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पाकिस्तान चीन के मुसलमानों की चिंता क्यों नहीं करता: अमरीकी अधिकारी- पांच बड़ी ख़बरें
अमरीका के विदेश मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पर परोक्ष रूप से निशाना साधा है.
दक्षिण और मध्य एशिया के मामलों के लिए अमरीका के विदेश मंत्रालय की राजदूत एलिस वेल्स ने पूछा है कि इमरान ख़ान सिर्फ़ कश्मीर के मुसलमानों की चिंता क्यों करते है, चीन के मुसलमानों की चिंता क्यों नहीं है.
एलिस वेल्स ने ये बातें संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें अधिवेशन के दौरान एक ख़ास बातचीत में कहीं.
इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में कश्मीर में लगी पाबंदियों पर ज़ोर-शोर से आवाज़ उठाई थी. जब इस बारे में एलिस से सवाल किया गया, तो उन्होंने चीन में वीगर मुसलमानों की दयनीय स्थिति पर पाकिस्तान ख़ामोशी को लेकर सवाल उठाए.
वेल्स ने ये भी कहा कि उन्हें भारत से उम्मीद है कि वो कश्मीर में लगाई गई पाबंदियां जल्द ही ख़त्म कर देगा.
एलिस वेल्स ने कहा, "मैं पश्चिमी चीन में बंद उन मुसलमानों के लिए भी ऐसी ही चिंता देखना चाहूंगी, उन मुसलमानों के लिए जो सचमुच जेल जैसी जगहों में रहने पर मज़बूर हैं. अगर हम मुसलमानों के मानवाधिकार की बात करें तो वो सिर्फ़ कश्मीर तक ही सीमित नहीं है."
एलिस वेल्स ने इससे पहले भारत से भी कश्मीर में लगी पाबंदियों में ढील देने की अपील की थी.
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा था, ''हमें भारत की ओर से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है. हमें उम्मीद है कि पाबंदियां हटाई जाएंगी और हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा किया जाएगा.''
'तटीय क्षेत्रों में आतंकी हमले की आशंका से इनकार नहीं'
भारतीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि 'पड़ोसी देश के आतंकियों' द्वारा भारत के समुद्री और तटीय रास्तों के इस्तेमाल आतंकी हमलों के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
रक्षामंत्री ने कहा कि हम तटीय और समुद्री रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. राजनाथ ने ये भी कहा कि भारत उन्हें चैन से रहने नहीं देगा जो उसे परेशान करेंगे.
उन्होंने कहा, "एक रक्षा मंत्री के तौर पर मैं यह आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारे देश की समुद्री रक्षा पूरी तरह से मजबूत है.''
एएसआई की रिपोर्ट साधारण राय नहीं है: सुप्रीम कोर्ट
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थान के बारे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट किसी की साधारण राय नहीं है.
इससे पहले बुधवार को मुस्लिम पक्षों की पैरवी कर रही वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने एएसआई की रिपोर्ट को "पुरातत्वविदों की धारणा" कहा था.
अरोड़ा का कहना था कि कि इस रिपोर्ट में ज़रूरी साक्ष्य शामिल करने चाहिए थे और इन सबूतों से ही विवादित जगह पर राम मंदिर की मौजूदगी साबित हो सकती थी.
कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद में सुनवाई करते हुए कहा कि 2003 में पेश हुई इस रिपोर्ट के लिए एएसआई की टीम इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशन में काम कर रही थी.
33वें दिन इस मामले की सुनवाई करते हुए चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा, "एएसआई की रिपोर्ट के निष्कर्ष शिक्षित और विकसित दिमागों ने निकाले थे."
सेना का हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त, दो की मौत
भारतीय थलसेना का एक चीता हेलिकॉप्टर शुक्रवार दोपहर पूर्वी भूटान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
हादसे में हेलिकॉप्टर के दोनों पायलटों की मौत हो गई.
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक़, एक इंजन वाला यह हेलिकॉप्टर अरुणाचल प्रदेश के खिरमू से भूटान के योनफुला जा रहा था और दोपहर करीब एक बजे के बाद उसका संपर्क टूट गया.
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ग्रेटा की अपील पर सड़कों पर उतरे लाखों छात्र
कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल में क़रीब डेढ़ लाख छात्र-छात्राओं ने जलवायु के मुद्दे को लेकर एक बड़ी रैली निकाली.
इससे पूर्व पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो से मुलाक़ात की और उनसे कहा कि वे और दुनिया के दूसरे नेता ग्रीन हाउस प्रभाव को लेकर जो प्रयास कर रहे हैं वे पर्याप्त नहीं हैं.
ट्रूडो ने शहरों को बेहतर बनाने और आग से बर्बाद हो चुके जंगलों को दोबारा से बसाने के लिए दो अरब पेड़ों को लगाने के लिए पर्याप्त धनराशि जारी करने का वादा किया.
इसके बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए थनबर्ग ने कहा, "आज हम अपने स्कूलों में नहीं है, आप में से कुछ लोग दफ़्तर नहीं गए क्योंकि यह आपातकाल है और हम सिर्फ़ पीछे खड़े नहीं हो सकते. कुछ लोग हमसे कहेंगे कि जिस समय हमें अपना पाठ्यक्रम पूरा करने में वक़्त लगाना चाहिए हम यहां हैं, समय बर्बाद कर रहे हैं. हमारा उनसे कहना है कि हम दुनिया बदल रहे हैं.''
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