अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने वाले अमित शाह अनुच्छेद 371 को क्यों बनाए रखना चाहते हैं

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- Author, अभिमन्यु कुमार साहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि भाजपा सरकार अनुच्छेद 371 का सम्मान करती है और इसमें किसी भी तरह का बदलाव नहीं लाएगी.
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371 एक विशेष प्रावधान है, जिसे बरक़रार रखा जाएगा.
अमित शाह यह बातें असम के गुवाहाटी में आयोजित पूर्वोत्तर परिषद के 68वें पूर्ण सत्र में बोल रहे थे.
जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद पूर्वोत्तर के लोगों को यह डर सता रहा है कि कहीं केंद्र सरकार अनुच्छेद 371 को न हटा दे.
जिस अमित शाह ने अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने का प्रस्ताव संसद में पेश किया था, वो आख़िर अनुच्छेद 371 को क्यों बचाना चाहते हैं?
गुवाहाटी में दिए गए उनके बयान के बाद यह प्रश्न आम लोगों के मन में कौंध रहा है. इस सवाल का जवाब जानने से पहले यह समझना ज़रूरी होगा कि आख़िर अनुच्छेद 371 है क्या और यह अनुच्छेद 370 से अलग कैसे है?
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क्या है अनुच्छेद 371?
अमित शाह ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि "अनुच्छेद 370 अस्थायी प्रावधानों के संदर्भ में था जबकि अनुच्छेद 371 विशेष प्रावधानों के संदर्भ में है, दोनों के बीच काफ़ी अंतर है."
भारतीय संविधान के भाग-21 में अनुच्छेद 369 से लेकर अनुच्छेद 392 तक को परिभाषित किया गया है. इस भाग को 'टेम्पररी, ट्रांजिशनल एंड स्पेशल प्रोविजन्स' का नाम दिया गया है.
इसमें जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और पूर्वोत्तर के कई राज्यों के लिए विशेष प्रावधान करने वाले अनुच्छेद 371 का ज़िक्र है.
अनुच्छेद 371 के अलावा अनुच्छेद 371-A से J तक अलग-अलग राज्यों के लिए बनाए गए हैं और उन पर लागू होते हैं.
राज्यों के लिए विशेष प्रावधान इसलिए बनाए गए थे क्योंकि वे अन्य राज्यों के मुक़ाबले काफ़ी पिछड़े थे और उनका विकास समय के साथ सही तरीक़े से नहीं हो पाया था. साथ ही यह अनुच्छेद उनकी जनजातीय संस्कृति को संरक्षण प्रदान करता है.
जब संविधान तैयार किया गया था, उस वक़्त इन विशेष प्रावधानों का ज़िक्र उसमें नहीं किया गया था. इसे संशोधन के ज़रिए जोड़ा गया था.
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371 क्यों बरक़रार रखना चाहते हैं अमित शाह
अमित शाह ने अनुच्छेद 371 को बरक़रार रखने का बयान देकर पूर्वोत्तर के उन राज्यों को भरोसा दिया है जहां और अधिक स्वायत्ता की मांग लंबे समय से हो रही है.
अनुच्छेद 371 में ज़मीन और प्राकृति संसाधनों पर स्थानीय लोगों के विशेषाधिकार की बात कही गई है.
मिज़ोरम, नागालैंड, मेघालय, सिक्किम और मणिपुर में अनुच्छेद 371 लागू है और बाहरी लोगों को यहां ज़मीन ख़रीदने की अनुमति नहीं है.
गुवाहाटी के वरिष्ठ पत्रकार बैकुंठनाथ गोस्वामी कहते हैं, "दोनों अनुच्छेद में अंतर यह है कि अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा हुआ करता था, जबकि अनुच्छेद 371 के तहत पूर्वोत्तर के राज्यों को अलग झंडा नहीं होता है."
"सिर्फ़ झंडा ही नहीं, जम्मू-कश्मीर का संविधान भी अलग होता था. वहीं अनुच्छेद 371 के तहत आने वाले राज्यों का अलग संविधान नहीं होता है."
जब जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म करने का मोदी सरकार ने फ़ैसला लिया तो ये कहा गया कि अनुच्छेद 370 की वजह से ही राज्य में पिछड़ापन है.
लेकिन पूर्वोत्तर के राज्यों में यह तर्क नहीं चलेगा. आलोचकों का कहना है कि बीजेपी सुविधा की राजनीति के तहत ऐसा कर रही है.
बैकुंठनाथ गोस्वामी कहते हैं, "पूर्वोत्तर के राज्यों में अधिक स्वायत्ता की मांग लंबे वक़्त से हो रही है. अनुच्छेद 371 को बरक़रार रखने के पीछे भाजपा की यह सोच हो सकती है कि जो पहले से इन राज्यों को दिया गया है, स्थानीय लोग उसे बचाए रखें."
बहरहाल अमित शाह ने अपनी पार्टी और सरकार के इरादे जता दिए हैं. पूर्वोत्तर में अभी नेशनल सिटिज़न रजिस्टर यानी एनआरसी का मुद्दा चल ही रहा है.
ऐसा लगता है कि सरकार वहां कोई और मोर्चा नहीं खोलना चाहती. अमित शाह ने महाभारत के पौराणिक किरदारों के पूर्वोत्तर से जुड़ाव का उल्लेख कर स्वाभाविक संबंध की याद दिलाई. एक और बात यह भी हो सकती है कि भाजपा की नज़र पूर्वोत्तर में अपनी राजनीतिक जड़ें जमाने पर है.

