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पुलिस ने विफल किया गिलानी का संवाददाता सम्मेलन
भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी ने पत्रकारों को एक ईमेल के ज़रिए संवाददाता सम्मेलन के लिए बुधवार अपने आवास पर आमंत्रित किया था. उन्होंने राज्य में क़रीब डेढ़ महीने से जारी स्थिति के बीच पहली बार संवाददाता सम्मेलन बुलाया था.
हालांकि, जब पत्रकार और चैनलों के कैमरामैन उनके आवास पर पहुंचे तो वहां पहले से मौजूद पुलिस और सीआरपीएफ़ के जवानों ने उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी.
पुलिस और सीआरपीएफ़ के जवान पहले से ही दो गाड़ियों में वहां मुस्तैद थे.
घटनास्थल पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सामने आए और उन्होंने कहा कि अगर यहां पत्रकारों की ज्यादा भीड़ जमा हो गई तो वह धारा 144 का उल्लंघन होगा. ग़ौरतलब है कि इस धारा के तहत चार से ज्यादा लोगों के एक साथ एक जगह जमा होना ग़ैरक़ानूनी है.
पुलिस अधिकारी से बातचीत के दौरान संवाददाताओं ने भी अपना पक्ष रखा और कहा कि उन्हें कर्फ्यू पास दिया गया है ऐसे में उन्हें अंदर जाने दिया जाए. क़रीब एक घंटे तक संवाददाताओं और पुलिस अधिकारियों के बीच बातचीत होती रही.
हालांकि अधिकारी ने संवाददाताओं की दलीलें नहीं सुनी जिसके कारण संवाददाता सम्मेलन नहीं हो सका.
किसी अलगाववादी नेता द्वारा स्पष्ट तौर पर संवाददाताओं से संपर्क करने और अपना संदेश देने का यह पहला प्रयास था.
गिलानी की ओर से संवाददाताओं को भेजे गए ईमेल में केवल दो लाइन का संदेश था और इसमें केवल संवाददाता सम्मेलन की बात कही गई थी. लेकिन इस मेल में इस बात का ज़िक्र नहीं था कि संवाददाता सम्मेलन किस मुद्दे पर बुलाई गई है.
हालांकि, ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह कश्मीर में लगातार जारी हड़ताल पर कोई लाइन ऑफ़ एक्शन लेने या अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जारी नाराज़गी पर कोई संदेश देना चाहते थे.
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से कश्मीर के लोगों में एक दिशाहीनता की स्थिति है.
भारत का समर्थन कर रहे और अलगाववादी नेता दोनों ही जेल में बंद हैं और हड़ताल भी ख़ुद ब ख़ुद हो रही है. कोई दुकान नहीं खुल रहा है और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप्प पड़ी हुई हैं.
कश्मीर में कमर्शियल वाहन भी नहीं चल रहे हैं और स्कूल भी बंद हैं. वहां छात्र—छात्राएं भी नहीं पहुंच रहे हैं.
ऐसी अटकलें हैं कि इन स्थितियों को देखते हुए गिलानी शायद कोई संदेश देना चाहते थे.
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