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भाजपा के 'उड़ता योगी' यूपी पर ध्यान दें: डेरेक ओ ब्रायन
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सीबीआई बनाम ममता बनर्जी के मामले में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच जुबानी जंग जारी है.
मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में एक सभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और बीजेपी के स्टार चुनाव प्रचारक योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी एक भ्रष्ट पुलिस अफसर को बचा रही हैं.
लगभग उसी समय दिल्ली में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने योगी आदित्यनाथ को 'उड़ता योगी' कहा.
डेरेक ने योगी को सलाह दी कि उन्हें अपने राज्य के बिगड़े हालात पर ध्यान देना चाहिए.
उन्होंने पिछले साल दिसंबर के महीने में तीन राज्यों में भाजपा की हार पर चुटकी लेते हुए कहा कि 'फ्लाइंग योगी' जहां भी रैलियां करते हैं, भाजपा के उम्मीदवार हार जाते हैं.
योगी आदित्यनाथ ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनावों के दौरान दर्जनों रैलियां की थीं.
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि फ्लाइंग योगी बीजेपी को डूबा देगा.
डेरेक ओ ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी को 'जुमला जोड़ी' करार दिया है.
उन्होंने कहा, "उनकी पार्टी में केवल उन्हीं की चलती है, बीजेपी में भी कोई लोकतंत्र नहीं है. शाह बाबू और मोदीजी जो चाहेंगे पार्टी में वही चलेगा. उनका नाम हमने दिया है जुमला जोड़ी, जो जुमला जोड़ी बोलेगी पार्टी में वही होगा."
केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विवाद उस समय पैदा हुआ जब रविवार को सीबीआई की एक टीम कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से शारदा चिट फंड घोटाले में पूछताछ करने पहुंची थी.
सीबीआई की टीम को कोलकाता पुलिस ने राजीव कुमार से बात करने से रोक दिया था और उसे थाने में बिठा कर रखी थी.
इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर सीबीआई के दुरुपयोग और संघीय ढांचे को ख़त्म करने का आरोप लगाते हुए धरने पर बैठ गईं. सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद ममता ने मंगलवार रात अपना धरना समाप्त किया.
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सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से कहा कि वो सीबीआई को सहयोग करें जबकि अदालत ने सीबीआई को कुमार को गिरफ़्तार न करने के आदेश दिए. इसके बाद राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों ने अपनी-अपनी जीत का दावा किया है.
केंद्र और राज्य सरकार के बीच जारी टकराव पर डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि कोलकाता में सीबीआई को भेजना उनकी सरकार के ख़िलाफ़ एक राजनीतिक खेल था. उनका कहना है कि मोदी सरकार विपक्ष के ख़िलाफ़ सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है.
"ये 100 प्रतिशत एक राजनीतिक प्रतिशोध है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से ये जांच 2014 से चल रही है और 2019 में आम चुनाव की घोषणा से कुछ सप्ताह पहले ये सब करना, ये एक सियासी बदले का क़दम है."
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'संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रही हैं दीदी'
डेरेक ओ ब्रायन ने कहा मोदी सरकार सच को तोड़ कर पेश करने में माहिर है. उन्होंने कहा कि सीबीआई के दिल्ली दफ्तर के बजाय कुमार से पूछताछ शिलॉन्ग में होने का आदेश दिया गया है जो एक तटस्थ स्थल है.
उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने सीबीआई जांच एजेंसी का दुरुपयोग करके इसकी विश्वसनीयता को नष्ट कर दिया है.
"हमारी लड़ाई सीबीआई से नहीं है. हमारी लड़ाई अमित शाह और बीजेपी और जिस तरह से अजित डोभाल का इस्तेमाल किया जा रहा इस तरह की हरकत करने के लिए, उससे हमारी लड़ाई है."
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार का पक्ष लेते हुए उनकी बहुत तारीफ़ की थी जिसके बाद बीजेपी सरकार ने उन पर हमला करते हुए कहा था कि मुख्यमंत्री राजीव कुमार को बचाना चाहती हैं.
इसका जवाब डेरेक ओ ब्रायन ने यूं दिया, "दीदी (ममता बनर्जी) संविधान की रक्षा करने के लिए लड़ रही हैं. वो राज्यों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए लड़ रही हैं. जो 22 विपक्ष पार्टियां एक साथ आई हैं, वो सब देश और संविधान की रक्षा करना चाहती हैं."
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'प्रधानमंत्री ने इतनी रैलियां कैसे कीं'
रविवार के विवाद के बाद बीजेपी सरकार ने इसे एक संवैधानिक संकट कहा था. सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी इसका ज़िक्र किया था, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के सांसद के अनुसार अदलात ने इस पर कुछ भी नहीं कहा, इसका ज़िक्र भी नहीं किया.
बीजेपी के नेताओं का कहना था कि ममता बनर्जी घबराई हुई हैं इसलिए वो बीजेपी के नेताओं को अपने राज्य में आने से रोकना चाहती हैं.
डेरेक कहते हैं, "अगर हम घबराए होते तो प्रधानमंत्री और राजनाथ सिंह ने चार-पांच रैलियां कैसे कीं? जो नियम हैं, उसका उन्हें पालन करना होगा, कोई समस्या नहीं है."
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डेरेक ओ ब्रायन के अनुसार बीजेपी नेता बांग्ला में 10 मिनट भाषण भी नहीं दे सकते, वो बंगाल को समझते ही नहीं हैं.
"बांग्ला की उनको क्या समझ. वो अनुवाद करने वाले साथ लाते हैं. बांग्ला का गर्व वो क्या समझेंगे."
आगामी आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस और उनकी सहयोगी पार्टियां तीन मुद्दों को उठाएंगी: नौकरियां कहाँ गईं, किसान की समस्याएं क्यों दूर नहीं हुईं और संस्थाओं को नष्ट क्यों किया जा रहा है.
सभी पार्टियों की अपनी रणनीति हो सकती है लेकिन इन तीन मुद्दों पर विपक्ष पूरी तरह से एक साथ है.
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