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बिहार की वो सीट जहां एनडीए के 'असली-नकली' उम्मीदवार हैं आमने-सामने
- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, बांका से, बीबीसी हिन्दी के लिए
बिहार में यूँ तो इस बार के आम चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है लेकिन बांका लोकसभा सीट उन चंद सीटों में से है, जहां मुक़ाबला त्रिकोणीय है.
बांका में निर्दलीय प्रत्याशी और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी के चुनाव मैदान में आ जाने से ऐसा हुआ है.
सबसे दिलचस्प बात यह कि जेडी (यू) प्रत्याशी विधायक गिरिधारी यादव जहाँ एक ओर एनडीए के घोषित उम्मीदवार हैं तो वहीं पुतुल कुमारी खुद को 'एनडीए का असली कैंडिडेट' बता रही हैं.
दोनों उम्मीदवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं. यहां से महागठबंधन ने राजद प्रत्याशी और सांसद जयप्रकाश नारायण यादव को फिर से टिकट दिया है.
इस बार चुनाव मैदान में उतरे तीनों ही प्रत्याशी बांका से सांसद रह चुके हैं. बीते लोकसभा चुनाव में पुतुल कुमारी दस हजार मतों के अंतर से जयप्रकाश नारायण यादव से हारी थीं.
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'एनडीए की असली कैंडिडेट'
बिहार एनडीए में हुए सीट शेयरिंग में बांका की सीट जदयू के खाते में गई और इस तरह 2014 में भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने वाली पुतुल कुमारी बेटिकट हो गईं.
इसके बाद पुतुल ने निर्दलीय प्रत्याशी बनने के फैसला किया. वो कहती हैं, "निर्दलीय लड़ने के लिए हमलोग बिल्कुल भी तैयार नहीं थे. स्थितियाँ ऐसी बनी कि ये फैसला लेना पड़ा. पार्टी (भाजपा) का दवाब था कि मैं चुनाव न लडूं क्योंकि यहाँ से गठबंधन के प्रत्याशी मैदान में हैं. ऐसे में पार्टी को असहज स्थिति से बचाने के लिए मैंने इस्तीफ़ा दे दिया."
"लोगों में इस बात का आक्रोश है कि इनके साथ ग़लत हुआ है. सब लोगों को लगता था कि एनडीए की कैंडिडेट मैं ही हो सकती थी और अब सहज तौर से लोग मुझे ही एनडीए का कैंडिडेट मान रहे हैं. लोगों में कहीं कोई कन्फ्यूज़न नहीं है. सब कह रहे हैं कि हम असली उम्मीदवार को समर्थन दे रहे हैं."
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'नरेन्द्र मोदी मजबूत प्रधानमंत्री'
अगर आप खुद को एनडीए का असली कैंडिडेट बता रही हैं तो क्या आप सर्जिकल स्ट्राइक और नरेन्द्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यों के आधार पर समर्थन भी मांग रही हैं?
इस सवाल के जवाब में पुतुल कहती हैं, "दुनिया जानती है कि वे मज़बूत प्रधानमंत्री हैं. हमने लोगों के बीच उज्ज्वला चूल्हा शिविर लगा लगा कर बंटवाया था. मेरा चुनाव चिन्ह भी गैस सिलिंडर है."
क्या जीतने के बाद उनका समर्थन नरेंद्र मोदी को मिलेगा, इस सवाल के जवाब में पहले तो उन्होंने छूटते हुए कहा कि बिल्कुल हम समर्थन देंगे. मगर फिर उन्होंने अपने जवाब बदलते हुए कहा कि ये बाद की कहानी है और काउंटिंग होने के बाद ही इस पर बात होगी.
कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली अंतरराष्ट्रीय शूटर और अर्जुन पुरस्कार प्राप्त श्रेयसी सिंह पुतुल कुमारी की छोटी बेटी हैं. वह बीते कुछ हफ़्तों से लगातार अपनी मां के लिए चुनाव प्रचार कर रही हैं.
नरेन्द्र मोदी के समर्थन से जुड़े सवाल का जवाब वह अपनी मां के मुकाबले ज्यादा खुल कर देती हैं. उन्होंने कहा, "भाजपा का संगठन खड़ा करने में सत्तर फीसदी भूमिका पुतुल कुमारी की है."
"इस कारण भाजपा के बहुत सारे लोग यह सीट जदयू को दिए जाने के कारण खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं और वो पुतुल कुमारी को सपोर्ट कर भाजपा का समर्थन कर रहे हैं. और उन्हें यकीन है कि प्रधानमंत्री पद के लिए समर्थन की बात पर हम भाजपा में वापस लौट जायेंगे."
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दोनों को भाया 'ठीक है' गाना
एनडीए के 'असली' कैंडिडेट होने के अपने-अपने दावों के बीच गिरिधारी यादव और पुतुल कुमारी के बीच एक और दावा चुनाव प्रचार से जुड़े पैरोडी गानों में भी दिखाई देता है.
दोनों उम्मीदवारों ने हाल के दिनों में मशहूर हुए 'ठीक है' गाने की तर्ज़ पर अपने-अपने प्रचार गीत तैयार करवाए हैं. दोनों ही उम्मीदवार इस गाने के ज़रिए अपनी उम्मीदवारी जता रहे हैं.
