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रफ़ाल हमने आत्मरक्षा के लिए लिया है, किसी पर हमले के लिए नहीं: राजनाथ सिंह
फ्रांस ने मंगलवार को भारत को पहला रफ़ाल लड़ाकू विमान सौंप दिया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को औपचारिक रूप से रफ़ाल विमान सौंपा गया.
भारत को विमान सौंपे जाने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रफ़ाल लड़ाकू विमान पर 'शस्त्र पूजा' की. रक्षा मंत्री ने विमान पर सिंदूर से 'ॐ' लिखा और विमान पर फूल, नारियल और लड्डू चढ़ाए. इसके अलावा रफ़ाल विमान के पहिए के नीचे दो नींबू भी रखे गए.
इसके बाद रक्षा मंत्री रफ़ाल लड़ाकू विमान में उड़ान भरी. इसके बाद उन्होंने कहा, "कैप्टन फ़िल ने विमान उड़ाया. बहुत ही आरामदेह और सहज उड़ान रही. बीच में इन्होंने जानकारियां दीं की हम कितनी ऊंचाई पर हैं. हमने सुपरसोनिक स्पीड से भी उड़ान भरी है."
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि रफ़ाल को भारत ने आत्मरक्षा के लिए लिया है. उन्होंने कहा, "रफ़ाल के कारण बेशक हमारी वायुसेना की युद्धक क्षमता में बहुत बढ़ोतरी हुई है. मगर हम अपनी युद्धक क्षमता को किसी पर आक्रमण के लिए नहीं बल्कि आत्मरक्षा के लिए बढ़ा रहे हैं."
'रणनीतिक साझेदारी'
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्रांस के मेरिनैक में कहा, ''मुझे खुशी है कि रफ़ाल की डिलीवरी समय से हो रही है. मैं आश्वस्त हूं कि यह हमारे वायुसेना की ताक़त को और मज़बूत करेगा. मैं दो प्रमुख लोकतंत्रों के बीच सभी क्षेत्रों में आगे भी सहयोग करने का इच्छुक हूं.''
उड़ान भरने से पहले उन्होंने कहा था कि आज भारत-फ्रांस के रणनीतिक साझेदारी में एक नया अध्याय जोड़े जाने के मौके पर मैं रफ़ाल लड़ाकू विमान से उड़ान भरूंगा, जो एक सम्मान की बात है.
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा, ''आज भारत में दशहरा है. यह बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन है. आज 87वां वायु सेना दिवस भी है इसलिए यह दिन कई मायनों में प्रतीकात्मक हो जाता है.''
राजनाथ सिंह ने कहा, ''मुझे बताया गया है कि रफ़ाल एक फ्रेंच शब्द है जिसका अर्थ आंधी होता है. मैं आश्वस्त हूं कि ये अपने नाम के हिसाब से हमारी वायुसेना को मजबूत करेगा. मुझे विश्वास है कि रफ़ाल क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत के हवाई ताक़त को तेज़ी से मजबूत करेगा.''
रफ़ाल का निर्माण करने वाली कंपनी दासॉ एविएशन के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने इस अवसर पर कहा कि यह भारतीय वायु सेना और भारत के साथ साथ फ्रांस और डसॉ एविएशन के लिए भी बड़ा दिन है. हमने जो अनुबंध किया था और अब वह उड़ान भरने के लिए तैयार है. हम काफ़ी गौरवान्वित हैं.
इस बीच राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि 'आज फ़्रांस में रफ़ाल का शस्त्र पूजन किया. दशमी के अवसर पर शस्त्रों का पूजन भारत की प्राचीन परम्परा रही है.'
2020 तक भारत से उड़ान भरेंगे रफ़ाल
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, भारत ने फ्रांस से ख़रीदे गए 36 विमानों में से अपना पहला रफ़ाल लड़ाकू विमान मंगलवार को प्राप्त किया.
पीटीआई के मुताबिक, भारत ने सितंबर 2016 में 59,000 करोड़ रुपये के सौदे में फ्रांस से 36 रफ़ाल लड़ाकू विमानों का ऑर्डर दिया था. चार रफ़ाल जेट विमानों का पहला जत्था मई 2020 तक भारत में अपने घरेलू बेस पर उड़ान भरेगा.
