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छत्तीसगढ़ के किसान क्यों चाहते हैं पाकिस्तान से बेहतर रिश्ते
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिये
पाकिस्तान में टमाटर की क़ीमतें भले आसमान पर हों लेकिन छत्तीसगढ़ में टमाटर का हाल बुरा है और टमाटर उगाने वाले किसान परेशान हैं.
छत्तीसगढ़ में सब्जी व्यापारियों ने किसी भी क़ीमत पर पाकिस्तान को टमाटर और दूसरी सब्जियां निर्यात नहीं करने का फ़ैसला किया है. यही कारण है कि पिछले सप्ताह भर से निर्यात का सिलसिला बंद है.
दुर्ग ज़िले के साजा इलाके के किसान सुरेश वर्मा पाकिस्तान पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. लेकिन वे पुलवामा हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के तनाव भरे रिश्ते को लेकर चिंता में हैं.
सुरेश वर्मा कहते हैं, "एक तो टमाटर उगाने वाले किसानों की हालत राज्य में पहले से ही ख़राब थी. ऊपर से पाकिस्तान का निर्यात बंद होने से रही-सही कसर पूरी हो गई. अब तो टमाटर खेत में ख़राब हो रहे हैं, सड़ रहे हैं. उसकी गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है. यही कारण है कि कोई एक रुपये किलो में भी टमाटर लेने वाला नहीं है."
धमधा इलाके के जाताघर्रा के किसान जालम पटेल का कहना है कि दिसंबर में फेथई तूफान के कारण उनके इलाके के किसानों की टमाटर की आधी फसल बर्बाद हो गई थी. अब जबकि टमाटर की फसल विदाई की ओर है, तब पाकिस्तान निर्यात पर रोक से किसानों का दुख और गहरा गया है.
जालम पटेल कहते हैं-"किसान करे तो क्या करे. हर साल सोचता हूं कि हालात बेहतर होंगे लेकिन मुश्किलें पीछा नहीं छोड़तीं. अब तो सोचता हूं कि टमाटर की खेती ही बंद कर दूं."
लेकिन धमधा के परशुराम पटेल, टमाटर या दूसरी सब्जियों के पाकिस्तान निर्यात पर रोक के फ़ैसले से सहमत नहीं हैं.
वे कहते हैं, "अडानी अगर पाकिस्तान में बिजली का व्यापार करें तो ठीक और हम किसान सब्जी भेज दें तो हमारी देशभक्ति पर सवाल उठाया जाता है. यह दोहरा रवैया ठीक नहीं है."
आख़िर क्यों परेशान हैं किसान?
छत्तीसगढ़ में लगभग सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उद्यानिकी की फसलें होती हैं. अकेले दुर्ग ज़िले के धमधा इलाके में ही 10 हज़ार एकड़ में टमाटर की फसल उगाई जाती है. यही कारण है कि पाकिस्तान पर निर्यात के रोक से इस इलाके के किसान कहीं अधिक प्रभावित हैं.
लेकिन रायपुर की थोक सब्जी मंडी के अध्यक्ष टी श्रीनिवास रेड्डी का कहना है कि परेशानी के बाद भी किसानों को देशभक्ति दिखाना चाहिये. रेड्डी किसी भी क़ीमत पर पाकिस्तान को टमाटर या दूसरी सब्जी भेजे जाने के पक्ष में नहीं हैं.
वे कहते हैं, "हर दिन 300 से 400 टन टमाटर और दूसरी सब्जियां हम दिल्ली से बाघा के रास्ते पाकिस्तान भेजते रहे हैं. लेकिन अब ऐसा करके हम पाकिस्तान के लोगों की मदद नहीं कर सकते. देशभक्ति की भावना रखते हुये हमने निर्णय लिया कि चाहे हम किसान और व्यापारी भाइयों को कितना भी घाटा उठाना पड़े, पाकिस्तान को टमाटर या दूसरी सब्जी का निर्यात हम नहीं करेंगे."
तरबूज को तरसेंगे पाकिस्तानी
थोक सब्जी मंडी के एक और पदाधिकारी अमित गुप्ता का दावा है कि पाकिस्तान को सब्जी नहीं भेजने का फैसला आने वाले कई महीनों तक बरकरार रह सकता है.
अमित कहते हैं, "गरमी की शुरुआत में ही पाकिस्तान समेत खाड़ी देशों में छत्तीसगढ़ तरबूज भेजता था. लेकिन क्या शिमला मिर्च और क्या तरबूज, पाकिस्तान के लोग इस बार तरस जायेंगे."
उद्योग मंत्री कवासी लखमा का दावा है कि नई सरकार कृषि से जुड़ी तमाम मुश्किलों का हल निकालेगी. इसके लिये सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है.
मंत्री कवासी लखमा का कहना है कि ऐसा होने के बाद किसानों को अपनी फसल पाकिस्तान या कहीं और निर्यात करने की ज़रुरत ही नहीं पड़ेगी.
कवासी लखमा कहते हैं-" इमली, महुआ, टमाटर जैसे फल और सब्जियों के प्रोसेसिंग की व्यवस्था के लिए राज्य भर में 200 फूड पार्क स्थापित करने का प्रावधान हमने ताज़ा बजट में किया है.. ऐसा होने के बाद किसानों को इस बात की चिंता नहीं रहेगी कि उनकी फसल खराब हो रही है."
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