवक्ता ने गुरुवार रात को अपने ट्विटर हैंडल पर स्पष्टीकरण दिया और इसे ग़लत बताया.
आधिकारिक ट्विटर हैंडल से कहा गया है, "द प्रिंट में जो रिपोर्ट किया गया है वो पूरी तरह से ग़लत है और उसमें कोई तथ्य नहीं है."
इसके आगे भी गृह मंत्रालय की प्रवक्ता के ट्विटर हैंडल से कई ट्वीट किए गए. इनमें से एक ट्वीट में लिखा गया है, "श्री आतिश अली ने पीआईओ आवेदन करते समय ये बात छिपाई कि उनके पिता पाकिस्तानी मूल के थे."
"श्रीमान् तासीर को उनके पीआईओ/ओसीआई कार्ड के संबंध में जवाब/आपत्तियां दर्ज करने का मौका दिया गया लेकिन वो ऐसा करने में असफ़ल रहे."
"इसलिए, आतिश अली तासीर नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार ओसीआई कार्ड प्राप्त करने के लिए आयोग्य हो जाते हैं. उन्होंने बुनियादी ज़रूरी बातों और छिपी हुई जानकारियों को लेकर स्पष्ट रूप से अनुपालन नहीं किया है."
आतिश ने किया खंडन
आतिश अली तासीर ने गृह मंत्रालय की बातों को ग़लत बताते हुए एक तस्वीर ट्वीट की है.
उन्होंने गृह मंत्रालय की प्रवक्ता के एक ट्वीट का ज़िक्र करते हुए लिखा, ''ये सच नहीं है. मेरे जवाब पर ये कांउसिल जनरल की एक्नॉलेजमेंट (पावती) है. मुझे जवाब देने के लिए 21 दिनों की जगह सिर्फ़ 24 घंटों का समय दिया गया. तब से मंत्रालय की तरफ़ से मुझे कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है."
आतिश तासीर ने ट्वीट के साथ अपने मेबलॉक्स की एक तस्वीर भी लगाई है. इसमें दिख रहा है कि उन्होंने भारतीय गृह मंत्रालय से मिले एक पत्र के संबंध में अपना जवाब दिया है और डिप्टी काउंसिल जनरल के एक मेल में इस जवाब को प्राप्त करने की बात कही गई है.
इसके लगभग दो घंटे बाद अपने ओसीआई कोर्ड के रद्द होने की जानकारी दी और इस संबंध में मिली सूचना वाले ईमेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया है.
इसमें नियमों का हवाला देते हुए ओसीआई पंजीकरण को रद्द करने की सूचना देते हुए आतिश तासीर को अपना ओसीआई कार्ड न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्यदूतावास में जमा करने के लिए कहा गया है.
इस स्क्रीनशॉट के साथ आतिश ने लिखा है, "मुझे ये प्राप्त हुआ. कुछ घंटे पहले तक गृह मंत्रालय ख़ुद मान रहा था कि उसे नहीं पता कि मैंने जवाब दिया है या नहीं. मगर अब वे किसी तरह- संभवत: जब गृह मंत्रालय बंद है- मेरे मामले की समीक्षा 'उचित अधिकारी' से करवाने और मेरे ओसीआई को रद्द करने में सफल रहे हैं."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)