कर्नाटक में उप-चुनाव टले, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही कोई फ़ैसला

निर्वाचन आयोग कर्नाटक में उप-चुनावों को बाद में कराने के लिए तैयार हो गया है.

निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को अपने एक बयान में कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक के अयोग्य विधायकों पर फ़ैसला नहीं दे देता, तब तक के लिए उपचुनावों को स्थगित किया जाता है.

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने आज अयोग्य घोषित किये गए कर्नाटक विधानसभा के 17 विधायकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फ़ैसला दिया.

अयोग्य ठहराए गए विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी थी कि उन्हें उपचुनावों में लड़ने दिया जाए. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया था कि उनकी याचिका पर जल्दी सुनवाई कराई जाए.कर्नाटक विधानसभा की 15 सीटों पर उपचुनाव होने हैं.

बीबीसी संवाददाता इमरान क़ुरैशी के मुताबिक़, कर्नाटक के अयोग्य ठहराए गए विधायक आज चैन की सांस ले पाएंगे क्योंकि चुनाव आयोग ने उपचुनावों को टाल दिया है.

अयोग्य ठहराए गए विधायकों के वकील संदीप पाटिल ने बीबीसी को बताया कि निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि वो उप-चुनाव की तारीख़ को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है.

उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग ने कहा है कि वो तब तक उपचुनाव नहीं कराएगा जब तक की सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर कोई फ़ैसला नहीं ले लेता.

ये स्थिति इसलिए है क्योंकि कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया था. लेकिन तत्कालीन स्पीकर रमेश कुमार ने उन इस्तीफ़ों को ख़ारिज कर दिया और विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था. क्योंकि कांग्रेस और जेडी (एस) ने शिकायत की थी कि विधायकों ने व्हिप को तोड़ा था.

इन विधायकों के इस्तीफ़े की वजह से इस साल जुलाई में जनता दल सेक्युलर-कांग्रेस की गठबंधन की सरकार गिर गई और बीजेपी सत्ता में आ गई.

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