चुनाव आयोग ने 22 विपक्षी दलों की मांग को नकारा

चुनाव आयोग

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चुनाव आयोग ने वीवीपीएटी (वोटर वेरीफ़िएबल पेपर ऑडिट ट्रेल) पर 22 विपक्षी दलों के नेताओं की मांग को ख़ारिज कर दिया है.

विपक्षी पार्टियों की मांग थी कि चुनाव आयोग वीपीपीएटी पर्चियों का मिलान मतों की गिनती से पहले करे, न कि मतगणना के अंत में.

किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में किसी ख़ास लोकसभा क्षेत्र में सभी मतों का मिलान पर्चे से करने की मांग की गई थी.

तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग की विपक्षी पार्टियों की मांग पर बुधवार को अहम बैठक हुई और इसी बैठक में मांग को ख़ारिज कर दिया गया.

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मंगलवार को कांग्रेस के सीनियर नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग से मिलने के बाद कहा था कि उनकी मांगों को लेकर आयोग ने बहुत सकारात्मक रुख़ नहीं दिखाया.

इसी के साथ आयोग ने इस बात को दुहराया है कि एक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केंद्रों की वीवीपीएटी पर्चियों को मतगणना के बाद मिलान किया जाएगा.

उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा में बिना सुरक्षा के ईवीएम के परिवहन की ख़बरें आने के बाद विपक्ष सक्रिय हुआ.

ईवीएम

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इससे पहले, मतगणना में 100 फ़ीसदी वीवीपीएटी पर्चियों के मिलान की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने ही चुनाव आयोग से पांच बूथों पर पर्चियों के मिलान का आदेश दिया था.

बीजेपी छोड़ कर हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए दलित नेता उदित राज ने ट्वीट कर कहा, "सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहता है कि वीवीपीएटी की सारी पर्चियों का मिलान किया जाए. क्या वो भी धांधली में शामिल है."

गौरतलब है कि एक दिन पहले पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी एक बयान जारी कर ईवीएम की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि इनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग की है.

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर कार्यकर्ताओं से अगले 24 घंटे सतर्क रहने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ प्रशांत भूषण ने ट्वीट कर कहा है, "जब एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने ईवीएम की आवाजाही पर चिंता व्यक्त की है तो हम सभी को चिंता करनी चाहिए. इसीलिए वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान ज़रूरी है."

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