राज्यपाल की समय सीमा से कर्नाटक की गुत्थी और उलझी

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बेंगलुरु से बीबीसी हिंदी के लिए

जनतादल सेक्युलर और कांग्रेस की गठबंधन सरकार और राज्यपाल वाजुभाई वाला कर्नाटक के सत्ता संघर्ष में आमने सामने आ गए हैं, क्योंकि राज्यपाल की ओर से दी गई समय सीमा के अंदर विश्वासमत पर वोटिंग की संभावना बहुत क्षीण हो गई है.

गुरुवार की देर शाम राज्यपाल ने मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को चिट्ठी लिख कर कहा है कि वो शुक्रवार को दोपहर 1.30 तक विश्वासमत पर वोटिंग कराएं. इस बात की पुष्टि मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने की है.

राज्यपाल की ओर से समय सीमा की बात ऐसे समय में आई है जब विधानसभा में गुरुवार को पूरे दिन इस बात पर बहस होती रही कि बाग़ी विधायकों के मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राजनीतिक पार्टियों के अधिकारों का उल्लंघन होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि 15 बाग़ी विधायक विधानसभा की प्रक्रिया से अनुपस्थित रहने के लिए स्वतंत्र हैं. इसका मतलब ये है कि सदन में अनिवार्य मौजूदगी के लिए राजनीतिक पार्टियां जो व्हिप जारी करती हैं वो अप्रभावी हो जाएगा.

कांग्रेस जा सकती है कोर्ट

सदन में इस मुद्दे पर सवाल खड़ा करने वाले सिद्दारमैया ने बीबीसी हिंदी से कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बाग़ी विधायक विधानसभा की कार्रवाई से अनुपस्थित हो सकते हैं. इसका मतलब ये है कि जिस पार्टी से वे संबंध रखते हैं वो व्हिप जारी नहीं कर कती है. व्हिप न जारी करना एक राजनीतिक पार्टी के रूप में हमारे अधिकारों का हनन है."

सिद्दारमैया ने कहा कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रही है.

साथ ही पार्टी उन विधायकों को व्हिप जारी करने को लेकर स्पष्टीकरण के लिए भी कोर्ट जा सकती है जिन्होंने पार्टी नियमों का उल्लंघन किया और उनके इस्तीफ़ा या अनुपस्थित सरकार गिरने का कारण बनती है.

मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने जब विश्वासमत का प्रस्ताव पेश किया उसके कुछ मिनट बाद ही सदन में सिद्दारमैया ने ये मुद्दा उठाया.

पूर्व मंत्री एचके पाटिल और मंत्री कृष्णा बायर गौड़ा जैसे सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल खड़ा किया क्योंकि विधायक की एक स्वतंत्र संवैधानिक हैसियत होती है.

सत्तारूढ़ दलों और बीजेपी के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक के बीच पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और पूर्व मंत्री बासवराज बोम्मई जेसे वरिष्ठ नेता राज्यपाल को ज्ञापन देने राजभवन चले गए.

उनकी शिकायत थी कि गठबंधन सरकार विश्वासमत पर वोटिंग कराने में देरी कर रही है.

राज्यपाल की चिट्ठी पर हंगामा

राज्यपाल ने भी विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार को चिट्ठी लिख कर कहा कि विश्वासमत पर दिन ख़त्म होने तक वोटिंग हो जानी चाहिए.

इस चिट्ठी को सदन में स्पीकर ने पढ़कर सुनाया जिस पर कांग्रेस के मंत्री आरवी देशपांडे और बायर गौड़ा ने राज्यपाल की ओर से स्पीकर को निर्देश दिए जाने पर अपना विरोध दर्ज कराया.

बायर गौड़ा ने कहा, "सदन पहले ही विश्वासमत के मुद्दे पर कार्रवाई कर रहा है और सदस्यों ने कुछ चिंताएं ज़ाहिर की हैं. विश्वासमत के लिए राज्यपाल को जल्दबाज़ी करने की ज़रूरत नहीं है."

इन सबके बीच सदन में तीखी बहस जारी थी और जेसी माधुस्वामी जैसे बीजेपी सदस्यों का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश बिल्कुल स्पष्ट है और उसके आदेश पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता.

एक समय ऐसा भी आया जब बीजेपी सदस्यों ने स्पीकर रमेश कुमार पर गठबंधन सरकार की ओर से विश्वासमत पर वोटिंग में देरी करने में मदद का भी आरोप लगाया.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मद्देनज़र विधायकों के मुद्दे पर एडवोकेट जनरल से सलाह लेने के लिए जब स्पीकर सदन से चले गए तो डिप्टी स्पीकर कृष्णा रेड्डी ने सत्तारूढ़ और विपक्ष के सदस्यों में तीखी बहस के बीच सदन स्थगित कर दिया.

वोटिंग में देरी के विरोध में बीजेपी सदस्यों ने पूरी रात धरना देने का फ़ैसला कर लिया.

कांग्रेस नेता वीएस उग्रप्पा ने बीबीसी को बताया, "मैं नहीं लगता कि सत्तारूढ़ गठबंधन राज्यपाल की ओर से दी गई समय सीमा का पालन कर पाएगा. सदन में पहले ही विस्वासमत पर बहस चल रही है और ऐसे कई उदाहरण है जब विश्वासमत पर कई दिनों तक बहस होती रही."

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