एनसीपी छोड़ बीजेपी में जा रहे बड़े नेता, अकेले पड़ रहे हैं शरद पवार

"काफ़ी नेता आपकी पार्टी छोड़कर जा रहे हैं. अब आपके रिश्तेदार भी आपको छोड़ रहे हैं. आपकी क्या राय है इसपर?"

अहमदनगर ज़िले के संगमनेर में शुक्रवार, 30 अगस्त को हुई प्रेस कॉन्फ़्रेंस में न्यूज़ 18 लोकमत के पत्रकार हरीश दिमोटे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के अध्यक्ष शरद पवार से यह सवाल पूछा.

इस सवाल में एनसीपी नेता शरद पवार के रिश्तेदार पद्मसिंह पाटिल और उनके बेटे राणा जगजीत की तरफ़ इशारा किया गया था.

शरद पवार इस सवाल से भड़क उठे और वह प्रेस कॉन्फ़्रेंस से उठकर जाने लगे. तब वहां उपस्थित पत्रकारों ने उन्हें समझाने की कोशिश की.

शरद पवार का कहना था कि सवाल पूछने वाले पत्रकार को माफ़ी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे सवाल पूछना सभ्य बात नहीं है.

इस घटना के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया. क्या ऐसा सवाल पूछना सही था? इस सवाल में ऐसा क्या था कि कोई भड़क जाए? इस तरह के भी सवाल पूछे जाने लगे.

मगर इनमें सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि क्या पवार असहाय हो गए हैं? बीजेपी के आक्रामक रवैये के सामने वह अकेले पड़ गए हैं?

बीजेपी में कांग्रेस और एनसीपी से 'मेगाभर्ती' का दौर चालू है. बीजेपी जिस तरह से बड़ी संख्या से अन्य दलों के नेताओं को शामिल कर रही है, उसका सबसे बड़ा झटका एनसीपी को लगा है.

अब तो यह सवाल पूछा जाने लगा है कि इस पलायन के बाद अब एनसीपी में कौन बचा रहेगा?

बीजेपी की 'मेगाभर्ती'

पूर्व मंत्री मधुकर पिचड़, उनके पुत्र वैभव पिचड़, एनसीपी की पूर्व महिला प्रदेशाध्यक्ष चित्रा वाघ, शिवेंद्रराजे भोसले, रणजीत सिंह मोहिते-पाटिल, धनंजय महाडिक, राणा जगजीत सिंह पाटिल... ये ही नहीं, बल्कि और भी कई नाम हैं जो आए दिन बीजेपी में शामिल होने वाले नेताओं की लिस्ट को लंबा कर रहे हैं.

विजय सिंह मोहिते-पाटिल और पद्मसिंह पाटिल दोनों अभी आधिकारिक तौर पर बीजेपी में शामिल नहीं हुए हैं मगर उन्होंने एनसीपी से मुंह मोड़ लिया है.

केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज़ कसते हुए कहा है- एनसीपी से आने वालों की वेटिंग लिस्ट इतनी बड़ी है कि अगर बीजेपी ने अपने पूरे दरवाज़े खोल दिए तो शरद पवार और पृथ्वीराज चव्हाण के अलावा एनसीपी और कांग्रेस में कोई भी नहीं बचेगा.

ऊपर जो नाम गिनाए गए हैं, इनमें से कई तो वो नेता हैं जो एनसीपी की स्थापना के समय से शरद पवार के साथ थे.

इनमें से कई तो कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन वाली सरकार में मंत्री पद समेत अन्य कई महत्वपूर्ण पदों पर थे. मगर अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए इन्होंने बीजेपी की लहर पर सवार होना पसंद किया.

चर्चा है कि इन नेताओं के साथ पद्म सिंह पाटिल और उदयनराजे भोसले भी बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. ऐसा हुआ तो यह एनसीपी के लिए बड़ा झटका होगा.

कौन हैं पद्म सिंह पाटिल

पद्म सिंह पाटिल को डॉक्टर या पहलवान के नाम से जाना जाता है. 1974 में वह पहली बार शरद पवार के संपर्क में आए थे और उनकी उंगली पकड़कर ही राजनीति में उन्होंने प्रवेश किया.

पद्म सिंह की गिनती पवार के सबसे क़रीबी लोगों में होती है. पहले वह ज़िला पार्षद, फिर विधायक, उसके बाद मंत्री और फिर सांसद बने. लोगों का कहना है कि उस्मानाबाद में उनका अलग ही रुतबा है.

पद्म सिंह पाटिल एक आक्रामक नेता माने जाते हैं. उनकी आक्रामकता की कहानियां महाराष्ट्र भर में मशहूर हैं. पाटिल और उनके सफ़ेद घोड़े की चर्चा अक्सर होती है. वह घोड़े पर बैठकर पूरे शहर में घूमते थे.

उदयनराजे भोसले

कई दिनों से चर्चा है कि सतारा के सांसद उदयनराजे भोसले बीजेपी में जाने की तैयारी में है. अभी महाराष्ट्र में बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी कई जनसंपर्क यात्राएं चल रही हैं.

एनसीपी की यात्रा से उदयनराजे ने किनारा कर लिया है. राजनीतिक विश्लेषक विनोद कुलकर्णी बताते हैं कि उदयनराजे का एनसीपी के कार्यक्रमों से दूर रहना बताता है कि वह बीजेपी की राह पर हैं.

वह कहते हैं, "उदयनराजे के बीजेपी में जाने की काफ़ी संभावनाएं थीं. उन्होंने देवेंद्र फडणवीस से मुलाक़ात भी की थी."

उदयनराजे के भाई शिवेंद्रराजे पहले से भाजपा में हैं. वह कहते हैं कि अगर उनके भाई उदयनराजे बीजेपी में आए तो उन्हें ख़ुशी होगी.

मगर महाराष्ट्र टाइम्स के सीनियर एसिस्टेंट एडिटर विजय चोरमारे बताते हैं, "उदयनराजे अगर बीजेपी में जाना चाहें तो उन्हें सांसद पद छोड़ना होगा. ऐसा करके या तो वह सतारा में अपना राजनीतिक कद ऊंचा करना चाहते हैं या फिर शिवेंद्रराजे को असहज करवाना चाह रहे हैं."

इनके साथ ही पूर्व उपमुख्यमंत्री छगन भुजबल के बीजेपी में जाने की चर्चा है. भुजबल लगभग दो साल जेल में थे.

उन्होंने इन अटकलों का बार-बार खंडन किया है मगर चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही.

अब चर्चा तो यहां तक होने लगी है कि जिस तरह से एनसीपी से नेता अलग हो रहे हैं, उससे कहीं ऐसे हालात तो पैदा न हो जाएं कि पार्टी में शरद पवार, उनकी बेटी सुप्रिया सुले और भतीजे अजीत पवार ही प्रमुख नेता बचें.

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