राहुल और मोदी केरल में अब भी चुनावी मोड में हैं?

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- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बैंगलुरू से बीबीसी हिंदी के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का चुनावों के बाद केरल में एक ही दिन रहना कुछ अजीब सा था.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने वायनाड क्षेत्र के मतदाताओं का शुक्रिया अदा करने गए थे और प्रधानमंत्री मोदी गुरुवायुर मंदिर प्रार्थना करने गए थे. मोदी ने जब पहली मर्तबा गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए चुनावों में जीत दर्ज की थी, तब भी वो गुरुवायुर मंदिर आए थे.
लेकिन यहाँ हुए भाषणों से नहीं लगा कि लोकसभा चुनाव खत्म हो गए हैं. लोगों को संबोधित करते हुए दोनों नेताओं ने जो रुख़ अपनाया कम से कम वो तो ऐसा ही था.
वायनाड से चार लाख 31 हज़ार के बड़े अंतर से चुनाव जीते राहुल गांधी को उनके रोडशो में लोगों का भारी समर्थन दिखा. उनके भाषण का मलयालम में अनुवाद हुआ और तकरीबन हर वाक्य के बाद लोगों ने जमकर तालियां बजाई.
जब भी उन्होंने नरेंद्र मोदी की आलोचना की, लोगों ने तालियां पीटी.

राहुल ने कहा, "हम राष्ट्रीय स्तर पर ज़हर से मुक़ाबला कर रहे हैं. मोदीजी ज़हर इस्तेमाल कर रहे हैं. हाँ, मैं तीखा शब्द इस्तेमाल कर रहा हूँ, लेकिन मोदीजी ने दुश्मनी का ज़हर देश में फैलाया था, देश को बांटने के लिए. उन्होंने झूठ बोलकर चुनाव जीता है. कांग्रेस सच और प्रेम के साथ खड़ी है."
राहुल गांधी कलपेट्टा में कई प्रतिनिधि मंडलों से मिले और बाद में रोडशो के दौरान कहा, "मेरा काम पूरे वायनाड का प्रतिनिधित्व करना है. सभी वर्ग के लोगों ने चुनावों में मुझे समर्थन दिया है. वायनाड में कई बड़ी चुनौतियां और मुद्दे हैं. हम एकसाथ काम करेंगे और सब कुछ सुलझा देंगे. आप निश्चिंत रहिए कि आपकी आवाज़ संसद में उठाई जाएगी."
बदल गए हैं मोदी?
दूसरी ओर, मोदी के भाषण में अधिक गंभीरता थी और उन्होंने अपने नए नारे सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास को विस्तार से बताया.

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उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "कई पंडितों को मन में विचार आता होगा कि केरल में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला, फिर भी मोदी वहाँ जाकर धन्यवाद करने पहुँच गया, ये मोदी की सोच क्या है. कई लोगों के दिमाग़ में रहता होगा. लेकिन, हमारे संस्कार हैं, हमारी सोच है और हम इस मत के हैं कि लोकतंत्र में चुनाव अपनी जगह पर हैं, लेकिन चुनाव के बाद जीत कर आने वालों की जिम्मेदारी होती है 130 करोड़ नागरिकों की. जो हमें जिताते हैं, वो भी हमारे हैं, जो इस बार हमें जिताने में चूक गए हैं वे भी हमारे हैं. केरल भी मेरा उतना ही है, जितना मेरा बनारस है."
मोदी ने केरल के बीजेपी कार्यकर्ताओं का भी धन्यवाद किया. उन्होंने कहा, "बीजेपी के कार्यकर्ता ज़मीन पर केवल चुनावी सियासत नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे साल के 365 दिन लोगों की सेवा कर रहे हैं. हम सरकार बनाने के लिए सियासत में नहीं आए हैं, बल्कि हम राष्ट्र निर्माण के लिए यहाँ हैं."
चुनाव अभियान के दौरान राहुल गांधी ने कहा था कि वो वायनाड से इसलिए चुनाव लड़ रहे हैं क्योंकि मोदी सरकार में दक्षिण भारत के लोगों और समस्याओं के प्रति अपनापन नहीं था. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी की ये बात बहुत तीखी लगी और वो चुनाव जीतने के बाद केरल पहुँच गए.

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वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक जो सकारिया कहते हैं, "चुनाव के बाद मोदी बिल्कुल एक विजेता की तरह बात कर रहे हैं. वो सचमुच देश के प्रधानमंत्री जैसे बात कर रहे हैं. जो हमने उनके पहले कार्यकाल में नहीं देखा था. लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कुछ नई बात नहीं की है, वो फिर से पुरानी बातों को दोहरा रहे हैं."
तो लोकसभा चुनावों के बाद केरल की सियासत में क्या होगा?
इस सवाल के जवाब में जो सकारिया कहते हैं, "इन परिणामों ने ये साफ़ किया है कि बीजेपी केरल में मजबूत हुई है. उसने 16 प्रतिशत वोट लेकर अपनी जगह बना ली है. इसका मतलब ये हुआ कि अब यहां कांग्रेस और सीपीएम गठबंधन में आमने-सामने की टक्कर नहीं होगी, बल्कि अब यहाँ त्रिकोणीय मुक़ाबला होगा. और इन तीनों में से कोई भी जीत सकता है."
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