पुतुल कुमारी के प्रचार गीत के बोल कुछ इस तरह से हैं, "गैस सिलिंडर छाप पर हमलोग बटन दबाएंगे... ठीक है... पुतुल कुमारी को ही इस बार हमलोग एमपी बनाएंगे.... ठीक है.."
वहीं गिरधारी यादव कुछ इस अंदाज़ में समर्थन मांग रहे हैं, "हाथ से हाथ मिला के अपने कदम को आगे बढ़ाएंगे... ठीक है... तीर छाप पर बटन दबाएंगे गिरधारी जी को जिताएंगे... ठीक है..."
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'राजद और पुतुल कुमारी के बीच मिलीकुश्ती है'
जदयू प्रत्याशी गिरिधारी यादव प्रधानमंत्री की सफल विदेश और रक्षा नीति और उनके गरीबी मिटने के कार्यों के आधार पर जनता से एक बार फिर से अपने लिए समर्थन मांग रहे हैं.
हाल के वर्षों में बेरोजगारी बढ़ने की बात कहकर विपक्ष नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल करता रहता है. इस संबंध में गिरधारी यादव कहते हैं, "जब तक आबादी पर नियंत्रण नहीं होगा इस देश में बेरोजगारी की समस्या रहेगी. इस मसले पर सारे दलों को मिलकर काम करना चाहिए."
जबकि एनडीए का 'असली' कैंडिडेट होने के दावों पर उन्होंने कहा, "नरेंद्र मोदी जी का कोई कैसे तीसरा आदमी हो जायेगा. जो अधिकृत है वही न एनडीए का उम्मीदवार होगा. उनको (पुतुल कुमारी) तो तेजस्वी कैंडिडेट बना रहे हैं. जब तेजस्वी जी भाषण में कहते हैं कि एनडीए की कैंडिडेट पुतुल कुमारी हैं और पुतुल कुमारी कहती हैं कि हमारी लड़ाई राजद से है तो इस बात से ही साफ़ समझ आ जाता है कि यह दोनों के बीच की मिलीकुश्ती है."
"तेजस्वी अपना टिकट ठीक से बाँट नहीं पाए और वे बांका की सभाओं में एनडीए का टिकट बाँट रहे हैं. हमारी लड़ाई किसी से नहीं है. जीत का मार्जिन बहुत बड़ा होगा. उन दोनों के बीच दूसरे और तीसरे नंबर के बीच की लड़ाई है."
वहीं राजद प्रत्याशी और वर्तमान सांसद जयप्रकाश नारायण यादव का कहना है, "इस बार दो एनडीए उम्मीदवार चुनाव लड़ रहा है और इस कारण मुकाबला करने वाला अपने में टकरा कर बर्बाद हो रहा है."
हालाँकि वे पुतुल कुमारी को ही असली एनडीए उम्मीदवार मानते हैं. उन्होंने कहा, "जिनको एनडीए का सिंबल नहीं मिला है वो असली है. एनडीए का बेस वोट जो एनडीए नहीं है वहां चला गया. रियल एनडीए अब डमी बन गए हैं क्योंकि उनका बेस वोट तो है नहीं."
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मुक़ाबला
पुतुल कुमारी के चुनाव मैदान में उतरने से ज़मीन पर एनडीए मतों में बिखराव होने के झलक दिखाई दे रही रही है. आम तौर पर शहरी मतदाताओं का बड़ा हिस्सा भाजपा या कहें कि एनडीए समर्थक माना जाता है लेकिन बांका शहर में इस मतदाता वर्ग में बिखराव दिखाई दे रहा है.
निजी बातचीत से लाकर चाय की दुकानों पर होने वाली बहसों में यह बात सामने आ रही है.
बांका पहुँचने पर जब मैंने एक शख्स से पुतुल कुमारी के चुनाव कार्यालय का पता भर पूछा तो उन्होंने छूटते हुए कहा, "बहुत सही कैंडिडेट का नाम लिया है आपने. इस बार उनको ही वोट जायेगा."
इस अप्रत्याशित टिप्पणी से जब मैंने उनका तार्रुफ़ पूछा तो उन्होंने अपना परिचय विजयनगर मोहल्ले में रहने वाले मनोज सिंह के रूप में दिया. मनोज ने आगे बातचीत में नरेंद्र मोदी की खुल कर तारीफ भी की.
वहीं शहर के आज़ाद चौक में सैलून चलाने वाले सुरेश कुमार मोदी को मज़बूत नेता और दूसरे नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्रियों को कमतर मानते हैं. साथ ही उनका यह भी कहना है कि जब पुतुल कुमारी ने भाजपा से इस्तीफ़ा ही दे दिया है तो अब उनको भाजपा समर्थकों का वोट कैसे मिलेगा.
बांका लोकसभा सीट पर बीते कुछ चुनावों में बहुत कम वोटों के अंतर से हार-जीत का फैसला होता रहा है.
एनडीए का 'असली कैंडिडेट' होने के दावों के बीच इस बार यहाँ का मुकाबला न केवल त्रिकोणीय और रोचक हो गया है बल्कि यह भी माना जा रहा है कि इस बार यहां बहुत क़रीबी मुक़ाबला होगा.
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