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मौत का रहस्य जानना था, जेएनयू छात्र ने दी जान: प्रेस रिव्यू
नवभारत टाइम्स के मुताबिक़ जेएनयू के अंदर लाइब्रेरी में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली. छात्र का शव एक कमरे के पंखे से लटका मिला. मरने से पहले छात्र ने एक प्रोफ़ेसर को ईमेल कर आत्महत्या के बारे में बता दिया था.
पंखे से लटकने के लिए लैंडलाइन टेलीफ़ोन के तार का इस्तेमाल किया गया था. घटना का पता शुक्रवार दोपहर को चला. मृतक छात्र एमए अंतिम वर्ष का छात्र था.
अख़बार ने दक्षिण पश्चिम ज़िले के डीसीपी देवेंद्र आर्य के हवाले से लिखा है कि छात्र का नाम ऋषि जे. थॉमस था. उन्होंने बताया कि मरने से पहले छात्र ने एक प्रोफ़ेसर को स्यूसाइड नोट के रूप में एक ईमेल किया था. मेल में थॉमस ने लिखा था, "बड़े दिनों से चाह है मौत को फिजिकल फ़ॉर्म में देखने की."
अख़बार ने कहा है कि पुलिस को लगता है कि थॉमस मौत के रहस्य को जानने के लिए उत्सुक थे. शायद वह जानना चाहते थे कि आख़िर आदमी कैसे मरता है और मौत कैसे आती है?
गांधी को बताया पाकिस्तान का राष्ट्रपिता
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक भोपाल से बीजेपी उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर के नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान के एक दिन बाद ही मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता अनिल सौमित्र ने महात्मा गांधी पर विवादित टिप्पणी कर दी है.
सौमित्र ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिये महात्मा गांधी को पाकिस्तान का राष्ट्रपिता बता दिया. साथ ही उन्होंने लिखा कि भारत में उनके जैसे करोड़ों पुत्र हुए, कुछ लायक तो कुछ नालायक.
हालाँकि बीजेपी नेता ने फ़ेसबुक पोस्ट के माध्यम से ये भी कहा कि ये उनके निजी विचार हैं और इनका पार्टी से लेना-देना नहीं है.
इसके बाद, बीजेपी ने सौमित्र को पार्टी की सदस्यता से निलंबित कर दिया और इसे अनुशासनहीनता मानते हुए जवाब मांगा है.
'बसपा, सपा, तृणमूल नहीं जाएंगे बीजेपी के साथ'
द हिंदू के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि बसपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस और तेलुगूदेशम पार्टी जैसी पार्टियां विचारधारा के तौर पर एक साथ हैं और बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन नहीं करेंगी.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने नेतृत्व के सवाल को टाल दिया और कहा कि 23 मई को भारत के लोग तय करेंगे कि कौन देश का नेतृत्व करेगा अभी से धैर्य खोने की कोई ज़रूरत नहीं है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने विपक्ष की अपनी भूमिका को बख़ूबी निभाया है. उन्होंने चुनाव आयोग पर निष्पक्ष नहीं रहने का आरोप भी लगाया.
एनसीईआरटी करेगा समीक्षा
एनसीईआरटी 14 साल बाद करिकुलम दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगा.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक एनसीईआरटी नई ज़रूरतों के मुताबिक कुछ बदलाव कर सकता है.
साल 1975, 1988, 2000 और 2005 में जारी किए गए पिछले चार एनसीएफ में शिक्षकों से छात्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया ताकि 'बिना किसी बोझ के साथ सीखने' को सुनिश्चित किया जा सके.
अख़बार ने एनसीईआरटी निदेशक के हवाले से कहा कि पाठ्यपुस्तकों के युक्तिकरण पर जो काम किया है, वह 2005 NCF की समीक्षा का आधार बनेगा. साथ ही कहा कि उनका फ़ोकस 'एक्सपेरिमेंटल लर्निंग' पर है.
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