कर्नाटक: विश्वासमत से पहले 14 विधायक अयोग्य घोषित

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए

कर्नाटक में विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस और जेडीएस के 14 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया है.

उन्होंने यह फ़ैसला ऐसे समय पर लिया है जब प्रदेश के नए मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा सोमवार को सदन में बहुमत साबित करने वाले हैं.

विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने कहा है कि 11 कांग्रेस और तीन जेडीएस विधायकों ने दलबदल क़ानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया है. कांग्रेस और जेडीएस नेताओं ने बाग़ी विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करते हुए विधानसभा स्पीकर को अर्ज़ी दी थी.

इससे पहले स्पीकर रमेश कुमार ने 25 जुलाई को तीन कांग्रेस विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया था. इस तरह कर्नाटक में अयोग्य ठहराए गए विधायकों की संख्या 17 हो गई है.

ये आँकड़ा तमिलनाडु के पिछले साल के उस रिकॉर्ड तोड़ आँकड़े से सिर्फ़ एक कम है, जब वहां 18 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया गया था.

कर्नाटक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने ट्वीट करके स्पीकर के फ़ैसले का स्वागत किया है. उन्होंने लिखा, "स्पीकर के इस ईमानदार फ़ैसले से देश के सारे प्रतिनिधियों को कड़ा संदेश जाएगा जो भाजपा के जाल में फँस सकते हैं."

सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

हालांकि स्पीकर के ताज़ा फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. महाराष्ट्र के एक रिज़ॉर्ट में मौजूद जेडीएस के बाग़ी विधायकों में से एक ए एच विश्वनाथ ने बीबीसी हिंदी को बताया कि विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फ़ैसले को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

कुल 17 विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने से कर्नाटक विधानसभा में सदस्यों की संख्या 225 से घटकर 208 हो गई है. यानी अब बहुमत के लिए भाजपा को 104 का आँकड़ा पार करना होगा.

भाजपा के पास अपने 105 विधायक हैं और एक निर्दलीय विधायक का भी समर्थन है. दूसरी तरफ़ कांग्रेस के 65 और जेडीएस के 34 विधायक हैं.

अगर इकलौते बसपा विधायक एन महेश मायावती के निर्देशों का पालन करते हुए भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ वोट देते हैं तो भी इससे भाजपा को कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.

इससे पहले मायावती के निर्देशों की अनदेखी करते हुए एन महेश एचडी कुमारस्वामी के विश्वासमत के मतदान से ग़ैर-हाज़िर हो गए थे.

उपचुनाव होंगे अहम

भाजपा विश्वासमत जीत सकती है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अगर इन विधायकों की अयोग्यता को बरक़रार रखने के पक्ष में फ़ैसला दिया तो इन 17 सीटों पर उपचुनाव होंगे और अपना बहुमत बनाए रखने के लिए भाजपा को इनमे से 8-10 सीटें जीतनी होंगी.

बहुत आसार हैं कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के साथ ही कर्नाटक में भी इन सीटों पर उपचुनाव हों.

जब कर्नाटक विधानसभा में सदस्यों की संख्या पूरी हो जाएगी तो येदियुरप्पा सरकार को अपना वजूद बचाए रखने के लिए कम से कम 113 विधायकों के समर्थन की ज़रूरत होगी.

कुछ क़ानूनी जानकारों का कहना है कि विधायकों की अयोग्यता पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से फ़ैसला आने में देर हो सकती है और उससे पहले ही चुनावों की घोषणा हो सकती है.

इस तरह के मामलों में अनुभव रखने वाले एक वकील ने कहा, "अपने अंतरिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संवैधानिक मामलों पर स्पीकर की शक्तियों के आधार पर ही चर्चा हो सकती है और क्या कोई अदालत स्पीकर को इस संबंध में निर्देश दे सकती है? तो ये सारे मामले एक-दूसरे से जुड़ जाएंगे और आख़िरी आदेश आने में कुछ समय लगेगा."

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विप पर भी होना है फ़ैसला

मशहूर एसआर बोम्मई मामले में अदालत को फ़ैसला देने में क़रीब पांच साल का वक़्त लगा था. अदालत ने कहा था कि सत्ताधारी दल का बहुमत न राजभवन में तय किया जा सकता है और न ही राज्यपाल के सामने विधायकों की परेड के ज़रिए. इसके लिए सदन में बहुमत ही साबित करना होगा.

मौजूदा मामले में एक बड़ा सवाल ये है कि अदालत ये फ़ैसला भी करेगा कि क्या पार्टी के विप का फ़ैसला उन विधायकों पर लागू होता है जो स्पीकर को अपना इस्तीफ़ा सौंप चुके हैं.

कांग्रेस-जेडीएस के बाग़ी विधायकों की दलील है कि उन्हें इस्तीफ़ा देने के काफ़ी समय बाद विप जारी किया गया था.

उधर स्पीकर रमेश कुमार ने पत्रकारों के कई सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, "मैंने वो किया जो मुझे ठीक लगा. मैं बहुत पढ़ा-लिखा नहीं हूं. इस बारे में कोर्ट के प्रतिष्ठित लोग फ़ैसला लेंगे. मैं इस पर टिप्पणी करने वाला कौन होता हूं."

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