#TabrezAnsari: मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ भारत के 50 से ज़्यादा शहरों में प्रदर्शन - सोशल

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"सरकार लोगों से जबरन मुझसे प्रेम नहीं करवा सकती लेकिन वो मुझे पीटकर मार डालने से रोक सकती है."
ये मार्टिन लूथर किंग जूनियर के शब्द हैं जो बुधवार को भारत के कई शहरों, कई इलाक़ों में गूंजे.

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वजह थी, झारखंड में मुसलमान युवक तबरेज़ अंसारी की मॉब लिंचिंग के विरोध में जगह-जगह हुए विरोध प्रदर्शन.
कुछ दिन पहले 17 जून को झारखंड के घातकीडीह गांव में भीड़ ने तबरेज़ अंसारी नाम के एक युवक को कथित चोरी के शक में बिजली के पोल से बांधकर इतना पीटा था कि बाद में उनकी मौत हो गई थी.
भीड़ ने इस अपराध का वीडियो भी बनाया था जो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया. वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ तबरेज़ को पीट रही है और साथ ही उनसे 'जय श्री राम' और 'जय हनुमान' के नारे लगवाए.
इस घटना की देश भर में निंदा हुई थी और इसी सिलसिले में बुधवार को मॉब लिंचिंग के विरोध में भारत के 50 से अधिक शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए.
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''मैं भी तबरेज़''
भारत के अलग-अलग शहरों में मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता, सिविल सोसायटी के सदस्य, छात्र और आम लोगों ने इकट्टठे होकर मॉब लिंचिंग के अपराधों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की.
विरोध प्रदर्शनों में विपक्ष के कुछ नेता भी शामिल हुए.
सोशल मीडिया पर भी इन प्रदर्शनों की ख़ासी चर्चा रही. #IndiaAgainstLynchTerror और #JusticeForTabrez हैशटैग से फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गईं.
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जेएनयू के पूर्व छात्र और 'युनाइटेड अगेंस्ट हेट' संस्था से जुड़े उमर ख़ालिद ने ट्वीट किया, "चुप्पी का राज क़ायम नहीं रहेगा. विरोध मुखर होगा. देश और दिल्ली में हज़ारों लोग ये साबित करने के लिए सड़कों पर उतरे कि मानवता अभी ज़िंदा है और विरोध भी क़ायम है."
समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता अमीक़ जामेई ने लखनऊ के विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें पोस्ट कीं.
दिल्ली के एक फ़ोटो पत्रकार ने भी जंतर-मंतर की तस्वीरें पोस्ट की जिसमें लोग तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
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प्रधानमंत्री ने भी तोड़ी चुप्पी
इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे थे. इसके बाद प्रधानमंत्री ने बुधवार को राज्यसभा में इस अपराध का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, ''विपक्ष कह रहा है कि झारखंड मॉब लिंचिंग का अड्डा बन गया है. हमें युवक की मौत का दुख है. दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए. लेकिन क्या इसके लिए पूरे झारखंड को बदनाम करना ठीक है? इससे किसी का भला नहीं होगा. अपराध होने पर उचित क़ानून और संविधान के दायरे में कार्रवाई करनी चाहिए.''
मोदी ने कहा, ''दुनिया में आतंकवाद को गुड और बैड के नज़रिए से नहीं देखना होगा. हिंसा को हम अलग-अलग चश्मे से नहीं देख सकते हैं. मानवता के प्रति हमारी संवेदनशीलता रहनी चाहिए. हम केरल और पश्चिम बंगाल की हिंसा को अलग-अलग नज़रिए से नहीं देख सकते. जिसने यह काम किया है उसे कड़ी से कड़ी सज़ा मिले.''
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प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैं समझता हूं कि राजनीतिक चश्मे उतारकर देखना चाहिए. अगर ऐसा करेंगे तो उज्ज्वल भविष्य नज़र आएगा. जिन लोगों ने दिल्ली की सड़कों पर गले में टायर लटका कर सिखों को जला दिया था, उनमें संदिग्ध रहे कई लोग संवैधानिक पदों पर बैठे हैं.''
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