#INDvENG: इंग्लैंड ने कैसे खोली भारतीय गेंदबाज़ी की पोल

भारतीय खिलाड़ी

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    • Author, आदेश कुमार गुप्त
    • पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

युजवेंद्र चहल 10-0-88-0

अभी तक टीम इंडिया के स्पिन डिपार्टमेंट की बागडोर थामे दाएं हाथ के फिरकी गेंदबाज़ युजवेंद्र चहल ने रविवार को इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम लिखवा लिया, जो वो शायद कतई नहीं चाहते होंगे.

बर्मिंघम के एजबैस्टन में चहल ने विश्व कप का सबसे महंगा स्पैल डाला. इससे पहले ये रिकॉर्ड जवागल श्रीनाथ के नाम पर था. श्रीनाथ ने 2003 के विश्व कप में 10 ओवरों के अपने कोटे में 87 रन खर्च किए थे.

ख़ैर, ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ चहल ही अंग्रेज़ बल्लेबाज़ों का निशाना रहे हों, क्या कुलदीप यादव और क्या हार्दिक पांड्या, सभी की इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने अच्छी ख़बर ली.

कुलदीप और चहल ने कुल मिलाकर 20 ओवरों के अपने कोटे में 160 रन पिटाए और एक विकेट हासिल किया.

बेहद अहम मुक़ाबले में इंग्लैंड ने जब टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया तो कुछ लोगों को थोड़ी हैरानी हुई थी.

लेकिन जब विराट कोहली ने भी कहा कि वह भी टॉस जीतते तो पहले बल्लेबाज़ी करना ही पसंद करते और उसके बाद जब भारतीय टीम का ऐलान हुआ तो उसमें विजय शंकर की जगह ऋषभ पंत का शामिल था तभी अंदाज़ा हो गया था कि जिस पिच पर दोनों टीमें भिड़ने वाली है वह रनों से भरपूर है.

दरअसल, इंग्लैंड ने निर्धारित 50 ओवर में सात विकेट पर 337 रन बनाए जबकि एक समय तो वह 350 से अधिक के स्कोर जाती दिखाई दे रही थी.

हार्दिक पांड्या

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इसके बावजूद, भारतीय गेंदबाज़ इतने कमज़ोर साबित होंगे यह भी किसी ने नही सोचा था क्योंकि एक तरफ जहां इंग्लैंड की टीम अपने पिछले तीनों मैच हारकर सेमीफाइनल दौड में बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैय्यार होकर मैदान में उतरी.

वहीं, भारतीय टीम तो जीत के रथ पर सवार है. ख़ासकर भारतीय गेंदबाज़ों ने अभी तक खेले गए मैचों में शानदार गेंदबाज़ी की मिसाल पेश की. यह उनकी गेंदबाज़ी का ही कमाल था कि विरोधी टीम एक-एक रन के लिए तरसती दिखी. यही कारण था कि भारत के कप्तान विराट कोहली को भी गेंदबाज़ी में बहुत अधिक परिवर्तन नही करने पड़े.

चाहे वह तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी हो, हार्दिक पांड्या या जसप्रीत बुमराह के रूप में तेज़ गेंदबाज़ या फिर युज़वेंद्र चहल और कुलदीप यादव के रूप में स्पिन जोड़ी.

लेकिन जब इंग्लैंड की सलामी जोड़ी ने भारत के ख़िलाफ़ रविवार को पहले विकेट के लिए केवल 22.1 ओवर में 160 रनों की साझेदारी कर दी तो लगा जैसे भारतीय गेंदबाज़ी की पोल भी खुल गई.

इससे पहले, इंग्लैंड के ख़िलाफ़ खेले गए मैचों से पहले मोहम्मद शमी ने 16.1 ओवर में 56 रन देकर आठ विकेट झटके हैं.

चहल ने 44 ओवर में 241 रन देकर 10, जसप्रीत बुमराह ने 44 ओवर में 196 रन देकर नौ, हार्दिक पांड्या ने 39 ओवर में 212 रन देकर पांच और कुलदीप यादव ने 47 ओवर में 207 रन देकर चार विकेट हासिल किए.

बेन स्टोक्स

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जेसन रॉय और जॉनी बेयरस्टो ने बेहद खुलकर खेलते हुए सभी गेंदबाज़ों की जमकर ख़बर ली. जेसन रॉय ने केवल 57 गेंदों पर 66 रन और जॉनी बेयरस्टो ने 109 गेंदो पर 111 रन बनाए.

शुरुआत से ही दोनों बल्लेबाज़ों ने खुलकर शॉटस लगाए. ऐसा भी नहीं है कि भारतीय गेंदबाज़ों ने उन्हें रोकने के लिए अपने तरकश का तीर इस्तेमाल नही किया. दरअसल यह मैच एक नए विकेट पर हुआ.

