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भारत में बिज़नेस करना आसान पर निवेश कहां है?
- Author, सुरंजना तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत में जब कारोबार करने की बात आती है तो कई तरह की चीज़ें दिमाग में आती हैं.
लंबे वक्त तक उद्यमियों की शिकायत रही है कि एक कंपनी खड़ी करते वक्त भारत में नौकरशाही और लालफीताशाही का सामना करना पड़ता है. मंज़ूरी मिलने में देरी, कर और ज़मीन लेने में दिक्कतें और सामान सोर्स करने की चुनौतियां इसमें आम थी.
लेकिन विश्व बैंक की ओर से इसी हफ्ते जारी की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक आज भारत में कारोबार करना पहले से काफ़ी आसान हुआ है.
डूइंग 'बिज़नेस इंडेक्स' में भारत 14 स्थान की छलांग लगाकर 63वें नंबर पर आ गया है. जबकि तीन साल पहले भारत इस सूची में 130वें नंबर पर था.
लेकिन ये हुआ कैसे?
गुरुवार को जारी विश्व बैंक की रिपोर्ट "डूइंग बिज़नेस 2020" के मुताबिक भारत ने आर्थिक मोर्चों पर कई सुधार किए हैं और वो लागातार तीसरे साल सुधार करने वाले विश्व के टॉप दस देशों में शामिल रहा है.
इसमें इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी सुधार, कंस्ट्रक्शन के परमिट, टैक्स भरने और सीमा पार व्यापार से जुड़ी प्रक्रिया में सुधार शामिल है.
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' अभियान का भी ज़िक्र है. जिसका मक़सद देश की प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए मेन्युफेक्चरिंग में विदेशी निवेश आकर्षित करना है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि "भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार को देखते हुए ये सुधार सराहनीय हैं."
क्या कारोबारी इससे सहमत हैं?
रिचा बजाज ने इस साल जून में अपना फ़ैशन स्टार्ट-अप 'पैन्ट एंड पजामा' शुरू किया था.
बजाज ने बीबीसी से कहा, "हर कारोबार के लिए जीएसटी पंजीकरण अनिवार्य है और अब ये बहुत ही आसान हो गया है. सरकारी वेबसाइट में ये बहुत आसानी से हो जाता है."
वो कहती हैं, "साथ ही अब ट्रेवलिंग बहुत आसान और सस्ती हो गई है, जो पहले नहीं थी. इससे मुझे अपना कारोबार भारत के किसी भी दूसरे राज्य में करने में आसानी हो रही है."
ट्रेवल स्टार्ट-अप करने वाले वरुण हुजा कहते हैं कि पंजीकरण के डिजिटलाइज़ेशन की सरकार की कोशिशों से कारोबार का माहौल काफी बेहतर हुआ है.
बजाज और आहूजा दोनों के बिज़नेस मुंबई में हैं. ये भारत के उन दो शहरों में शामिल है, जहां डूइंग बिज़नेस इंडेक्स के लिए सर्वे हुए थे. (दूसरा शहर दिल्ली था.)
तो क्या दिल्ली और मुंबई के बाहर भी स्थितियां बेहतर हुई हैं?
पुलकित कौशिक हरियाणा में दवाओं का व्यवसाय करते हैं और उन्होंने अपना काम इस साल अप्रैल में ही शुरू किया है.
कौशिक ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "बिजली कनेक्शन, ज़मीन खरीदने और प्रदूषण से जुड़े सर्टिफिकेशन जैसे काम ऑनलाइन हो जाते हैं. इसके अलावा दवाओं के अप्रूवल सर्टिफ़िकेशन और नए लाइसेंस को लेकर भी ऑनलाइन फॉलोअप किया जा सकता है, इसका मतलब मुझे इसके लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं है."
शशांक दीक्षित एक क्लाउ बेस्ड सॉफ्टवेयर सर्विस, डेसकारा के सीईओ हैं. उनका दफ्तर पुणे में है.
