You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
चिन्मयानंद पर आरोप लगाने वाली लड़की नहीं जाएगी उत्तर प्रदेश
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से, बीबीसी हिंदी के लिए
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर शोषण, अपहरण और धमकाने का आरोप लगाने वाली क़ानून की छात्रा को पुलिस के राजस्थान से ढूंढ़ निकालने के बाद उन्हें शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया.
सुप्रीम कोर्ट में मौजूद हमारे सहयोगी सुचित्र मोहंती ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि माता- पिता के आने तक पीड़ित लड़की दिल्ली में ही रहेंगी.
मामले की सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बैंच की अगुवाई कर रहीं जस्टिस आर भानुमति ने कहा कि उन्होंने लड़की (पीड़ित) से बात की है.
जस्टिस भानुमति के मुताबिक, "उसने हमें बताया कि वो उत्तर प्रदेश नहीं जाना चाहती. वो दिल्ली में रहना चाहती है."
वकीलों के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो (पीड़ित लड़की) अपने माता पिता के आने तक दिल्ली में ऑल इंडिया वूमेन कॉन्फ्रेंस में रह सकती हैं.
वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि लड़की के पिता उनसे जल्दी से जल्दी बात करना चाहते हैं.
इससे पहले राज्य के पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने मीडिया को बताया कि लड़की के साथ उसके एक साथी को भी पकड़ा गया है. दोनों को यूपी लाया जा रहा है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लड़की को कोर्ट में पेश किया गया.
शाहजहांपुर के एक लॉ कॉलेज की छात्रा ने पूर्व गृह राज्य मंत्री और बीजेपी के तीन बार सांसद रहे स्वामी चिन्मयानंद पर एक वीडियो संदेश के ज़रिए शोषण और धमकाने का आरोप लगाया था.
वीडियो वायरल होने के बाद से ही छात्रा ग़ायब थीं.
छात्रा के परिजनों ने स्वामी चिन्मयानंद पर उसके अपहरण का आरोप लगाया था. परिजनों की ओर से स्वामी चिन्मयानंद के ख़िलाफ़ अपहरण के साथ ही धमकाने का भी मुक़दमा दर्ज कराया गया था.
लड़की की तलाश के लिए यूपी पुलिस ने सात टीमें बनाई थीं. एक दिन पहले ही शाहजहांपुर के पुलिस अधीक्षक एस चिनप्पा ने बीबीसी से बातचीत में कहा था कि लड़की की लोकेशन मिल गई है और उसे जल्द ही ढूंढ़ निकाला जाएगा.
इस बीच, पुलिस ने लॉ कॉलेज स्थित महिला छात्रावास के उस कमरे को सील कर दिया है जिसमें छात्रा रहती थी, ताकि सबूतों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न की जा सके.
छात्रा के साथ हुए कथित शोषण और लापता होने के मामले में संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी जांच कराने का फ़ैसला लिया है. छात्रा की तलाश के लिए शाहजहांपुर पुलिस ने पोस्टर भी जारी किए गए थे.
पुलिस पर मामला दबाने का आरोप
इस मामले में स्वामी चिन्मयानंद ने अभी अपनी सफ़ाई में कुछ भी नहीं कहा है. हालांकि उनके प्रवक्ता और वकील ओम सिंह ने इस पूरे मामले को किसी बड़े षडयंत्र का हिस्सा बताया है. दो दिन पहले ही बीबीसी से बातचीत में उन्होंने दावा किया था कि छात्रा दिल्ली और उसके आस-पास ही अपने दोस्त के साथ है और उसका किसी ने अपहरण नहीं किया है.
वहीं, छात्रा के परिजनों का कहना है कि पुलिस शुरू से ही इस मामले को दबाने में लगी है. उनका आरोप है कि पहले जानबूझकर एफ़आईआर लिखने में देरी की गई और उसके बाद 'अभियुक्तों को बचने के रास्ते ढूंढ़ने' का मौक़ा दिया गया.
बीजेपी के पूर्व सांसद स्वामी चिन्मयानंद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं और राम मंदिर आंदोलन के बड़े नेताओं में शुमार रहे हैं. शाहजहांपुर में उनका आश्रम है और वो कई शिक्षण संस्थाओं के प्रबंधन से भी जुड़े हैं.
आठ साल पहले शाहजहांपुर की ही एक अन्य महिला ने भी स्वामी चिन्मयानंद पर यौन शोषण और उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था. महिला स्वामी चिन्मयानंद के ही आश्रम में रहती थी. हालांकि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने के बाद, सरकार ने उनके ख़िलाफ़ लगे इस मुक़दमे को वापस ले लिया था लेकिन पीड़ित पक्ष ने सरकार के इस फ़ैसले को अदालता में चुनौती दी थी. फ़िलहाल हाईकोर्ट से इस मामले में स्टे मिला हुआ है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)