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बांग्लादेशी सितारे कर रहे भारत में चुनाव प्रचार, बवाल
- Author, शुभज्योति घोष
- पदनाम, बीबीसी बांग्ला
पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव प्रचार में बांग्लादेश के दो फ़िल्म अभिनेताओं को उतारकर तृणमूल कांग्रेस ने राजनीतिक बवाल खड़ा कर दिया है.
इनमें से एक एक्टर फिरदौस अहमद भारत सरकार के आदेश के बाद पहले ही भारत छोड़कर जा चुके हैं. दूसरे बांग्लादेशी एक्टर ग़ाज़ी नूर को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है.
पिछले रविवार को पश्चिम बंगाल के रायगंज लोकसभा क्षेत्र में बांग्लादेश के लोकप्रिय अभिनेता फिरदौस अहमद को टॉलीवुड (बंगाली फ़िल्म उद्योग) के दूसरे सितारों के साथ एक रोड शो में देखा गया था.
फिरदौस अहमद रायगंज से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार कन्हैया लाल अग्रवाल के वोट मांग रहे थे.
इस रोड शो की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद भाजपा ने चुनाव आयोग के दफ़्तर में आपत्ति दर्ज कराई थी.
ध्रुवीकरण का आरोप
भाजपा का कहना है कि रायगंज लोकसभा क्षेत्र में 50 फीसदी से भी ज़्यादा मतदाता मुस्लिम समुदाय के हैं. क्योंकि रायगंज बांग्लादेश से लगा हुआ है, इसलिए मुस्लिम मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए बांग्लादेशी अभिनेताओं को यहां प्रचार के लिए लाया गया था.
रायगंज से भाजपा के उम्मीदवार देवश्री चौधरी पार्टी की राज्य इकाई के महासचिव भी हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "हमने याचिका में निर्वाचन आयोग से कहा है कि फिरदौस अहमद किस किस्म के वीज़ा पर भारत आकर चुनाव प्रचार कर रहे थे. ये सीधा-सीधा संविधान के ख़िलाफ़ है."
बीजेपी की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने इस पूरे मामले पर तंज करते हुए कहा, "आज दीदी बांग्लादेशी को लेकर चुनाव प्रचार कर रही हैं. कल वे पाकिस्तान से इमरान ख़ान को लाकर चुनाव प्रचार करेंगी क्या?"
फिरदौस अहमद की घटना के बाद तृणमूल कांग्रेस के नेता भी इस मसले पर सार्वजनिक तौर पर कुछ कहने से बच रहे हैं.
बीबीसी ने रायगंज में तृणमूल के उम्मीदवार कन्हैयालाल अग्रवाल ने फिरदौस के मामले पर बात करने की कोशिश की.
फिरदौस अहमद का नाम सुनते ही कन्हैयालाल अग्रवाल ने कहा कि मुझे इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
शूटिंग के वीज़ा पर चुनाव प्रचार?
उन्होंने कहा, "चुनाव नज़दीक है और मेरे पास वक़्त की किल्लत है. अपना चुनाव प्रचार मैं खुद देखता हूं और मुझे फिल्मी सितारों को प्रचार के लिए लाने की कभी ज़रूरत नहीं पड़ी. इस बार भी ऐसी कोई ज़रूरत नहीं है."
लेकिन सोशल मीडिया में फिरदौस के साथ कन्हैयालाल की तस्वीरें देखी जा सकती हैं. हालांकि कन्हैयालाल इससे इनकार करते हैं.
इस दौरान भारत के गृह मंत्रालय ने एफ़आरआरओ (फ़ॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन रीजनल ऑफ़िस) से इस बाबत रिपोर्ट मांगी कि क्या फिरदौस अहमद ने अपनी वीज़ा शर्तों का उल्लंघन भी किया था.
जब ये बात सामने आई कि फिरदौस अहमद फ़िल्म की शूटिंग के नाम पर वीज़ा लेकर भारत आए थे तो उन्हें फौरन भारत छोड़ने का आदेश दिया गया और इसके बाद फिरदौस अहमद देश छोड़कर चले भी गए.
फिरदौस अहमद बांग्ला फ़िल्म उद्योग के उन सितारों में से हैं जिनकी शोहरत बांग्लादेश से लेकर पश्चिम बंगाल तक है. यहां तक कि फिरदौस ने अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत टॉलीवुड से ही की थी.
इस मामले के प्रकाश में आने के बाद फिरदौस ने अपनी प्रतिक्रिया में कुछ नहीं कहा है. न तो वे भारत में ही कुछ बोले और न ही बांग्लादेश जाकर कोई प्रतिक्रिया दी.
फिरदौस अहमद का मामला थमा भी नहीं था कि पश्चिम बंगाल के दमदम लोकसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार में एक और बांग्लादेशी अभिनेता की मौजूदगी से बवाल खड़ा हो गया.
दमदम में ग़ाज़ी नूर
ये बांग्लादेशी अभिनेता हैं ग़ाज़ी नूर. बांग्ला धारावाहिक रानी रासमणि में अपने किरदार से ग़ाज़ी नूर पश्चिम बंगाल में खासे मशहूर हैं.
उनको दमदम में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार स्वागत राय के प्रचार में देखा गया.
बीजेपी ने इस मामले की भी निर्वाचन आयोग के समक्ष आपत्ति जताई है.
दमदम में इस चुनाव प्रचार में ग़ाज़ी नूर के साथ मौजूद रहे तृणमूल नेता मदन मित्रा ने सफाई देते हुए कहा कि बांग्लादेश के साथ हमारा रिश्ता कोई आज का नहीं है.
1971 की लड़ाई में हमने उनका साथ दिया था. बांग्लादेशी सितारे अगर पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार करें तो इसमें कोई बुराई नहीं है.
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