फ़ेसबुक पर विज्ञापन में बीजेपी सबसे आगेः आज की पांच बड़ी ख़बरें

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फ़ेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापनों का ख़र्च 10 करोड़ के पार पहुंच गया है. ये ख़र्च इस साल फ़रवरी और मार्च के बीच का है.
फ़ेसबुक एड लाइब्रेरी रिपोर्ट के अनुसार इस साल फ़रवरी और 30 मार्च के बीच 51,810 राजनीतिक विज्ञापनों पर 10.30 करोड़ रूपये से ज़्यादा ख़र्च किए गए हैं.
इसमें बीजेपी और उसके समर्थक विज्ञापनों पर बड़ा हिस्सा ख़र्च कर रहे हैं. फेसबुक ने कहा है कि ये विज्ञापन राजनीति और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों से संबंधित हैं. बीजेपी ने क़रीब 1100 विज्ञापनों पर 36.2 लाख रूपये ख़र्च किए हैं.
इसके मुक़ाबले कांग्रेस ने 410 विज्ञापन दिए और उन पर 5.91 लाख रूपये ख़र्च किए गए. वहीं, बीजू जनता दल ने विज्ञापनों पर 8.56 लाख रूपये, तेलुगू देशम पार्टी ने 1.58 लाख रूपये और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने क़रीब 58 हज़ार रूपये ख़र्च किए हैं.

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भाजपा का घोषणा पत्र आज होगा जारी
लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी सोमवार को अपना घोषणापत्र जारी करेगी.
पार्टी इसे संकल्पपत्र का नाम दे रही है. 11 अप्रैल को पहले चरण के मतदान से तीन दिन पहले इसे नई दिल्ली में जारी किया जाएगा.
कांग्रेस ने पहले ही अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है. रविवार को कांग्रेस ने अपना चुनावी अभियान 'अब होगा न्याय' शुरू किया है.

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उर्मिला के ख़िलाफ़ मामला दर्ज
भाजपा के एक कार्यकर्ता ने अभिनेत्री और मुंबई उत्तर से कांग्रेस उम्मीदवार उर्मिला मातोंडकर पर हिंदू-विरोधी टिप्प्णी करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.
बीजेपी कार्यकर्ता सुरेश नखुआ ने शिकायत में कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कथित तौर पर उर्मिला को यह टिप्पणी करने का निर्देश दिया था.
उर्मिला ने अपने एक टीवी इंटरव्यू में हिंदू को दुनिया का सबसे हिंसक धर्म कहा था.
पोवई पुलिस थाने के एक अधिकारी का कहना है कि उन्हें इस बारे में शिकायत मिली है और वो आगे कार्रवाई करेंगे.
वहीं उर्मिला ने अपने ऊपर लगे आरोपों को "झूठा, निराधार और ग़लत" बताया है.

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चुनाव आयोग ने वित्र मंत्रालय को दी हिदायत
चुनाव आयोग ने वित्त मंत्रालय को हिदायत दी है कि चुनाव के समय प्रवर्तन एजेंसियां अपनी कार्रवाई निष्पक्ष और गैर भेदभावपूर्व रखे.
आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और राजस्व ख़ुफ़िया निदेशालय वित्त मंत्रालय के अधीन है.
केंद्रीय राजस्व सचिव को लिखे पत्र में आयोग ने कहा कि चुनाव के दौरान की जाने वाली कार्रवाई तटस्थ होनी चाहिए.

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लीबिया में चल रहे संघर्षों में 20 से ज़्यादा की मौत
लीबिया की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के अनुसार राजधानी त्रिपोली में चार दिनों से चल रहे संघर्ष में 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है.
लीबिया में विद्रोही सेनाओं और सरकार के समर्थक सशस्त्र गुटों के बीच झड़पें चल रही हैं. सशस्त्र विद्रोही बलों के नेता जनरल ख़लीफ़ा हफ़्तार ने विद्रोही सेना को राजधानी त्रिपोली की ओर बढ़ने का आदेश दिया था.
जिसके बाद मौजूदा सरकार ने भी विद्रोहियों को रोकने के लिए सेना को भेजा था. संयुक्त राष्ट्र लगातार दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है. लीबिया में संयुक्त राष्ट्र मिशन ने रविवार को दो घंटे के संघर्षविराम की अपील भी की थी जिससे नज़रअंदाज़ कर दिया गया.
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के वालिद अलहूदेरी ने बीबीसी को बताया कि त्रिपोली में हालात बेहद नाज़ुक हो चुके हैं, "ये लीबिया का सबसे बड़ा शहर है. यहां पर 30 लाख लोग रहते हैं. यहां पर हालात उस स्तर तक बिगड़ गए हैं, जहां पर ख़ूनी, गृह युद्ध की स्थिति आ जाएगी. जिससे अभी तक किए गए सारे प्रयास असफल हो जाएंगे."
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