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UAPA संशोधन बिल संसद से हुआ पास
आतंकवाद निरोधी क़ानून यूएपीए (अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट) संशोधन बिल संसद से पास हो गया है.
लोकसभा में यह बिल पिछले हफ़्ते ही पास हो गया था और शुक्रवार को राज्यसभा में पास हो गया. इस क़ानून से सरकार को यह ताक़त मिल गई है कि वो किसी व्यक्ति को जाँच के आधार पर आतंकवादी घोषित कर सकती है.
इस बिल के क्लॉज नंबर पाँच और छह पर मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस की आपत्ति थी लेकिन ये आपत्ति सदन में संख्या बल के सामने नहीं टिकी. इस बिल के समर्थन में 147 वोट पड़े जबकि विपक्ष में महज़ 42 वोट पड़े.
वो व्यक्ति अगर आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित या उसमें लिप्त पाया जाता है तो सरकार उसे आतंकवादी घोषित कर देगी.
इस बिल के दुरुपयोग को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस और अन्य दलों ने सवाल खड़ा किया तो लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब में कहा था कि सरकार की प्राथमिकता आतंकवाद को जड़ से मिटाना है.
शाह ने कहा था, ''यहां उस प्रावधान की ज़रूरत है जिसके तहत किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किया जा सके. ऐसा संयुक्त राष्ट्र करता है. अमरीका, पाकिस्तान, चीन, इसराइल और यूरोपीय यूनियन में भी यह प्रावधान है. सबने आतंकवाद के ख़िलाफ़ ऐसा प्रावधान बना रखा है.''
ओवैसी ने यूएपीए के दुरुपयोग पर लोकसभा में कहा था, ''मैं इसके लिए कांग्रेस पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराता हूं क्योंकि उसी ने यह क़ानून बनाया था. मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि इस क़ानून का पीड़ित कौन है?''
ओवैसी ने कहा कि किसी को भी आतंकवादी आप तभी कह सकते हैं जब कोर्ट उसे सबूतों के आधार पर दोषी पाती है. ओवैसी ने पूछा कि सरकार महसूस करती है कि कोई व्यक्ति आतंकवादी है तो उसे आतंकवादी घोषित कर देगी. उन्होंने कहा था कि यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला है.
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