You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ग्रेटा थनबर्ग को क्या बीमारी है?
- Author, नूतन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
स्वीडन की 16 साल की पर्यावरण ऐक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग पूरी दुनिया में छाई हैं. जलवायु परिवर्तन को लेकर ग्रेटा ने संयुक्त राष्ट्र में जो भाषण दिया उसे लाखों लोगों ने देखा और शेयर किया. अपने भाषण में ग्रेटा ने विश्व के नेताओं को झकझोर कर रख दिया. जलवायु परिवर्तन को लेकर उनकी चिंता अब विश्व भर में फैल गई है.
ग्रेटा जो कर रही हैं उसकी चर्चा पूरी दुनिया में है. पूरी दुनिया के युवा उनसे प्रभावित होकर जलवायु परिवर्तन के लिए आवाज़ उठा रहे हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक ग्रेटा थनबर्ग एस्परजर सिंड्रोम से ग्रसित हैं. एस्परजर सिंड्रोम ऑटिज़्म की एक फॉर्म है. ग्रेटा ने एक बार बताया कि उन्होंने लंबे समय तक अवसाद, अलगाव और चिंता झेली है.
दो अप्रैल को ऑटिज़्म अवेयरनस डे के दिन ग्रेटा ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट डाला जिसमें उन्होंने लिखा, "आज ऑटिज़्म अवेयरनस डे है और ऑटिज़्म कोई तोहफ़ा नहीं है. कई लोगों के लिए ये स्कूल, कामकाजी जगहों और बुली करने वाले लोगों के ख़िलाफ़ कभी न ख़त्म होने वाली लड़ाई है. लेकिन सही परिस्थितियों में सही सुधारों के साथ ये एक महान शक्ति बन सकता है."
"मैंने भी अवसाद, अलगाव, विकार और चिंता झेली है लेकिन इलाज के बिना मैं कभी स्कूल न जाने की अपनी ये हड़ताल शुरू नहीं कर पाती. क्योंकि फिर मैं भी बाक़ी सब लोगों की तरह ही होती."
ग्रेटा को एस्परजर सिंड्रोम है. ये एक तरह का ऑटिज़्म डिसॉर्डर है.
क्या है ये सिंड्रोम?
एस्परजर सिंड्रोम एक डेवेलपमेंट डिसऑर्डर है. ये डिसऑर्डर ऑटिज़्म का ही एक प्रकार है जो लोगों के बात-चीत करने की स्किल को प्रभावित करता है.
मैक्स हॉस्पीटल में काम कर रही मानसिक कनस्लटेन्ट सौम्या मुदगल बताती हैं, "एस्पजर सिंड्रोम लड़कियों के मुक़ाबले लड़कों में ज़्यादा पाया जाता है. दो से छह साल के बच्चे में इसकी पहचान हो जाती है. जो लोग इससे ग्रसित होते हैं उन्हें सामाजिक संपर्क बनाने में मुश्किल होती है या यूं कहे कि वो आम लोगों की तरह बात-चीत करने में समर्थ नहीं होते. ऐसे लोग दूसरों की गतिविधियों को भी समझ नहीं पाते और उनकी भावनात्मक क्षमता भी कमज़ोर होती है.''
सौम्या मुदगल बताती हैं कि एस्परजर सिंड्रोम वाले लोगों में काफ़ी ओसीडी देखी जाती है. इसमें लोगों को एक ही तरह के ख्याल बार-बार आते हैं.
क्या है इसका इलाज?
इसके इलाज के बारे में पूछे जाने पर सौम्या बताती हैं कि एक बार किसी व्यक्ति में एस्परजर की पहचान की गई तो वो जीवन भर एस्परजर का मरीज़ ही रहेगा. थैरेपी और इलाज से स्थिति बेहतर हो सकती है लेकिन इस सिंड्रोम से ग्रसित व्यक्ति कभी एक आम इंसान की तरह नहीं जी सकता है. पूरी तरह इस सिंड्रोम से निजात नहीं पाई जा सकती है.
इससे प्रभावित लोगों के व्यवहार में दोहराव दिखता है, ये लोगों से बात-चीत करने की क्षमता को प्रभावित करता है. इसके साथ ही वो अपनी बात को सही तरीक़े से व्यक्त नहीं कर पाते हैं.
ये भी पढ़ें-
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो सकते हैं.)