हॉन्ग कॉन्ग: प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय को घेरा

हॉन्ग कॉन्ग में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस मुख्यालय को घेर लिया है. उनकी मांग है कि प्रत्यर्पण बिल को पूरी तरह से रद्द किया जाए.

पुलिस ने प्रदर्शनाकिरियों से गुज़ारिश की है कि वो शांति बनाए रखें और अपना आंदोलन वापस ले लें क्योंकि सड़कें बंद होने का "असर आपात सेवाओं" पर पड़ रहा है.

हॉन्ग कॉन्ग में करीब दो सप्ताह से प्रत्यर्पण क़ानून में संशोधन के ख़िलाफ़ लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और इस दौरान कई बार पुलिस के साथ हिंसक झड़पें भी हुई हैं.

हॉन्ग कॉन्ग की चीफ़ एग्ज़िक्युटिव कैरी लैम ने 15 जून को लोगों का ग़ुस्सा शांत करने के लिए प्रत्यर्पण बिल को निलंबित करने का ऐलान भी किया था.

हॉन्ग कॉन्ग के कई विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सरकार से कहा था कि वो एक निर्धारित समयसीमा के भीतर इस बिल को रद्द करें. लेकिन ये समयसीमा ख़त्म होने के बाद एक बार फिर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं.

बिल के आलोचकों का कहना है कि ये बिल हॉन्ग कॉन्ग की न्यायिक स्वायत्तता के लिए ख़तरा है.

शुक्रवार को लोग हॉन्ग कॉन्ग के सरकारी मुख्यालय या विधान काउंसिल के सामने एकत्र हुए थे जिसके बाद उन्होंने पुलिस मुख्यालय को घेरना शुरु किया.

प्रदर्शनकारियों में एक छात्र थे जोशुआ वॉन्ग, जो साल 2014 में गणतंत्र की मांग करने वाले प्रदर्शनों का चेहरा बने थे. उन्हें 2014 में हुए प्रदर्शनों के बाद अवमानना के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसी सप्ताह उन्हें जेल से रिहा किया गया.

शुक्रवार को एक ट्वीट में वॉन्ग ने पुलिस से अपील की कि वो हाल के प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों को आरोपमुक्त करें और रिहा करें.

कुछ प्रदर्शनकारियों ने राजस्व भवन का भी घेराव कर लिया, जिसके बाद लेबर डिपार्टमेन्ट ने इमारत में होने वाले कुछ काम को दोपहर तक के लिए रोके जाने की घोषणा की. शुक्रवार को पूरे दिन प्रदर्शनकारी सरकारी इमारतों के बाहर बैठे रहे.

हॉन्ग कॉन्ग में मौजूद बीबीसी संवाददाता हेलियर चेयुंग कहती हैं कि प्रदर्शनकारी कैरी लैम के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे लेकिन अब उन्होंने इस मांग को अपनी मांगों की सूची से हटा दिया है.

उनका पूरा ज़ोर अब इस बिल को पूरी तरह से रद्द कराने पर है. साथ ही वो गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनाकारियों को छोड़े जाने की मांग भी कर रहे हैं.

क्या है प्रत्यर्पण बिल?

हॉन्ग कॉन्ग 1841 से 1997 तक ब्रिटेन की कॉलोनी था. ब्रिटेन ने उसे 'वन कंट्री टू सिस्टम' यानी एक देश और दो प्रणाली समझौते के तहत चीन को सुपुर्द किया. ये क़रार हॉन्गकॉन्ग को वो आज़ादी और लोकतांत्रिक अधिकार देता है, जो चीन के लोगों को हासिल नहीं है.

हॉन्गकॉन्ग की सरकार फ़रवरी के महीने में मौजूदा प्रत्यर्पण क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव लेकर आई थी. ताइवान में एक व्यक्ति अपनी प्रेमिका की कथित तौर पर हत्या कर हॉन्ग कॉन्ग वापस आ गया था. इसके बाद ही इस क़ानून में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया था.

प्रत्यर्पण क़ानून आने वाले हफ़्तों में पारित किया जा सकता है. इसके अनुसार अगर कोई शख़्स अपराध करके हॉन्ग कॉन्ग भाग जाता है तो उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेजा जाएगा.

यह क़ानून चीन को उन क्षेत्रों से संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति देगा, जिनके साथ हॉन्ग कॉन्ग के समझौते नहीं है.

अब तक चीन ने इस बिल पर हॉन्ग कॉन्ग की चीफ़ एग्जेक्युटिव कैरी लैम का समर्थन किया है.

तमाम विरोध के बावजूद कैरी लैम ने पहले बिल में प्रस्तावित संशोधनों को रद्द करने से इनकार किया था. लेकिन बाद में उन्होंने लोगों से माफी मांगी और कहा कि संशोधनों को रद्द किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि जब तक लोगों की चिंताओं का निवारण नहीं किया जाएगा विवादित बिल में संशोधन नहीं लाए जाएंगे. उन्होंने ये भी कहा कि इस बात के आसार कम ही हैं कि अगले साल विधान काउंसिल का कार्यकाल ख़त्म होने से पहले बिल पारित किया जा सके.

लोग फिर भी क्यों हैं नाराज़?

कैरी लैम की घोषणा का हॉन्ग कॉन्ग की जनता पर कुछ अधिक असर होता नहीं दिखा, हालांकि विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतने वालों की संख्या में कुछ कमी ज़रूर आई है.

प्रदर्शनकारी अब मांग कर रहे हैं कि इस विवादित बिल को पूरी तरह से ख़ारिज कर दिया जाए ताकि भविष्य में इसके पारित होने के कोई मौक़े ही न हों.

पहले वो ये भी मांग कर रहे थे कि कैरी लैम अपने पद से इस्तीफ़ा दें. उनका आरोप था कि वो चीन के समर्थन में बोलती हैं. लेकिन 12 जून को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद पुलिस के ताकत के इसतेमाल को लेकर भी प्रदर्शनकारी विरोध कर रहे हैं.

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े थे और रबर की गोलियां चलाई थीं. मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने पुलिस पर "अत्यधिक ताक़त का इस्तेमाल" करने का आरोप लगाया.

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 12 जून को हुई झड़पों में पुलिस के "ग़ैरज़रूरी और ज़रूरत से अधिक बल प्रयोग" की 14 घटनाएं बताईं. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लघंन कहा.

उस दिन हुई हिंसक झड़पों में 72 लोग घायल हुए थे जिनमें 21 पुलिस अधिकारी भी शामिल थे.

उसके बाद से अब तक 32 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है जिनमें से पांच पर दंगा फैलाने का आरोप लगाया गया है. अब तक आठ लोगों को पुलिस ने छोड़ दिया है लेकिन प्रदर्शनकारी बाकी लोगों को रिहा किए जाने की मांग को लेकर सड़कों पर हैं.

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