मोदी को फिर पीएम क्यों देखना चाहते हैं इमरान ख़ान

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने बीबीसी से कहा कि कश्मीर के विवादित इलाक़े को लेकर भारत के साथ शांति, इस पूरे इलाक़े के लिए 'बहुत महत्वपूर्ण' बात होगी.
क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान ख़ान आठ महीने पहले प्रधानमंत्री बने हैं. उन्होंने कहा कि परमाणु शक्ति सम्पन्न पड़ोसी आपसी मतभेदों को केवल बातचीत से ही हल कर सकते हैं.
इमरान ख़ान का ये बयान ऐसे समय आया है जब भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा की घटना के कुछ हफ़्ते बाद ही भारत में आम चुनाव होने जा रहे हैं.
पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों पर एक आत्मघाती हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एक कथित चरमपंथी कैंप पर हवाई हमला किया था.
ये पूछने पर कि भारत के प्रधानमंत्री और उनके देश को वो क्या संदेश देना चाहते हैं, इमरान ख़ान ने बीबीसी के जॉन सिम्पसन से कहा कि "कश्मीर मुद्दे को हल करना होगा और इस मुद्दे को लंबे समय तक ज्वलंत नहीं बनाए रखा जा सकता."
उन्होंने कहा, "दोनों सरकारों का पहला काम है कि हम ग़रीबी को कैसे कम करने जा रहे हैं और ग़रीबी को कम करने का रास्ता है कि हम आपसी मतभेदों को वार्ता के ज़रिए हल करें और एक ही मतभेद है, वो है कश्मीर."
भारत के प्रधानमंत्री ने अपने चुनाव प्रचार अभियान में पाकिस्तान विरोधी बयानबाज़ियों का सहारा लिया और राष्ट्रीय सुरक्षा पर ज़ोर दिया है.
कई लोगों को लगता है कि यह चुनाव, हिंदू राष्ट्रवादी बीजेपी की ध्रुवीकरण की राजनीति पर जनमत-संग्रह जैसा है.
गुरुवार को मतदान शुरू हो रहा है और मई में आख़िरी चरण का मतदान होगा.
'ग़ैरज़िम्मेदराना'
इमरान ख़ान दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव के ख़तरों को लेकर भी बोले. उन्होंने कहा, "एक बार जवाबी कार्रवाई करते हैं तो कोई नहीं कह सकता कि ये आगे कहां तक जाएगा."
उन्होंने कहा कि अगर भारत फिर से आता है और पाकिस्तान पर हमला बोलता है तो पाकिस्तान के पास जवाबी कार्रवाई करने के सिवाय कोई चारा नहीं बचता.
"उस स्थिति में जब दोनों देशों परमाणु शक्ति सम्पन्न हैं, मुझे लगा था कि ये बिल्कुल ग़ैरज़िम्मेदाराना रवैया था."
चुनाव के मौके पर दोस्ती का हाथ
बीबीसी वर्ड अफ़ेयर्स एडिटर जॉन सिम्पसन के अनुसार, आठ महीने के अपने कार्यकाल में इमरान ख़ान ने बहुत कम साक्षात्कार दिए हैं. इसलिए जब उन्होंने बीबीसी और ब्रिटिश और अमरीकी समाचार संस्थानों के एक छोटे से समूह को मिलने के लिए बुलाया तो उनका मक़सद था भारत को आम चुनावों के पहले एक संदेश देना.
वो दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे थे, "आईए अपनी एक जैसी समस्याओं को हल करने के लिए मिल कर काम करें."
सच्चाई ये है कि इमरान ख़ान माहौल को हल्का करने की ज़रूरत महसूस करते हैं.

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पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर में है. भारत के साथ तनावपूर्ण रिश्ते और पाकिस्तान पर अपने इलाक़े में चरमपंथी इस्लामी ग्रुपों को खुली छूट देने के आरोपों के कारण विदेशी निवेशक दूर हो गए हैं.
हालांकि इमरान ख़ान ज़ोर देकर इन आरोपों से इनकार करते हैं.
उनका दावा है कि पहले की किसी भी पाकिस्तनी सरकार ने चरमपंथी समूहों पर इतनी कार्रवाई नहीं की है.
उनके लिए हर चीज़ कश्मीर की समस्या के समाधान पर निर्भर करती है.
वो कहते हैं कि अगर भारत और पाकिस्तान इसका कोई हल ढूंढ सकते हैं, तो बाक़ी सारी चीज़ें आसानी से हल हो सकती हैं.

