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पूंजीवाद अब तक के सबसे गंभीर संकट में है: रघुराम राजन
भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चेतावनी दी है कि पूंजीवाद का लाभ आम लोगों को मिलना अब बंद हो रहा है इस कारण अब "ख़तरे में है".
बीबीसी रेडियो 4 के मंगलवार के कार्यक्रम में राजन में कहा, "जब कभी ऐसा होता है तो लोग पूंजीवाद के ख़िलाफ़ क्रांति करते हैं."
उनका कहना था कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था के बारे में विचार करते वक़्त सामाज में व्याप्त असमानता की अनदेखी नहीं कर सकती.
रघुराम राजन भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में प्रमुख अर्थशास्त्री रह चुके हैं. कई लोगों का मानना था कि वो बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के गवर्नर मार्क कार्ने के बाद गवर्नर का पदभार संभाल सकते हैं. फ़िलहाल वो शिकागो विश्वविद्यालय में बतौर प्रोफ़ेसर काम कर रहे हैं.
रघुराम राजन ने बीबीसी से कहा, "मेरा मानना है कि पूंजावाद ख़तरे में है क्योंकि अब आम लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. जब कभी ऐसा होता है तो लोग विद्रोह करते हैं."
राजन ने कहा "साधारण शिक्षा" पाए किसी मध्यवर्गीय युवा का पहले नौकरी ढूंढना आसान था. लेकिन 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद हालात बदले हैं और अब ऐसा होना लगभग असंभव है.''
उन्होंने कहा, "अब अगर आप सफल होना चाहते हैं तो आपको वाक़ई में बढ़िया शिक्षा चाहिए."
"ये दुर्भाग्य की बात है कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था और वैश्विक सूचना व्यवस्था का असर जिन समुदायों पर पड़ा, वही समुदाय थे जिनके लिए शिक्षा व्यवस्था बिगड़ती गई, जिनमें अपराध बढ़ता गया और सामाजिक बीमारियां भी बढ़ती गईं. ये समुदाय अपने लोगों को आने वाली वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तैयार नहीं कर पाया."
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक आर्थिक संटक के बाद से दुनिया भर में क़र्ज़ 50 फ़ीसद बढ़ा है और इसके साथ वैश्विक तौर पर उधार लेने वाली व्यवस्था में गिरावट आशंका है.
इस रिपोर्ट के अनुसार 2008 के बाद से देश की सरकारों पर क़र्ज़ 77 फ़ीसदी बढ़ा है जबकि कंपनियों पर क़र्ज़ 51 फ़ीसदी तक बढ़ा है.
हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि आने वाला वैश्विक आर्थिक संकट साल 2008 वाले संकट की तुलना में कम गंभीर होगा.
संतुलन कैसेबनाया जाए?
रघुराम राजन का मानना है कि पूंजीवाद लड़खड़ा रहा है क्योंकि ये सभी को समान मौक़े देने में नाकाम रहा है.
उन्होंने कहा, "सभी को पूंजीवाद ने समान मौक़े नहीं दिए और सच कहें तो जो लोग इसका ख़ामियाज़ा भुगत रहे हैं, उनकी स्थिति बेहद ख़राब है."
उन्होंने कहा, "जब उत्पादन के सभी साधनों का समाजीकरण कर देते हैं तो अधिनायकवाद का उदय होता है.''
"आपको संतुलन चाहिए जिसमें आप चुनाव करने का मौक़ा मिले- आपको अधिक मौक़े कैसे मिले ये सोचना होगा."
वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति के बारे में बात करते हुए राजन व्यापार कम करने के लिए वस्तुओं पर लगाए जाने वाले आयात करों की ओर इशारा करते हैं.
वो कहते हैं अगर आप दूसरे के व्यापार पर प्रतिबंध लगाएंगे तो वो आपकी वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाएंगे.
"सवाल ये है कि आप सीमा के पार अपने व्यापार को कैसे चालू रखते हैं और अपनी वस्तुएं वहां कैसे पहुंचाते हैं."
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