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कर्नाटक में येदियुरप्पा के सामने बहुमत साबित करने की चुनौती: पांच बड़ी ख़बरें
सोमवार को कर्नाटक बीजेपी के नेता बीएस येदियुरप्पा को बहुमत साबित करना है, लेकिन इससे पहले रविवार को सदन के स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस और जेडीएस के 14 विधायकों को अयोग्य साबित कर दिया है.
केआर रमेश कुमार ने दल बदल विरोधी कानून का इस्तेमाल करके इन विधायकों को मौजूदा एसेंबली के कार्यकाल 2023 तक के लिए अयोग्य ठहराया है. इससे पहले गुरुवार को स्पीकर रमेश कुमार ने तीन अन्य विधायकों को अयोग्य ठहराया था जिनमें दो कांग्रेस के विधायक और एक निर्दलीय विधायक शामिल थे.
इसके साथ ही सदन में विधायकों की संख्या 225 से घटकर 208 हो गई है. अब बहुमत साबित करने के लिए 105 विधायकों की ज़रूरत होगी जो इस वक़्त बीजेपी के पास है.
स्पीकर के ताज़ा फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. मजेडीएस के बाग़ी विधायकों में से एक ए एच विश्वनाथ ने बीबीसी हिंदी को बताया कि विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फ़ैसले को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.
17 विधायकों के बागी होने के बाद कर्नाटक में 23 जुलाई को कांग्रेस-जेडीएस सरकार सदन में बहुमत साबित करने में नाकाम रही और कुमारस्वामी की सरकार गिर गई. अब बीजेपी सोमवार को सरकार बनाने की दावेदारी पेश करेगी और बहुमत सबित करेगी.
हालांकि स्पीकर के ताज़ा फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी. महाराष्ट्र के एक रिज़ॉर्ट में मौजूद जेडीएस के बाग़ी विधायकों में से एक ए एच विश्वनाथ ने बीबीसी हिंदी को बताया कि विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के फ़ैसले को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.
कांग्रेस में सभी पदों के लिए हो चुनाव
कांग्रेस में नेतृत्व की कमी को देखते हुए अब लगातार पार्टी के भीतर से इसके विरोध में आवाज़ें उठ रही हैं. कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा है कि इसके लिए पार्टी के भीतर चुनाव करवाने चाहिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार थरूर ने कहा कि राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा देने के बाद अभी तक पार्टी की कमान कौन संभालेगा इसका फ़ैसला नहीं हो पाया है.
थरूर ने कहा,''पार्टी में अब सभी अहम पदों के लिए चुनाव होने चाहिए, यहां तक कि कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्यों के लिए चुनाव होने चाहिए.''
इसके साथ ही थरूर ने पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की बात का समर्थन करते हुए पार्टी की कमान किसी युवा नेता को सौंपने की बात कही है.
'बीजेपी किसी को बुलाती नहीं सब खुद आते हैं'
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार के उन आरोपों का जवाब दिया है जिसमें शरद पवार ने बीजेपी पर आरोप लगाया था कि वह दूसरी पार्टी के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने के आरोप लगाए थे.
इसके जवाब में देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि एनसीपी अध्यक्ष को अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ आत्ममंथन करना चाहिए कि लोग उनकी पार्टी क्यों छोड़ रहे हैं.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कहा,''बीजेपी किसी के पीछे भागती नहीं है, दूसरी पार्टी के नेता खुद बीजेपी में आना चाहते हैं. कांग्रेस और एनसीपी के कई नेता बीजेपी में आना चाहते हैं. लेकिन बीजेपी का पक्ष बिलकुल साफ़ है. जिन पर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से मामला दर्ज होगा उन्हें पार्टी में शामिल नहीं किया जाएगा.''
इससे पहले शरद पवार ने पुणे में कहा था कि फडणवीस और उनके अन्य मंत्री दूसरी पार्टी के नेताओं को सरकारी एजेंसियों का डर दिखाकर बीजेपी में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं.
आज़म खान के पक्ष में जीतनराम मांझी
लोकसभा की डिप्टी स्पीकर रमा देवी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर आलोचनाओं से घिरे समाजवादी पार्टी के सांसद आज़म ख़ान के बचाव में जीतन राम मांझी उतर गए हैं.
मांझी ने कहा है कि उन्होंने जो कहा उसका ग़लत मतलब निकाला गया है, आज़म ख़ान को माफ़ी मांगनी चाहिए लेकिन इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए.
जीतन राम मांझी ने बड़े ही अजीबोगरीब उदाहरण के साथ आज़म खान का बचाव करते हुए कहा, '' जब भाई बहन मिलते हैं, चुंबन करते हैं तो क्या इसे सेक्स कहा जाएगा? एक मां अपने बेटे को प्यार से चुंबन करती है या बेटा ऐसा करता है तो क्या ये सेक्स की श्रेणी में आता है? आज़म ख़ान के बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है, ऐसे में उन्हें बस माफ़ी मांगनी चाहिए इस्तीफ़ा नहीं देना चाहिए ''
अफ़ग़ानिस्तान राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के पहले दिन हमला
अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के लिए शुरू हुए प्रचार के पहले ही दिन संदिग्ध इस्लामिक चरमपंथियों ने हमला किया है.
राजधानी काबुल के उत्तरी जिले में हुए धमाके में अफ़ग़ान राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के सहयोगी अमरुल्ला सालेह घायल हुए हैं जबकि दो लोगों की मौत हो गई.
हथियारबंद लोगों ने धमाके के बाद सालेह के कार्यालय पर धावा बोल दिया था. सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में एक हमलावर की मौत की ख़बर है.
काबुल में मौजूद पत्रकार बलाल सरवारी ने अमरुल्ला सालेह के बारे में बताया,''अमरुल्ला सालेह इंटेलिजेंस चीफ़ रहे हैं और राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के सहयोगी के तौर पर उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवर हैं. वह तालिबान, पाकिस्तान की सेना और उनकी ख़ुफिया एजेंसियों के कड़े आलोचक रहे हैं. यानी उनके काफ़ी दुश्मन हैं.''
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