सितंबर 2022 तक सभी 36 जेट विमानों के भारत आने की संभावना है. इसके लिए भारतीय वायुसेना ने कथित रूप से तैयारी की है. जिसमें आवश्यक बुनियादी ढांचे और पायलटों का प्रशिक्षण शामिल है.
राजनीति मुद्दा
साल 2010 में यूपीए सरकार ने ख़रीद की प्रक्रिया फ़्रांस से शुरू की थी. 2012 से 2015 तक दोनों के बीच बातचीत चलती रही. 2014 में यूपीए की जगह मोदी सरकार सत्ता में आई.
सितंबर 2016 में भारत ने फ़्रांस के साथ 36 रफ़ाल विमानों के लिए करीब 59 हज़ार करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए. मगर कांग्रेस ने सौदे पर सवाल उठा दिए.
कांग्रेस ने दावा किया था कि यूपीए सरकार के दौरान एक रफ़ाल फाइटर जेट की कीमत 600 करोड़ रुपये तय की गई थी लेकिन मोदी सरकार के दौरान जब डील को अंतिम रूप दिया गया तो उसके मुताबिक प्रत्येक रफ़ाल करीब 1600 करोड़ रुपये का पड़ेगा.
रफ़ाल की ख़रीद में अनियमितता का आरोप लगाते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा के साथ साथ वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भारत की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट में इस डील को लेकर स्वतंत्र जांच की याचिकाएं दायर कीं लेकिन दिसंबर 2018 में इस डील से संबंधित दायर सभी याचिकाओं को कोर्ट ने ख़ारिज करते हुए कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग ठुकरा दी थी.
कांग्रेस ने मई 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भी रफ़ाल सौदे में कथित अनियमितताओं को मुद्दा बनाकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की थी.
क्या हैं रफ़ाल की ख़ूबियां
- रफ़ाल विमान परमाणु मिसाइल डिलीवर करने में सक्षम.
- दुनिया के सबसे सुविधाजनक हथियारों को इस्तेमाल करने की क्षमता.
- इसमें दो तरह की मिसाइलें हैं. एक की रेंज डेढ़ सौ किलोमीटर है तो दूसरी की रेंज क़रीब तीन सौ किलोमीटर की है.
- परमाणु हथियारों से लैस रफ़ाल हवा से हवा में 150 किलोमीटर तक मिसाइल दाग सकता है और हवा से ज़मीन तक इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर है.
- रफ़ाल जैसा विमान चीन और पाकिस्तान के पास भी नहीं है.
- ये भारतीय वायुसेना के इस्तेमाल किए जाने वाले मिराज 2000 का एडवांस वर्जन है.
- भारतीय एयरफ़ोर्स के पास 51 मिराज 2000 हैं.
- दासॉ एविएशन के मुताबिक, रफ़ाल की स्पीड मैक 1.8 है. यानी क़रीब 2020 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार.
- ऊंचाई 5.30 मीटर, लंबाई 15.30 मीटर. रफ़ाल में हवा में तेल भरा जा सकता है.
- रफ़ाल लड़ाकू विमानों का अब तक अफ़ग़ानिस्तान, लीबिया, माली, इराक़ और सीरिया जैसे देशों में हुई लड़ाइयों में इस्तेमाल हुआ है.
- पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि रफ़ाल का टारगेट अचूक होगा. रफ़ाल ऊपर-नीचे, अगल-बगल यानी हर तरफ़ निगरानी रखने में सक्षम है. मतलब इसकी विजिबिलिटी 360 डिग्री होगी. पायलट को बस विरोधी को देखना है और बटन दबा देना है और बाक़ी काम कंप्यूटर कर लेगा.
- कई खूबियों से लैस जो रफ़ाल फ़्रांस से ख़रीदा जा रहा है उसे आधिकारिक रूप से परमाणु हथियारों से लैस नहीं किया गया है. ऐसा अंतरराष्ट्रीय संधियों के कारण किया गया है.
- हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि भारत मिराज 2000 की तरह इसे भी अपने हिसाब से विकसित कर लेगा.
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