रनों की बारिश

इससे पहले, इसी मैदान यानी एज़बैस्टन बर्मिंघम में दक्षिण अफ्रीका और न्यूज़ीलैंड के बीच मैच खेला गया था जिसमें दक्षिण अफ्रीका 49 ओवर में छह विकेट खोकर 241 रन ही बना सकी थी जबकि बारिश के कारण एक ओवर कम हुए उस मैच में न्यूज़ीलैंड ने जीत का लक्ष्य तीन गेंद शेष रहते छह विकेट खोकर हासिल किया था.

इसके अलावा इसी मैदान में पाकिस्तान और न्यूज़ीलैंड के बीच हुए मुक़ाबले में भी 230 से 240 के बीच रन बने.

लेकिन विकेट के बदलने से पहले तो इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों को भी कुछ समझ में नहीं आया कि इसका उछाल कैसा है. शुरू में गेंद कभी नीची कभी ऊंची रह रही थी, लेकिन पहले पॉवर प्ले में इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने ज़ोरदार शॉटस खेलने की रणनीति अपनाई और उसमें वह कामयाब भी हो गए.

मोहम्मद शमी

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अधिकतर फील्डर सर्कल के अंदर खड़े थे जिससे उन्हें चौके जमाने के मौक़े भी मिले. और इससे पहले की भारतीय गेंदबाज़ विकेट को समझ पाते तब तक इंग्लैंड बड़े स्कोर की तरफ मुड चुका था.

जेसन रॉय ने सात चौके और दो छक्के जमाये. दूसरी तरफ जॉनी बेयरस्टो ने भी 10 चौके और छह छक्के जमाए. इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि पिछले दिनों जितने भी विकेट पर मैच खेले गए वह बेहद स्लो यानी धीमे थे. ऐसे विकेट पर कोई भी बल्लेबाज़ सीधे बल्ले से तो छोड़ो क्रॉस बैट से भी हिटिंग नही कर सकता था. लेकिन रविवार को जिस विकेट पर इंग्लैंड खेला वहां गेंद तेज़ी से बैट पर आ रही थी जिससे शॉट्स की टाइमिंग भी सही थी.

वैसे तो मोहम्मद शमी ने 69 रन देकर पांच विकेट लिए और जसप्रीत बुमराह ने भी 44 रन देकर एक विकेट लिया. बस इन्ही दोनों गेंदबाज़ो ने कुछ क़िफ़ायती गेंदबाज़ी की क्योंकि बुमराह यॉर्कर करने में माहिर है.

शमी का पंजा

मोहम्मद शमी तो विकेट के दोनों तरफ स्विंग करने की क्षमता भी रखते है. बस इन्हे शुरूआत में विकेट के समझने में देर लगी लेकिन जब विकेट समझ में आई तब तक काफी देर हो चुकी थी. शुरू में विकेट ना मिलने से बल्लेबाज़ों के हौंसले खुलते चले गए.

मोहम्मद शमी ने अपने वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और पहली बार पाँच विकेट झटके.

जसप्रीत बुमराह

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40 ओवर के बाद मोहम्मद शमी और जसप्रीत बुमराह ने रन गति पर अंकुश लगाया. लेकिन जब शुरू में एक बार जेसन रॉय और जॉनी बेयरस्टो खुले तो उसका खामियाजा स्पिनर युज़वेंद्र चहल ओर कुलदीप यादव को भी भुगतना पड़ा.

इंग्लैंड के बल्लेबाज़ों ने इनकी गेंदों पर जमकर चौके-छक्के लगाने शुरू किए. इसके अलावा इस मैदान की एक बाउंड्री केवल 59 मीटर की दूरी वाली है, इसके भी इस मैच में चौके-छक्के ख़ूब लगे. यही कारण है कि कुलदीप यादव ने 72 रन देकर एक विकेट हासिल किया. चहल ने 10 ओवर में 88 रन दिए तो हार्दिक पांड्या ने भी 10 ओवर में 60 रन दिए.

भारतीय खिलाड़ी

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वैंसे भी जॉनी बेयरस्टो ने तो आईपीएल में भी अपनी ज़बरदस्त फॉर्म दिखाई थी और वह इस मैच में भी आईपीएल की तरह ही खेले. इससे पहले भी बेयरस्टो ने इसी विश्व कप में अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ 90, वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ 45 और बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 51 रन बनाए.

जेसन रॉय ने भी बांग्लादेश के ख़िलाफ़ 153 और दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ 54 रन बनाए. जेसन रॉय मांसपेशियों में खिचाव के कारण पिछले कुछ मुक़ाबले नही खेले थे.

और बाद में रही बात बेन स्टोक्स की तो वह तो इसी अंदाज़ में खेलते है. उन्होंने छह चौके और तीन छक्कों की मदद से 54 गेंदो पर 79 रन बनाए.

कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह एक अच्छे विकेट पर भारतीय गेंदबाज़ो के लिए बुरा दिन था.

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