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कर्नाटक: कांग्रेस के 21 मंत्रियों ने पद छोड़े
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बेंगलुरु से, बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस ने अपनी गठबंधन सरकार बचाने की कोशिशें तेज़ कर दी हैं. सरकार में शामिल कांग्रेस के सभी 21 मंत्रियों ने अपने पद छोड़ने का फ़ैसला किया है ताकि बाग़ी विधायकों को मंत्री बनाकर मनाया जा सके.
माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी नए मंत्रिमंडल का गठन करेंगे और उसमें इस्तीफ़ा देने वाले विधायकों को भी मंत्री बनाया जा सकता है.
कहा जा रहा है कि जेडीएस के मंत्री भी बहुत जल्द अपने पदों से इस्तीफ़ा देने वाले हैं.
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोमवार सुबह मुख्यमंत्री की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद कहा, "मंत्रियों ने स्वेच्छा से अपने पद छोड़े हैं. उन्होंने कांग्रेस पार्टी से मंत्रिमंडल में फ़ेरबदल पर उचित फ़ैसला लेने को कहा है."
इस बैठक में शामिल रहे एक मंत्री ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी हिंदी से कहा, "जेडीएस के मंत्री भी ऐसा ही करने वाले हैं. इसके बाद मुख्यमंत्री राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाक़ात करेंगे और इन इस्तीफ़ों को स्वीकार करने की सिफ़ारिश करेंगे."
कांग्रेस की ओर से यह फ़ैसला लिए जाने के बाद भी एक निर्दलीय विधायक एच नागेश ने राज्यपाल से मिलकर मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्हें भाजपा के साथ जाने से रोकने के लिए 21 दिन पहले ही मंत्री बनाया गया था.
इस्तीफ़ों की यह झड़ी उन विधायकों के लिए सीधा संदेश है जो 'ऑपरेशन कमल' से अप्रभावित हैं. ये वो विधायक हैं जो मंत्री पद या अपने क्षेत्र के विकास के लिए पर्याप्त फ़ंड न मिलने की वजह से अपने सहयोगी दलों के नेताओं से नाराज़ हैं.
अभी और होंगे इस्तीफ़े...
लेकिन कुछ दूसरे इस्तीफ़ों ने जेडीएस-कांग्रेस सरकार के लिए संकट की स्थिति पैदा कर दी है. कांग्रेस और जेडीएस के एक दर्जन से ज़्यादा विधायकों ने इस्तीफ़ा दे दिया है और कहा जा रहा है कि वे भाजपा के संपर्क में हैं.
कर्नाटक में भाजपा 'ऑपरेशन कमल' के तहत कोशिश कर रही है कि सत्ताधारी गठबंधन के विधायक अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दें और फिर कमल के निशान पर चुनाव लड़ें.
इस कहानी के दो पहलू हैं. कुछ को मंत्री पद न मिलने की नाराज़गी है और कुछ को शिकायत है कि उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वरा और दूसरे मंत्रियों की ओर से कई विकास कार्यों को हरी झंडी नहीं दी गई.
कांग्रेस महासचिव वेणुगोपाल कहते हैं, "कुछ कांग्रेस और जेडीएस विधायकों ने इस्तीफ़े दिए हैं. कुछ को मंत्री न बनाए जाने की शिकायत है. हम बातचीत कर रहे हैं."
यही वजह है कि नाराज़ विधायकों के लिए जगह बनाने के लिए मंत्रियों ने इस्तीफ़ा देने का फैसला किया है.
एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "वे मज़बूत और ईमानदार नेता हैं जिनके बिना कांग्रेस इतना आगे नहीं बढ़ सकती थी और न ही मोदी के असर के बावजूद 2018 विधानसभा चुनाव में बेंगलुरु में अपनी पकड़ बनाए रख सकती थी."
निर्दलीय विधायक नागेश के इस्तीफ़े से सरकार गिराने की भाजपा की कोशिशों को बल मिला है.
अगर विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार कांग्रेस और जेडीएस के 12 विधायकों के इस्तीफ़े स्वीकार कर लेते हैं तो सदन की कुल संख्या घटकर 212 रह जाएगी. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 106 हो जाएगा. भाजपा के पास पहले ही 105 विधायक हैं और अब निर्दलीय नागेश ने भी इस्तीफ़ा दे दिया है.
एक भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "दस और विधायक हैं जो अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा देने वाले हैं."
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