भारत का नंबर 1 दुश्मन कोई है तो वो चीन है: राकेश सिन्हा

भारतीय जनता पार्टी के सांसद राकेश सिन्हा ने जम्मू कश्मीर को ख़ास दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ख़त्म करने पर चीन की ओर से आई प्रतिक्रिया को ख़ारिज करते हुए उसे 'भारत का दुश्मन नंबर वन' बताया है.

सिन्हा ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की प्रतिक्रिया की तुलना "खिसियानी बिल्ली" की कहावत से की और दावा किया कि दुनिया का 'कोई इस्लामी देश पाकिस्तान के साथ नहीं है.'

राकेश सिन्हा ने बीबीसी हिंदी रेडियो के संपादक राजेश जोशी के साथ ख़ास बातचीत में कहा कि भारत अपने 'आंतरिक मामले में अमरीका, रूस, पाकिस्तान या चीन किसी को दख़लअंदाज़ी देने की अनुमति नहीं' दे सकता है.

वहीं, सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद मामले पर सिन्हा ने दावा किया कि अयोध्या में 'राम मंदिर ही बनेगा.'

पाकिस्तान का भी दोस्त नहीं चीन

अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर चीन के बयान को लेकर राकेश सिन्हा ने कहा कि चीन विस्तारवादी देश है. वो कभी भारत का अच्छा दोस्त नहीं हो सकता.

उन्होंने कहा, "चीन कुछ साल पहले तक कश्मीर के लोगों को स्टेपल वीज़ा देता था. चीन तो अरुणाचल पर भी दावा कर रहा है. वह तो सिक्किम पर भी दावा कर रहा है. यदि चीन के विस्तारवाद को हम मानेंगे तो भारत के कई हिस्सों को सुपुर्द कर देना पड़ेगा."

"चीन की तो पाकिस्तान से भी दोस्ती नहीं है. चीन से हमारे संबंध हैं. आर्थिक संबंध हैं, राजनीतिक संबंध हैं, लेकिन हम पूरी तरह से स्पष्ट हैं, चीन विस्तारवादी है और चीन कभी भारत का अच्छा दोस्त नहीं हो सकता है. यदि भारत का नंबर वन दुश्मन है तो चीन है."

'अकेला पड़ा पाकिस्तान'

राकेश सिन्हा ने ये भी दावा किया कि इस मुद्दे पर पाकिस्तान पूरी दुनिया में अकेला पड़ गया है.

उन्होंने कहा, "370 भारत का अंदरूनी मामला था. कूटनीतिक लिहाज़ से भारत आज सबसे अच्छी स्थिति में है. पाकिस्तान अलग-थलग है. कोई भी इस्लामिक देश आज पाकिस्तान के साथ खड़ा नहीं है. ये भारत की सबसे बड़ी सफलता है. दुनिया में भारत के एक अहम प्लेयर के तौर पर उभरा है. जो छोटी-मोटी प्रतिक्रियाएं आई हैं, भारत उनसे निपट लेगा."

बीजेपी सांसद ने ये दावा भी किया कि देश की संप्रभुता और अस्मिता के मुद्दे पर सभी दलों में सहमति है कि वो 'मिलकर प्रतिकार करेंगे.'

कश्मीर को लाभ होगा

हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि दुनियाभर में 370 को लेकर चर्चा कुछ 'भारतीयों के दुष्प्रचार की वजह से' हो रही है.

वो कहते हैं कि अनुच्छेद 370 एक अस्थायी व्यवस्था थी जिसे कांग्रेस सरकारों ने स्थायी बनाने की कोशिश की और इसके हटने से जम्मू-कश्मीर के लोगों को महत्वपूर्ण क़ानूनों का लाभ मिलेगा.

"(जवाहर लाल) नेहरू जी ने कहा था कि ये घिस-घिस कर ख़त्म हो जाएगा और कांग्रेस सरकारों के दौरान इसका क्षरण होता रहा. मैं संसद में कह चुका हूं कि जो काम आप खुदरा में कर रहे थे, हमने उसे थोक भाव में कर दिया."

उन्होंने दावा किया, "अभी चार महत्वपूर्ण क़ानून नहीं बन पा रहे थे. जनहित में सबसे महत्वपूर्ण पंचायती राज की बात और 73-74 लागू होना है. दूसरा दलितों के लिए रिज़र्वेशन की बात है. तीसरा है अर्बन सीलिंग एक्ट. श्रीनगर की जो सबसे कीमती ज़मीनें हैं वो तीन चार परिवारों के हाथ में हैं. अर्बन सीलिंग एक्ट लगते ही वो ज़मीन सामान्य लोगों के पास पहुंच जाएगी."

उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे भारत के जिन राज्यों में अनुच्छेद 370 नहीं था, उनके विकास में पिछड़े होने के सवाल पर कहा कि मुद्दा सिर्फ़ विकास नहीं बल्कि समानता का है.

उन्होंने कहा, "देखिए आधुनिक युग में, मॉडर्न नेशन स्टेट में यदि कोई यह माने कि किसी महिला के द्वारा किसी दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करने के बाद उनके बच्चे के अधिकार को छीन लिया जाना चाहिए तो मुझे लगता है कि यह फेमिनिज़्म, जेंडर इक्वलिटी (लिंग समानता), जेंडर डिग्निटी (लैंगिक सम्मान) की बात के ख़िलाफ़ है और वो सब लोग 370 के साथ खड़े हो जाते हैं. मुझे ये बात दुर्भाग्यपूर्ण लगती है."

'सरकार की प्राथमिकता है कश्मीर'

उन्होंने कहा, "ये तो जेंडर इक्वैलिटी की बात है. सामंतवाद को समाप्त करना, विकास कितना होता है कितना नहीं होता है, उससे ज़्यादा महत्वपूर्ण है कि आज के युग में सामंतवाद नहीं चल सकता है. जम्मू-कश्मीर की राजनीति किनके पास है, 1948 से लेकर 2019 तक दो तीन परिवारों ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति को चलाया है."

जम्मू-कश्मीर आई बाढ़ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे की याद दिलाते हुए उन्होंने दावा किया कि कश्मीर भारत सरकार की प्राथमिकता में है.

'सिर्फ़ मंदिर बनेगा'

तीन तलाक़ और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों को ख़त्म करने के बाद क्या केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के अगले एजेंडे में समान नागरिक संहिता और राम मंदिर हैं, इस सवाल पर सिन्हा ने कहा, "यूनिफॉर्म सिविल कोड पर सहमति है, लेकिन ये कब आयेगा कह नहीं सकते और रामजन्मभूमि पर कौन नहीं चाहता कि मंदिर बने."

उन्होंने कहा, "अभी सर्वोच्च न्यायालय में मामला है. जहां रोज़ सुनवाई हो रही है. अपेक्षा करते हैं कि फ़ैसला जल्द होगा. तर्क और तथ्य हमारे पास है, हमें भरोसा देता है कि मंदिर के पक्ष में निर्णय होगा. हमारे घोषणापत्र में साफ़ लिखा है, वहां भगवान राम का मंदिर था, हम भगवान राम का मंदिर बनाना चाहते हैं, आप इसकी व्याख्या जैसी करना चाहें, मैं एक लाइन में कहता हूं कि वहां सिर्फ़ मंदिर ही बनेगा."

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