दीक्षित कहते हैं, "भारत सरकार के कई क़दम, जैसे बिल्डिंग का परमिट लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण, कागज़ात इंटरनेट के ज़रिए जमा करने की सुविधा, से स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बेहतर करने और भारत की जीडीपी वृद्धि दर को बढ़ाने में मदद मिलेगी."
लेकिन क्या अब भी कुछ मुश्किलेंहैं?
बजाज कहते हैं, "सबसे मुश्किल और निरर्थक चीज़ है कि हर राज्य में जीएसटी की अलग प्रक्रिया है, जिससे मेरे ख़र्चे बढ़ जाते हैं. और किसी नए कारोबार के लिए टैक्स बहुत ज़्यादा होते हैं."
उन्होंने बताया, "नया बिज़नेस शुरू करने में और भी बहुत ख़र्चे होते हैं, इसलिए अगर सरकार नए कारोबारियों के लिए टैक्स में कुछ कटौती कर दे या जीएसटी, बिजली के बिल में कुछ राहत दे दे तो मुझे लगता है इससे मदद होगी."
आहूजा कहते हैं कि इस चीज़ को लेकर कोई रोडमैप नहीं है कि क्या कागज़ात चाहिए और उसे कैसे प्रोसेस करना है.
उन्हें लगता है कि सरकार को और गाइडेंस देना चाहिए, जिससे कारोबार में आने वाली और दिक़्क़तों को सुलझाया जा सके.
पुलकित कौशिश के मुताबिक सरकारी टेंडरों के लिए आवेदन प्रक्रिया बहुत ही धीमी थी और उन्हें अपने मामले का स्टेटस जानने के लिए कई सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े.
उनके मुताबिक आवेदन को मंज़ूरी मिलने के बाद चीज़ें बहुत तेज़ी से हुईं.
मैसेजिंग ऐप फ्लोक और सॉफ्टवेयर कंपनी ज़ेटा के सीएफओ मेहुल तुरखिया ने बीबीसी से कहा, "देश के कई हिस्सों में एक बिज़नेस चलाने के लिए बिजल, पानी और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर हासिल करने में मुश्किलें आती हैं."
सरकार क्या कहती है?
ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की रैंगिंग में स्थिति बेहतर करना नरेंद्र मोदी सरकार का प्रमुख लक्ष्य था.
भारत सरकार 2020 तक टॉप 50 अर्थव्यस्थाओं में शामिल होना चाहती थी और इसके लिए कारोबार से जुड़े कई क्षेत्रों पर काम किया गया.
सरकार ने इस साल के सुधार का स्वागत किया है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने उम्मीद जताई कि 2024-25 तक भारत इंडेक्स में टॉप 25 देशों में शामिल हो जाएगा.
गोयल ने माना कि आर्थिक सुस्ती की वजह से कारोबार प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि जल्द ही ये स्थिति ठीक हो जाएगी और मांग और निवेश में बढ़ोतरी होगी.
लेकिन अगर यहां कारोबार करना इतना आसान है तो निवेश क्यों नहीं आ रहा?
मेहुल तुरखिया कहते हैं कि कारोबार को शुरू करने और उसे चलाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर किए जाने की ज़रूरत अब भी है.
तुरखिया ने बीबीसी से कहा, "विदेशी निवेश तब बढ़ता है, जब स्थिरता हो और कानूनों को कड़ाई से लागू किया गया हो, कारोबार को शुरू करने, चलाने के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर हो और टैक्स का फ्रेमवर्क अच्छा हो. भारत सरकार को इन सभी मानदंडों पर खुदको साबित करना होगा."
भारत के लिए ये ना सिर्फ विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए ज़रूरी है, बल्कि नौकरियां पैदा करने और लोगों की क्रय शक्ति में सुधारकर आर्थिक सुस्ती से निपटने के लिए भी ज़रूरी है.
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