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कश्मीर को लेकर तनाव क्यों है?
भारत और पाकिस्तान दोनों मुस्लिम बहुत कश्मीर के पूरे हिस्से पर दावा करते हैं लेकिन दोनों का नियंत्रण कुछ हिस्सों पर ही है.
दोनों पड़ोसियों के बीच दो युद्ध हो चुके हैं.
2003 में दोनों पक्ष नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर युद्धविराम पर सहमत हुए थे, लेकिन अंदरूनी अशांति क़ायम रही.
भारत प्रशासित कश्मीर में रहने वाले बहुत से लोगों में भारतीय शासन को लेकर असंतोष है और दिल्ली लंबे समय से पाकिस्तान पर अलगाववादी चरमपंथियों को समर्थन देने का आरोप लगाती रही है.
बड़े पैमाने पर बेरोज़ग़ारी और सुरक्षा बलों की ओर मानवाधिकार उल्लंघन की शिकायतों ने भी आंतरिक तनावों को बढ़ाया है और विद्रोह को हवा दी है.
इस साल संबंधों में तनाव की क्या वजह है?
बीती फ़रवरी में भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में बीएसएफ़ के 40 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई थी.
दावा किया गया है कि इसके पीछे पाकिस्तान में पनाह लेने वाले चरमपंथियों का हाथ है.
पिछले कई दशकों में ये अपनी तरह का सबसे घातक हमला था और भारत ने कहा कि इस हमले में पाकिस्तानी सरकार का हाथ है.

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इसके जवाब में भारत ने हवाई हमला किया और दावा किया कि पाकिस्तान के इलाक़े में चरमपंथियों के ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया गया.
इस कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान ने भार के एक लड़ाकू विमान को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मार गिराया.
विमान का पॉयलट ज़िंदा पकड़ा गया, लेकिन उसे सुरक्षित भारत को लौटा दिया गया.
इमरान ख़ान ने इसे 'शांति का संदेश' कहा था.
उसके बाद से तनाव कुछ कम हुआ, लेकिन इस सप्ताह के शुरुआत में पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भारत पर एक और सैन्य कार्रवाई करने की योजना बनाने का आरोप लगाया.
भारत ने पाकिस्तान पर 'इस इलाक़े में युद्ध का माहौल बनाने की चाल' बताते हुए इस दावे को ख़ारिज कर दिया था.

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इमरान ख़ान ने और क्या कहा?
इमरान ख़ान ने मंगलवार को रॉयटर्स समाचार एजेंसी से भी बात की. उस साक्षात्कार में उन्होंने मोदी फिर से चुने जाने पर शांति की बेहतर संभावना जताई थी.
उन्होंने कहा था, "शायद अगर बीजेपी, जोकि एक दक्षिणपंथी पार्टी है, जीतती है तो कश्मीर में किसी प्रकार का समझौता हो सकता है."
उनका कहना था कि अन्य पार्टियां दक्षिणपंथियों की आलोचना के डर से किसी समझौते पर पहुंचने से हिचक सकती हैं.
बीबीसी के साक्षात्कार में इमरान ख़ान ने आसिया बीबी के मामले पर भी अपनी राय रखी.
ये एक हाई प्रोफ़ाइल मामला है जिसमें एक इसाई महिला पर ईशनिंदा का मामला चल रहा है.
जनवरी में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने आसिया बीबी की मौत की सज़ा को ख़ारिज़ कर दिया था, लेकिन उन्हें पाकिस्तान छोड़ना है.
इमरान ख़ान ने बीबीसी को बताया कि वो जल्द ही देश छोड़ देंगी.
उऩ्होंने कहा, "इसमें थोड़ी जटिलता है. और मैं इस बारे में मीडिया में नहीं बोल सकता हूं. लेकिन मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि वो सुरक्षित हैं और कुछ हफ़्तों में वो देश से चली जाएंगी."
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