कैप्टन और सिद्धू का झगड़ा आख़िर किस बात पर

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- Author, रवि शर्मा
- पदनाम, चंडीगढ़ से, बीबीसी हिंदी के लिए
पंजाब में कांग्रेस के भीतर आपसी टकराव की बातें बीते कई दिनों से आ रही थीं. रविवार को इन बातों ने हल्की-सी चिंगारी का रूप ले लिया.
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके कैबिनेट में सहयोगी नवजोत सिंह सिद्धू के बीच का खिंचाव सामने आ ही गया.
अमरिंदर सिंह ने मान लिया कि सिद्धू की राजनीतिक महत्वाकांक्षा मुख्यमंत्री पद पर बैठने की है.
बहुत से लोग यह कहेंगे कि इसमें बुराई भी क्या है? राजनीति में प्यादे कब सिपहसालार और बादशाह बन जाएं, कहा नहीं जा सकता है.
सिद्धू तो पार्टी में आए ही सिपाहसालार से एक दर्ज़ा ऊपर थे.
कहीं न कहीं यह केंद्रीय नेतृत्व का सिद्धू पर भरोसा ही है जो उन्हें कैप्टन सरकार में मंत्री भर होने से कहीं अधिक होने का दम भरने का साहस दे रहा है.

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प्रचार से कन्नी काटते रहे सिद्धू
असल में सिद्धू ने राज्य स्तर पर पार्टी लाइन से हटकर अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का संकेत तभी दे दिया था जब उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर मामले में अमरिंदर सिंह से इत्तेफ़ाक़ रखने से इनकार कर दिया था.
मीडिया में उनके उस बयान की ख़ूब सुर्ख़ियाँ बनी थीं. सिद्धू ने करतारपुर कॉरिडोर मामले में अमरिंदर सिंह को अपना कैप्टन मानने से इनकार करते हुए कहा था कि 'उनका कैप्टन अमरिंदर नहीं बल्कि राहुल है'.
हालांकि अमरिंदर सिंह की ओर से उस मामले को तूल नहीं दिया गया था. कैप्टन ने यहां तक कह दिया था कि वे सिद्धू को बचपन से जानते हैं और वे समझते हैं कि सिद्धू के मन में पार्टी को लेकर कोई दुर्भावना नहीं है.
पर हालिया चुनावों में जो घटनाक्रम सामने आते गए उनसे दोनों नेताओं के बीच बढ़ती तल्ख़ी सामने आती गई.
चुनाव प्रचार के दौरान भी सिद्धू स्टार प्रचारक होने के बावजूद एक तरह से सीधे तौर पर प्रचार से कन्नी काटते दिखे.
उन्होंने गले में तकलीफ़ होने को मजबूरी बताया और चुनावी रैलियों में जाने से ख़ुद को बचाए रखा.

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पत्नी को दिलाना चाहते थे टिकट
हालांकि जब प्रियंका गांधी राजनीतिक प्रचार के लिए पंजाब दौरे पर आईं तो सिद्धू खुलकर प्रचार रैलियों को संबोधित करते दिखे.
अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की तल्ख़ी बढ़ने के पीछे सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर को चंडीगढ़ संसदीय क्षेत्र से टिकट न मिलना भी एक वजह माना जा रहा है.
सिद्धू चंडीगढ़ सीट से पवन कुमार बंसल को हटाकर अपनी पत्नी नवजोत कौर को टिकट दिलाना चाहते थे.
अपनी पत्नी को टिकट नहीं मिलने के लिए सिद्धू एक तरह से अमरिंदर सिंह को ही ज़िम्मेदार मानते हैं.
कैप्टन अमरिंदर सिंह हालांकि इस बारे में स्पष्टीकरण दे चुके हैं कि सिद्धू अच्छी तरह से जानते हैं कि टिकट देने या नहीं देने का निर्णय केंद्रीय नेतृत्व का है, लेकिन सिद्धू इस पर सहमत नहीं हैं.
रविवार को पटियाला जाने से पहले कैप्टन अमरिंदर ने पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धू को महत्वाकांक्षी बताया.

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अमरिंदर का हमला
हालांकि कैप्टन अमरिंदर ने इसे सीधे तौर पर पार्टी के स्तर पर अनुशासनहीनता माना लेकिन उन्होंने कहा कि अनुशासनहीनता पर कार्रवाई करना पार्टी हाई कमान का काम है.
अमरिंदर सिंह का कहना है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के प्रदर्शन के लिए सिद्धू ने ग़लत समय का चुनाव किया है. पंजाब के पटियाला से अमरिंदर सिंह की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री परनीत कौर भी चुनावी मैदान में हैं.
ऐसा बयान देकर चाहे अमरिंदर सिंह ने असुरक्षा की भावना जताई हो या सिद्धू की महत्वाकांक्षी योजना को पहले ही चरण में फुस्स कर देने की रणनीति रही हो. लेकिन दोनों के बीच चली आ रही यह खींचतान और केंद्रीय नेतृत्व का ढुलमुल रवैया बहुत से सवाल खड़े कर रहा है.
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