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अजीत डोभाल ने भारत प्रशासित कश्मीर पर अमरीकी बयान के बाद क्या कहा?
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने शनिवार को भारत प्रशासित कश्मीर में अशांति से जुड़ी ख़बरों और घाटी के मौजूदा हालात पर विस्तृत बयान दिया है.
बीते दिनों बीबीसी समेत कई मीडिया समूहों से भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा और अशांति से भरे माहौल की ख़बरें आती रही हैं.
अमरीकी विदेश मंत्रालय की ओर से भी शुक्रवार को भारत प्रशासित कश्मीर को लेकर बयान जारी किया गया.
अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मॉर्गन ऑर्टागस ने कहा है, "बड़े पैमाने पर जिस तरह से राजनेताओं और व्यापारियों को हिरासत में रखा गया है, हम इसे लेकर चिंतित हैं."
उन्होंने कहा, "इसके साथ ही स्थानीय लोगों पर लगी पाबंदियां भी हमारे लिए चिंता का विषय हैं. हम कुछ क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन बंद होने से जुड़ी ख़बरों के प्रति भी चिंतित हैं."
जेएनयू की पूर्व छात्र संघ नेता शहला राशिद ने भी घाटी में आम लोगों के उत्पीड़न से जुड़े कुछ ट्वीट किए थे.
इसके बाद उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला भी दर्ज किया गया है. सेना लगातार ऐसी ख़बरों का खंडन करती रही है.
लेकिन डोभाल ने शनिवार को कुछ चुनिंदा पत्रकारों से बात करते हुए भारत प्रशासित कश्मीर में स्थिति बिगाड़ने का आरोप पाकिस्तान पर मढ़ा है.
हालांकि, डोभाल ने अपने बयान में अमरीकी विदेश मंत्रालय का कहीं ज़िक्र नहीं किया लेकिन उसमें उन सभी सवालों के जवाब थे जो शुक्रवार को अमरीका की तरफ़ से उठाए गए थे.
डोभाल ने क्या कहा?
- मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि कश्मीर की बहुसंख्यक आबादी अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के पक्ष में है.
- कश्मीरी अवाम अनुच्छेद 370 पर भारत सरकार के फ़ैसले के बाद बेहतर अवसर, बेहतर भविष्य और युवाओं के लिए ज़्यादा नौकरियों की संभावनाएं देख रही है.
- सिर्फ कुछ लोग इसके विरोध में हैं. लोगों को ऐसा लगता है कि ये आम लोगों की आवाज़ है. ये पूरी तरह सच नहीं है.
- कश्मीर में सेना की ओर से उत्पीड़न का सवाल ही नहीं उठता है. शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात हैं. भारतीय सेना वहां पर सिर्फ आंतकवाद से लड़ने के लिए मौजूद है.
- जम्मू-कश्मीर के किसी भी नेता के ख़िलाफ़ कोई भी चार्ज या राजद्रोह का मामला नहीं लगाया गया है. वे एहितायतन हिरासत में लिया गए हैं. जब तक लोकतंत्र चलने के लिए सही माहौल न बन जाए, तब तक वे हिरासत में रहेंगे. मुझे ऐसा लगता है कि जल्द ही ऐसी स्थितियां पैदा होंगी.
- कुछ लोगों को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया है. अगर जनसभाएं होतीं तो आतंकवादी इसका फायदा उठा सकते थे और क़ानून व्यवस्था को संभालने में दिक्कत होती.
- सभी नेताओं को क़ानून के दायरे में रहकर हिरासत में लिया गया है. वे अपनी हिरासत को कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं.
- सीमा के पार 20 किलोमीटर दूर पाकिस्तानी संचार टॉवर हैं. पाकिस्तानी वहां से संदेश भेज रहे हैं. हमने कुछ इंटरसेप्ट सुने हैं. वो कह रहे थे कि इतने सेब के ट्रक कैसे चल रहे हैं. क्या आप उन्हें भी रोक नहीं सकते. क्या अब हम चूड़ियां भेज दें?"
- मुझे लगता है कि कश्मीर में स्थितियां उम्मीद से जल्दी बेहतर हो रही हैं. सिर्फ छह अगस्त को एक मामला हुआ है. इसमें एक लड़के की मौत हुई है. लेकिन उसकी मौत गोली लगने से नहीं हुई.
- हम चाहते हैं कि सभी पाबंदियां हट जाएं. लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि पाकिस्तान कैसे व्यवहार करता है. यहां पर क्रिया की प्रतिक्रिया वाली स्थिति कायम है.
- अगर पाकिस्तान अपना बर्ताव ठीक कर ले. आतंकी डराना बंद करें और घुसपैठ न करें. अगर पाकिस्तान अपने टॉवरों से अपने लड़ाकों को संदेश भेजना बंद करे तो हम पाबंदियां हटा सकते हैं.
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