हार्ड कौर पर 'मोदी-भक्त' के हमला करने का सच: फ़ैक्ट चेक

हार्ड कौर पर 'मोदी-भक्त' के हमला करने का सच

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    • Author, फ़ैक्ट चेक टीम
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

ब्रिटेन में रहने वालीं पंजाबी रैपर हार्ड कौर की दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर की जा रही हैं कि 'पीएम मोदी और भारत के गृह मंत्री अमित शाह के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी करने पर किसी बीजेपी प्रशंसक ने उनपर हमला कर दिया है.'

इन वायरल तस्वीरों में 40 वर्षीय तरन कौर ढिल्लों जिन्हें एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में 'हार्ड कौर' के नाम से जाना जाता है, उनके चेहरे पर सूजन और चोट के कुछ निशान दिखाई देते हैं.

दक्षिणपंथी रुझान वाले जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर हार्ड कौर का मज़ाक़ उड़ाते हुए इन तस्वीरों को पोस्ट किया है, वो लिख रहे हैं, "हार्ड कौर जिसने सुबह मोदी और अमित शाह को गालियां दीं और हिन्दुस्तान से पंजाब को अलग करने की बातें बोलीं, शाम होते-होते किसी 'सिरफिरे भक्त' ने उसके चेहरे का नक्शा बदल दिया. ये ग़लत है भाई. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं."

हार्ड कौर पर 'मोदी-भक्त' के हमला करने का सच

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हार्ड कौर पर 'मोदी-भक्त' के हमला करने का सच

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हाल ही में हार्ड कौर के दो विवादित वीडियो सामने आए थे जिनमें से एक में वो 'ख़ालिस्तान ज़िंदाबाद' के नारे लगातीं और भारत समेत केंद्र सरकार को अपशब्द कहती दिखती हैं.

वहीं दूसरे वीडियो में वो पीएम मोदी और अमित शाह के ख़िलाफ़ अपशब्दों का इस्तेमाल करती हैं जिसपर कार्रवाई करते हुए ट्विटर ने उनका @HardKaurWorld नाम का अकाउंट सस्पेंड कर दिया है.

लेकिन इस घटना से जोड़ते हुए हार्ड कौर की जो दो तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं, वो क़रीब दो साल पुरानी हैं.

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वायरल तस्वीरों का सच

ये दोनों ही तस्वीरें हार्ड कौर ने ख़ुद अपने वेरिफ़ाइड इंस्टाग्राम पेज पर 1 जुलाई 2019 को पोस्ट की थीं और दावा किया था कि भारतीय म्यूज़िक इंडस्ट्री में उनके किसी सहकर्मी ने साल 2017 में उनके साथ हाथापाई की थी.

इंस्टाग्राम की अपनी इस पोस्ट में उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया था कि किसने उनके साथ ऐसा किया था. लेकिन कुछ दिन बाद उन्होंने कथित उत्पीड़न का आरोप अपने सहयोगी आर्टिस्ट एमओ जोशी पर लगाया था.

इस पर सफ़ाई देते हुए जोशी ने अपने फ़ेसबुक अकाउंट से एक पोस्ट लिखा था और हार्ड कौर के आरोपों को ग़लत बताया था.

उन्होंने अपने बचाव में दावा किया था कि "दोनों के बीच हाथापाई जैसी कोई घटना नहीं हुई थी. मुंबई की बांद्रा पुलिस भी इस मामले की जाँच कर चुकी है और जाँच के बाद पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था."

भागवत और योगी पर बयान

यह पहली दफ़ा नहीं है जब हार्ड कौर ने पीएम मोदी और बीजेपी नेताओं की तीखी आलोचना की हो. वो इससे पहले भी उनके ख़िलाफ़ आक्रामक बयानबाज़ी करती रही हैं.

इसी साल जून में यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी और संघ प्रमुख मोहन भागवत के ख़िलाफ़ टिप्पणियां करने के आरोप में उनके ख़िलाफ़ देशद्रोह का मुक़दमा दर्ज किया गया था.

17 जुलाई 2019 को हार्ड कौर ने घोषणा की थी कि वो अलगाववादी '2020 रेफ़रेंडम फ़ॉर ख़ालिस्तान' अभियान में शामिल हो गई हैं.

उस समय सोशल मीडिया पर कई वीडियो पोस्ट करके हार्ड कौर ने सिखों से अलग सिख देश के लिए वोट करने की अपील की थी.

फ़ैक्ट चेक टीम

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