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अनुच्छेद 371
यह अनुच्छेद महाराष्ट्र, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में लागू होता है. इसके तहत महाराष्ट्र और गुजरात के राज्यपाल को कुछ विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं.
महाराष्ट्र के राज्यपाल विदर्भ और मराठवाड़ा के लिए और गुजरात के राज्यपाल सौराष्ट्र और कच्छ के लिए अलग-अलग विकास बोर्ड बना सकते हैं. इन क्षेत्रों के विकास के लिए तकनीकी शिक्षा, व्यवसायिक प्रशिक्षण और रोज़गार के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा सकती हैं.
इस अनुच्छेद के तहत हिमाचल प्रदेश के बाहर का नागरिक वहां कृषि भूमि नहीं ख़रीद सकता है.
अनुच्छेद 371 A
अनुच्छेद 371 A नागालैंड में लागू होता है. इसके तहत राज्य के तीन विशेष अधिकार दिए गए हैं.
- भारतीय संसद का कोई भी क़ानून नागा लोगों के सांस्कृतिक और धार्मिक मामलों पर लागू नहीं होता है.
- राज्य के नागा संप्रदाय के लिए अलग क़ानून है. आपराधिक मामलों में राज्य के क़ानून के तहत सज़ा मिलती है. इन पर भारतीय संसद के क़ानून और सुप्रीम कोर्ट का कोई भी आदेश लागू नहीं होता है.
- नागालैंड में दूसरे राज्य का कोई व्यक्ति ज़मीन नहीं ख़रीद सकता है.
अनुच्छेद 371 B
यह अनुच्छेद असम राज्य पर लागू होता है. इसके तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार होता है कि वो राज्य की विधानसभा की समितियों का गठन करें और इसमें राज्य के जनजातीय क्षेत्रों से चुने गए सदस्यों को शामिल कर सकते हैं.
अनुच्छेद 371 C
अनुच्छेद 371 C मणिपुर के लिए बनाया गया है. इसके तहत भारत के राष्ट्रपति विधानसभा में राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों से चुने गए सदस्यों की एक समिति बना सकते हैं और उन्हें काम करने की शक्ति प्रदान करते हैं. इस समिति का काम पहाड़ी क्षेत्र के लोगों के हित में नीतियां बनाना है.
अनुच्छेद 371 D
अनुच्छेद 371 D आंध्र प्रदेश और तेलंगाना पर लागू होता है. इसके तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वो राज्य के अलग-अलग हिस्से के लोगों के लिए पढ़ाई और रोज़गार के समान अवसर प्रदान करें.
राष्ट्रपति नागरिक सेवाओं से जुड़े पदों पर नियुक्ति से संबंधित मामलों के लिए हाईकोर्ट से अलग ट्रिब्यूनल बना सकते हैं.
अनुच्छेद 371 E
इसके तहत संसद को यह अधिकार है कि वह आंध्र प्रदेश में केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना कर सके.

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अनुच्छेद 371 F
यह सिक्किम के लिए विशेष प्रावधान करता है. इसके तहत राज्य की विधासनभा में कम से कम 30 सदस्य होंगे. इसके अलावा लोकसभा में राज्य के प्रतिनिधित्व के लिए एक सीट होगी.
इसके तहत सिक्किम के पास पूरे राज्य की ज़मीन का अधिकार है. यहां बाहर के लोग जनजातीय इलाक़े में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते हैं.
साथ ही राज्यपाल के पास प्रदेश में शांति बनाए रखने और उसके लिए उपाय करने के अधिकार प्राप्त हैं.
अनुच्छेद 371 G
अनुच्छेद 371 G मिज़रम के लिए है. इस अनुच्छेद के मुताबिक़ भारत की संसद मिज़ोरम की विधानसभा की मंज़ूरी के बिना मिजो समुदाय से जुड़े रीति-रिवाजों, उनके प्रशासन और न्याय के तरीक़ों और ज़मीन से जुड़े मसलों पर क़ानून नहीं बना सकेगी.
इसके तहत मिज़ोरम में ज़मीन का मालिकाना हक़ सिर्फ़ वहां के आदिवासियों के पास है.
अनुच्छेद 371 H
यह अनुच्छेद अरुणाचल प्रदेश पर लागू होता है. यह राज्य के राज्यपाल को क़ानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए विशेष अधिकार देता है. इस संदर्भ में राज्यपाल चाहे तो मुख्यमंत्री के फ़ैसले को भी रद्द कर सकता है.
यहां की विधानसभा में कम से कम 30 सदस्य होंगे.
अनुच्छेद 371 I
इसके तहत गोवा विधासनभा में 30 से कम सदस्य नहीं हो सकते हैं.
अनुच्छेद 371 J
यह अनुच्छेद कर्नाटक पर लागू होता है. इसके तहत हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र के छह ज़िलों को विशेष दर्जा प्रदान किया जाता है.
इनके विकास के लिए अलग डेवलपमेंट बोर्ड बनाए जाएंगे. स्थानीय लोगों को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण दिया जा सकता है.
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