दिल्लीः ATM से 88 लोगों का इस गैंग ने यूं उड़ाया पैसा, सभी गिरफ़्तार

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दिल्ली के तिलक नगर इलाक़े में एटीएम से 88 लोगों के लाखों रुपये निकालने वाले गैंग को दिल्ली पुलिस ने गिरफ़्तार किया है. पुलिस ने बताया कि ये गैंग स्किमिंग के ज़रिए एटीएम कार्ड क्लोनिंग करके पूरी घटना को अंजाम दिया करता था.
पुलिस ने बताया कि दो एटीएम मशीनों के ज़रिए स्किमिंग को अंजाम दिया गया और दिल्ली ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों, यहां तक कि नेपाल से भी अपराधियों ने रुपए निकाले हैं.
दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चार लोगों के गिरफ़्तारी की जानकारी दी और बताया कि इन पैसों से इन्होंने एसयूवी ख़रीद रखी है, अच्छा घर बना रखा है, इसे ये अपनी लाइफ़स्टाइल पर खर्च करते थे.

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दिल्ली वेस्ट की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने इस घटना पर विस्तार से बताया, "पुलिस स्टेशन में 11 मई को 28 लोगों की शिकायतों के आधार पर एक केस दर्ज किया गया था कि उनके अकाउंट से अलग-अलग एटीएम से पैसे निकाले गए हैं. किसी ने फ़ोन करके ओटीपी भी नहीं लिया था. इसकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी. इसके बाद पुलिस ने अपनी तहक़ीक़ात में पाया कि तिलक नगर के दो एटीएम से सारे पैसे निकाले गए थे."
उन्होंने कहा, "हमने सीसीटीवी फ़ुटेज को खंगाला जहां हमें संदिग्धों की तस्वीरें मिल गईं. चूंकि यह थोड़ा तकनीकी काम था तो ज़रूरी था कि उन लोगों की भी तहक़ीक़ात की जाए जो पहले इस काम में लिप्त थे क्योंकि वो भी दोबारा इस तरह की हरकत में शामिल हो सकते हैं."

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कैसे करते थे स्किमिंग?
इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ़्तार किया है. मोनिका भारद्वाज ने बताया, "इसी क्रम में हमें एक गैंग का पता चला. फिर नजफ़गढ़ के रहने वाले धर्मेंद्र सैनी नाम के एक आदमी की पहचान की गई. पूछताछ के बाद उनके तीन अन्य साथियों को गिरफ़्तार किया गया. अब तक चार लोग गिरफ़्तार किए गए हैं. धर्मेंद्र सैनी के अलावा, उत्तम नगर के रहने वाले सिद्धार्थ गांधी, नजफ़गढ़ के सुनील कुमार और कन्हैया नगर के मयंक शुक्ला."
यह गैंग एटीएम में अंदर बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों पर एक स्प्रे करता था, जिसके बाद कैमरों पर कुछ स्पष्ट नहीं दिखाई पड़ता था.

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डीपीपी ने बताया, "मयंक शुक्ला को सिर्फ़ सीसीटीवी कैमरा पर स्प्रे करने के लिए रखा जाता था. सीसीटीवी कैमरा को स्प्रे करने के बाद अपनी स्किमिंग मशीन को लगा देते थे, इसके बाद आर्टिफिशियल कीपैड को भी लगा दिया जाता था.
उन्होंने कहा, "पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि ये जहां पर स्किमिंग मशीनें लगाते थे वहां से पैसे नहीं निकालते थे, बल्कि किसी दूसरी जगह से निकालते थे. ख़ास कर उन एटीएम को टारगेट करते थे, जहां पर गार्ड नहीं हैं."
"इन दोनों एटीएम में भी लगभग एक हफ़्ते के अंदर ही पैसे निकाले गये हैं. 88 लोगों के पैसे निकाले गए. यहां पर भी गार्ड्स नहीं थे."

