अयोध्या पर अब बहुत हुआ, पाँच बजे सुनवाई ख़त्म: जस्टिस गोगोई

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई ने बुधवार को कहा कि राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुनवाई शाम पाँच बजे तक पूरी हो जाएगी़. जस्टिस गोगोई ने कहा, ''हम पाँच बजे तक सुनवाई पूरी करे लेंगे. अब बहुत हो गया.''
उम्मीद की जा रही है कि 134 साल पुराने इस विवाद पर जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर होने से पहले फ़ैसला सुना देंगे.
सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या पर फ़ैसला आने की उम्मीद और दिवाली को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने शहर में धारा 144 लगा दी है. इसके तहत एक साथ चार लोग इकट्ठा नहीं हो सकते हैं. ड्रोन उड़ाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है. अयोध्या में धारा 144 दस दिसंबर तक लागू रहेगी.
सीनियर वकील के परासरन इस विवाद के एक पक्ष हैं और उन्होंने मंगलवार को अदालत में कहा था कि हिन्दू सदियों से इसके लिए लड़ रहे हैं जो मानते हैं कि यहां राम का जन्म हुआ था और मुसलमान किसी दूसरी मस्जिद में नमाज़ अदा कर सकते हैं.
के परासरन ने कहा था, ''मुसलमान किसी दूसरी मस्जिद में नमाज़ अदा कर सकते हैं. केवल अयोध्या में 55-60 मस्जिद हैं. लेकिन हिन्दुओं के लिए यह राम का जन्मस्थान है. हम जन्मस्थान नहीं बदल सकते.''

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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुस्लिम याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करते हुए राजीव धवन से कहा था, ''अगर आपको लग रहा है कि कोर्ट हिन्दू पार्टी से ज़्यादा सवाल कर रहा है तो हम इसे माहौल को हल्का बनाने के लिए कर रहे हैं. आप हर चीज़ को गंभीरता से न लीजिए.''
आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का 40वां दिन है. कहा जा रहा है सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने अपनी अपील वापस ले ली है लेकिन अभी तक सुप्रीम कोर्ट से ऐसी कोई पुष्टि नहीं आई है.
मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की संवैधानिक पीठ ने 6 अगस्त से इस पर सुनवाई शुरू की थी. इस पीठ में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर हैं.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थ तय किए थे कि बातचीत के ज़रिए मामला सुलझा लिया जाए लेकिन यह कोशिश नाकाम रही थी. 2010 में अयोध्या पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ 14 याचिकाएं दाख़िल हुई थीं.
हिन्दुओं के एक बड़े समूह का मानना है कि 16वीं सदी में बाबरी मस्जिद राम मंदिर की जगह बनाई गई थी. इसी तर्क के आधार पर 6 दिसंबर को हज़ारों की भीड़ ने बाबरी मस्जिद तोड़ दी थी. बाबरी मस्जिद टूटने के बाद देश भर में दंगे हुए थे.
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