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क्या नौकरी जाने के डर से बीजेपी नेता के बेटे ने की खुदकुशी
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, रांची से, बीबीसी हिंदी के लिए
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास के विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के बारीडीह मंडल के आईटी सह-संयोजक कुमार विश्वजीत के बेटे ने शुक्रवार को खुदकुशी कर ली.
26 साल के कुमार आशीष 'टाटा मोटर्स' के लिए जॉबवर्क करने वाली कंपनी 'आटोमैटिक एक्सेल' में काम करते थे. अपनी मौत से महज एक घंटे पहले वे अपनी पत्नी से मिलने उनके कॉलेज गए थे. इसके बाद वे अपने दोस्तों के साथ भी घूमते रहे.
फिर घर लौटे और पंखे से लटक कर अपनी जान दे दी. उन्हें कथित तौर पर इस बात की चिंता थी कि ऑटो सेक्टर में आई मंदी के कारण कहीं उनकी नौकरी भी ना चली जाए.
हालांकि, उन्होंने अपनी पत्नी और दोस्तों को इस बात की भनक नहीं लगने दी कि वे तनाव में हैं. उन्होंने कोई सुसाइड नोट भी नहीं छोड़ा है. अब पुलिस इस बात की तहकीकात कर रही है कि उनकी खुदकुशी की असली वजह क्या है.
जमशेदपुर के एसपी सुभाष चंद्र जाट ने बीबीसी को बताया कि पुलिस को जो कुछ पता चला है, उनमें एक कारण जॉब इनसिक्योरिटी (नौकरी को लेकर असुरक्षा की भावना) भी है. हालांकि, वे कल भी अपने दफ्तर गए थे. लिहाजा, हमें खुदकुशी की मूल वजह का पता करने में कुछ वक्त लगेगा.
क्या नौकरी जाने का डर था
आशीष के पिता कुमार विश्वजीत भी बीजेपी के सदस्य होने के साथ ही टाटा स्टील के लिए कॉन्ट्रेक्ट पर काम करते हैं. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी (टिस्को) में भी ट्रेनिंग के बाद टेस्ट लिया जा रहा है.
"ट्रेनिंग की प्रक्रिया पूरी कर पाना थोड़ा कठिन है. कर्मचारियों को डर है कि अगर टेस्ट में फेल हुए, तो अगले दिन उनका गेट पास बनेगा या नहीं. ऐसे में उन्हें अपनी नौकरी को लेकर भी चिंता है."
कुमार विश्वजीत ने बीबीसी से कहा, "कुछ दिन पहले घर मे हमलोगों ने यह बात की थी कि अगर मेरी नौकरी चली जाए, तब घर कैसे चलेगा. तभी मेरे बेटे ने कहा कि उसकी नौकरी को भी ख़तरा है."
"लेकिन, यही उसकी खुदकुशी का कारण हो, यह हम नहीं कह सकते. क्योंकि, उसने परिवार में किसी से इस संबंध में कोई बातचीत नहीं की थी. आशीष ने अपनी पत्नी तक से कुछ नहीं कहा था. ऐसे में फिलहाल यह बता पाना मुश्किल है कि उसने अचानक से मौत का रास्ता क्यों चुन लिया."
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सदमे में हैं आशीष की पत्नी
कुमार आशीष की पत्नी ज्योति सदमे में हैं. महज एक साल पहले जून-2018 में आशीष से उनका प्रेम विवाह हुआ था. पिछले 8 अगस्त को उनका जन्मदिन था.
ज्योति जमशेदपुर के गोलमुरी अब्दुल बारी कॉलेज में काम करती हैं. शुक्रवार सुबह दस बजे अपने दफ्तर जाते वक्त उनके पति ने ही उन्हें कालेज छोड़ा था और दोपहर तीन बजे कुछ ज़रूरी स्टेशनरी देने दोबारा उनके कॉलेज गए थे. वही उनकी आख़िरी मुलाकात बन गई.
एक सप्ताह में दूसरी खुदकुशी
इससे पहले भी जमशेदपुर के ही एक युवा इंजीनियर प्रभात कुमार उर्फ राजा ने अपनी नौकरी जाने के बाद बर्मा माइंस इलाक़े में खुद को आग लगाकर अपनी जान दे दी थी.
वो इंपीरियल ऑटो इंडस्ट्री में इंजीनियर थे. वह कंपनी भी टाटा मोटर्स के लिए जॉबवर्क करती थी. टाटा मोटर्स में क्लोज़र के कारण उनकी कंपनी ने भी उन्हें नौकरी से निकाल दिया था.
झारखंड सरकार ने उन्हें प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहद ट्रेनिंग दिलवायी थी. उनके पिता तारकनाथ भी टाटा स्टील के कर्मचारी थे. रिटायरमेंट के बाद वो आटो चलाते हैं.
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हज़ारों बेरोजगार
झारखंड सरकार द्वारा बिजली की दरों में वृद्धि और टाटा से जुड़ी कंपनियों मे लगातार क्लोजर के कारण पिछले कुछ दिनों के दौरान झारखंड की तीन दर्जन से अधिक कंपनियां एक अगस्त से बंद हो गई हैं.
इन कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को अगस्त का वेतन दिया है लेकिन सितंबर से उनका घर कैसे चलेगा, यह बताने वाला कोई नहीं है. कहा जा रहा है कि इस बंदी से करीब 50 हजार लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर बेरोजगार हो गए हैं.
टाटा मोटर्स में अभी भी (17 अगस्त तक) क्लोजर है. कंपनी में उत्पादन अब 19 अगस्त से हो पाएगा. इस कारण टाटा समूह के लिए काम करने वाली कंपनियों के अस्तित्व पर संकट आ गया है.
सरकार की आलोचना
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों के बेरोज़गार होने पर सरकार को घेरा है. उन्होंने इससे सबंधित कई ट्वीट किए हैं और आरोप लगाया है कि रघुवर दास की सरकार लोगों के रोज़गार की रक्षा कर पाने में नाकाम साबित हुई है.
वहीं, झारखंड सरकार, टाटा समूह या इससे जुड़ी कंपनियों की तरफ से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
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