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मोडस ऑपरेंडी
डीसीपी मोनिका ने विस्तार से बताया कि कैसे इस पूरी वारदात को अंजाम दिया जाता था.
उन्होंने कहा, "स्किमिंग मशीनें इन्होंने डार्क वेब से नहीं बल्कि नामी गिरामी वेबसाइट्स से ख़रीदी थीं. कार्ड रीडर के ऊपर उसे अजस्ट कर देते हैं. आम आदमी देख कर उसे संभवतः नहीं पहचान पाए लेकिन कार्ड यदि बाहर की तरफ़ ज़्यादा उभरी हुई है तो उसे इस पर ध्यान देना चाहिए."
उन्होंने कहा, "एटीएम मशीन के की-पैड पर अपना एक दूसरा की पैड लगाते थे ताकि आपके पासवर्ड का डेटा इनके पास आ जाए. मशीन में चिप्स लगी हुई हैं. इस पर डेटा सेव हो जाता था. पहले ये सारा डेटा ले लेते थे फिर प्लेन कार्ड पर उसे निकाल कर पैसे निकालने के लिए इस्तेमाल करते थे. प्लेन कार्ड भी ये ऑनलाइन वेबसाइट्स से ही ख़रीद रहे थे. डेटा कलेक्ट करने के बाद वहां लगी चिप्स को ये हटा लेते थे."
"88 लोगों की शिकायत आई है, इन्होंने टारगेट कई लोगों को कर रखा था. अंतरराज्यीय गिरोह है, पता चला है कि नेपाल और अन्य राज्यों में भी काफी पैसे निकाले गए हैं."

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"सिद्धार्थ गांधी और धर्मेंद सैनी की 20-20 मामलों में संलिप्तता है. चंडीगढ़, मुंबई और जयपुर में भी ये गिरफ़्तार हो चुके हैं. 2013 में पहली बार जयपुर में गिरफ़्तार हुए थे. 2018 में मुंबई पुलिस ने भी इन्हें गिरफ़्तार किया. यानी ये पेशेवर ठग हैं."
"अब तक कितने पैसे निकाले हैं इसकी जांच चल रही है. ऑनलाइन साइट्स पर इस तरह की मशीनों की बिक्री के संबंध में उन्हें दिल्ली पुलिस ज़रूर लिखेगी क्योंकि उनका कोई और इस्तेमाल तो है नहीं. इस तरह की धोखाधड़ी के लिए ही इस्तेमाल हो रही हैं, शायद इस तरह का सामान ऑनलाइन साइट्स पर नहीं बिकना चाहिए. जांच में हम इस बात का ध्यान रखेंगे."
"इन्होंने एसयूवी ख़रीद रखी है, अच्छा घर बना रखा है तो इस तरह से निकाले गए पैसों का ये अपनी लाइफ़स्टाइल पर खर्च करते थे."

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क्या होता है स्किमिंग?
स्किमिंग में एक छोटी डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है जिसे स्किमर कहते हैं. एटीएम ट्रांजेक्शन के दौरान कार्ड की डिटेल चुराने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है.
स्किमर लगे एटीएम में जैसे ही किसी ने कार्ड को मशीन में स्वाइप किया, स्किमर डिवाइस कार्ड की मैग्नेटिक चिप पर स्टोर जानकारी को कैप्चर कर लेता है. कार्ड का पिन और इसकी डिटेल स्टोर होने के बाद इसे एक प्लेन कार्ड पर ट्रांसफर किया जाता है और फिर उस क्लोन कार्ड के ज़रिए चीज़ों को ऑनलाइन या स्वाइप कर ख़रीदारी की जाती है.

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एटीएम में सुरक्षा के लिए क्या करें?
इस दौरान डीपीसी मोनिका भारद्वाज ने बताया कि आम लोगों को एटीएम से पैसे निकालने के समय कुछ एहतियात बरतना चाहिए.
डीसीपी मोनिका ने कहा, "जब कोई अपने एटीएम से पैसे निकालने जाता है. यदि उन्हें लगता है कि जो कार्ड आप मशीन में लगाते हैं, यदि उसका कुछ हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा बाहर निकला हुआ दिखे तो उस पर ध्यान दें और पुलिस को सूचित कर देना चाहिए. आपका की पैड कुछ ज़्यादा उभरा हुआ लगता है तो उसकी सूचना भी पुलिस को ज़रूर देनी चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति में वहां ज़रूर कुछ प्लांट किया गया है."
"ये दोनों एटीएम इसलिए निशाने पर थे क्योंकि इस पर कोई गार्ड नहीं था. लिहाजा बैंक से निवेदन है कि वो कोशिश करें कि ज़्यादा से ज़्यादा एटीएम मशीनों पर गार्ड्स रहें."
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