FATF का पाकिस्तान को अक्टूबर तक सुधार का मौका, वर्ना...: पांच बड़ी ख़बरें

दुनियाभर की वित्तीय अनियमितताओं, मनी लॉन्ड्रिंग और चरमपंथ के वित्तपोषण पर नज़र रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स ने पाकिस्तान को अक्तूबर तक का वक़्त दिया है कि वो चरमपंथ की फंडिंग को रोकने वाले अभियानों में सुधार लाए.

फाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (एफ़एटीएफ़) ने कहा है कि यह चिंतिंत करने वाली बात है कि पाकिस्तान एक जनवरी और फिर एक मई वाला टारगेट पूरा नहीं कर पाया है.

एफ़एटीएफ़ ने अपने एक बयान में कहा, "एफ़एटीएफ़ ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह अक्तूबर 2019 तक अपनी कार्ययोजना को तेज़ी से पूरा करे, नहीं तो उसके ख़िलाफ़ अगला कदम उठाया जाएगा."

एफ़एटीएफ़ एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जिसकी स्थापना जी-7 देशों की पहल पर 1989 में की गई थी. संस्था का मुख्यालय पेरिस में है, जो दुनियाभर में हो रही मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए नीतियां बनाती है. साल 2001 में इसने अपनी नीतियों में चरमपंथ के वित्तपोषण को भी शामिल किया था.

फिलहाल पाकिस्तान इस अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्थान की ग्रे लिस्ट में शामिल है. एफ़एटीएफ़ का सदस्य देश भारत चाहता था कि पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में शामिल किया जाए.

भारत का पक्ष था कि पाकिस्तान वित्तीय अपराधों का मुक़ाबला करने में अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने में विफल रहा है.

लेकिन इस बार चीन, मलेशिया, तुर्की की मदद से पाकिस्तान ने ख़ुद को इससे बचा लिया. अगर पाकिस्तान एफ़एटीएफ़ के अगले और अंतिम लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाता है तो उसे ब्लैकलिस्ट में शामिल कर दिया जाएगा.

दिल्ली-एनसीआर में थी ब्लास्ट की तैयारीः एनआईए

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली और अमरोहा से पिछले साल गिरफ़्तार किए 10 लोगों के खिलाफ़ चार्जशीट दायर की है. एनआईए का कहना है कि ये लोग दिल्ली-एनसीआर में रिमोट कंट्रोल आईईडी ब्लास्ट करने की योजना बना रहे थे ताकि देश में कथित आईएस की हुकूमत कायम कर सकें.

एनआईए स्पेशल कोर्ट में 5000 पेज की याचिका में कहा गया कि कथित आईएस से प्रेरित होकर सुहैल ने दिल्ली के रहने वाले मोहम्मद फैज़ के साथ एक "आतंकी मॉड्यूल" बनाया जिसका नाम हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम रखा गया था.

ये संगठन ऐसा रिमोट कंट्रोल डिवाइस बनाने में जुटा था जिसे 100 मीटर की दूरी से ऑपरेट किया जा सके.

चार्जशीट में शामिल लोगों के नाम मुफ़्ती मोहम्मद सुहैल (30 साल), अनस युनूस (21 साल), ज़ुबैर मलिक (22 साल), राशिद ज़फ़र रक (24 साल), मो. साकिब (26 साल), मो. अबसर सैद (24 साल), मो. गुलफ़ाम (25 साल), मो. फ़ैज़ (25 साल) और नैम चौधरी (22 साल) शामिल हैं.

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजय कुमार ने इस मामले पर अगली सुनवाई चार जुलाई को तय की है.

मुंबईः निर्माणाधीन पोत में आग लगने से एक की मौत

मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में विशाखापत्तनम निर्माणाधीन युद्धपोत में शुक्रवार को आग लगने से एक शख़्स की मौत हो गई.

शहर के दमकल सेवा के प्रमुख पीएस राहंगडाले ने बताया, "निर्माणाधीन युद्धपोत विशाखापट्टनम में शाम 5 बजकर 44 मिनट पर आग लग गई. यह आग इस जंगी पोत के दूसरे डेक पर लगी और बाद में इसकी चपेट में तीसरा डेक भी आ गया."

इस पोत का निर्माण भारतीय नौ सेना के लिए किया जा रहा था.

तीसरी बार लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पेश

नरेंद्र मोदी की सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में तीन तलाक के ख़िलाफ़ लोकसभा में विधेयक पेश किया.

पहले सत्र के कामकाज के पहले दिन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद यह विधेयक लेकर आए, जिसका विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया.

सदन में रविशंकर प्रसाद, असदुद्दीन ओवैसी और शशि थरूर के बीच तीखी नोकझोंक के बाद मत विभाजन करवाना पड़ा.

बिल के पक्ष में 186 मत मिले, वहीं इसके ख़िलाफ़ 74 सांसदों ने वोट किया.

हॉन्गकॉन्गः पुलिस मुख्यालय को प्रदर्शनकारियों ने घेरा

हॉन्गकॉन्ग में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय को घेर लिया है.

उनकी मांग है कि प्रत्यर्पण बिल को पूरी तरह से रद्द किया जाए. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से गुज़ारिश की है कि वो शांति बनाए रखें और अपना आंदोलन वापस ले लें क्योंकि सड़कें बंद होने का असर आपात सेवाओं पर पड़ रहा है.

हॉन्ग कॉन्ग में करीब दो सप्ताह से प्रत्यर्पण क़ानून में संशोधन के ख़िलाफ़ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और इस दौरान कई बार पुलिस के साथ हिंसक झड़पें भी हुई हैं.

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