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CBI बनाम ममता: सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से किसे राजनीतिक फ़ायदा मिलेगा
- Author, टीम बीबीसी हिंदी
- पदनाम, नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सीबीआई के बीच चल रहे घमासान पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की.
सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से कहा है कि वो शारदा चिट फ़ंड घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के साथ सहयोग करें.
शीर्ष अदालत ने यह भी कहा है कि सीबीआई न ही बल प्रयोग करेगी और न ही पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को गिरफ़्तार कर सकती है. वो केवल उनसे पूछताछ कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसला को दोनों ही पक्ष अपनी जीत के तौर पर पेश कर रहे हैं.
ममता बनर्जी पर किताब लिखने वाली सुतपा पॉल का मानना है कि सीबीआई की कार्रवाई राजनीति से प्रेरित थी और निश्चित तौर पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ममता बनर्जी के पक्ष में है.
वो कहती हैं, "एकाएक पांच साल बाद सीबीआई के 40 अधिकारी कोलकाता पहुंचते हैं और यह माना जा रहा है कि वो पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को गिरफ़्तार करना चाहते थे."
"सीबीआई के अधिकारियों पास न कोई सर्च वारंट था और न ही कोई अरेस्ट वारंट. यह सबकुछ कोलकाता में ममता बनर्जी की अगुवाई में हुई विपक्षी दलों की एक सभा के बाद हुआ है."
"इससे साफ़ संदेश मिलता है कि केंद्र सरकार ने सीबीआई का इस्तेमाल ममता को कमज़ोर करने के लिए किया. यह पूरी तरह से एक राजनीतिक चाल थी."
'ममता के ख़िलाफ़ ग़लत संदेश गया'
'दीदीः द अनटोल्ड ममता बनर्जी' की लेखिका सुतपा आगे कहती हैं, "सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला ममता के लिए एक तरह से ख़ुशख़बरी है. कोर्ट ने कहा है कि सीबीआई राजीव कुमार के ख़िलाफ़ किसी तरह के बल का प्रयोग नहीं कर सकती है और न ही उन्हें अरेस्ट कर सकती है."
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजीव कुमार से पूछताछ किसी तीसरे स्थान पर की जाए. अब शिलांग में सीबीआई उनसे पूछताछ करेगी.
वहीं, सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले को ममता बनर्जी के लिए झटका मानती है.
वो कहती हैं, "सीबीआई के अधिकारी अपनी ड्यूटी कर रहे थे. उनके पहुंचने के बाद विवाद हुआ, राजनीतिक ड्राम हुआ, जिसने सभी का सिर शर्म से झुका कर रख दिया."
"सीबीआई के अधिकारी को राज्य की पुलिस थाने में बिठा कर रखी. खुद ममता बनर्जी धरने पर बैठ गई. इससे जनता में उनके ख़िलाफ़ ग़लत संदेश गया है."
राजनीति से प्रेरित कार्रावई?
कुछ दिन पहले कोलकाता में विपक्षी नेता एक मंच पर आए थे और सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ हल्ला बोला था.
ममता बनर्जी उस रैली की मेजबान थीं और समझा जा रहा था कि वह रैली महागठबंधन की रूपरेखा तय करेगी.
इसके कुछ दिन बाद नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में रैली की और ममता को अपने निशाने पर लिया.
सीबीआई की कार्रवाई को इन सभी राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़ कर देखा जा रहा है. सुतपा भी यह मानती हैं कि जिस तेज़ी से सीबीआई काम कर रही है वो सवाल खड़ा करता है.
वो कहती हैं, "दो हफ़्ते पहले कोलकाता में देशभर के विपक्षी नेता जुटे थे और यह समझा जा रहा था कि महागठबंधन की रूपरेखा तय यहां से तय होनी है."
"इसके बाद पांच साल से सोई सीबीआई ने अचानक अपनी कार्रवाई तेज़ कर देती है. उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के साथ आने के बाद भाजपा अब पश्चिम बंगाल पर नज़र लगाए बैठी है."
"उसे उम्मीद है कि यहां से वो अपनी भरपाई कर पाएगी, पर इस पूरे एपिसोड को जहां तक मैं समझ रही हूं ममता को फ़ायदा मिलेगा."
वहीं सुप्रीम कोर्ट की वकील मोनिका अरोड़ा मानती हैं ममता बनर्जी को इसका खामियाजा आगामी चुनावों में भुगतना होगा.
वो कहती हैं, "ममता बनर्जी प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष पर आरोप लगा रही हैं. वो धरने पर हैं और लोकतंत्र बचाने की बात कर रही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. वो विपक्षी आवाज़ को दबा रही हैं. वो विपक्षियों के आरोप पर असहिष्णु रवैया अपना रही हैं."
मोनिका कहती हैं कि जो कोई भी उनकी पार्टी के ख़िलाफ़ पर्चा तक भरता है, उसे मार दिया जाता है. विपक्षी पार्टियों की रैलियों को अनुमति नहीं दी जाती है. नेताओं के हेलिकॉप्टर रोक दिए जाते हैं.
"चिट फंट घोटाले में लाखों लोगों को धोखा मिला है. वो न्याय चाहते हैं. सीबीआई उसकी जांच कर रही है तो राज्य सरकार उसे रोक रही है. ये ग़लत है और इसका खामियाजा ममता बनर्जी को चुनावों में भुगतना पड़ सकता है"
लोकतंत्र को बचाने की कोशिश या लोकतंत्र के ख़िलाफ़ धरना
ममता बनर्जी के लिए भी आगामी चुनाव काफी मायने रखता है. दो साल बाद 2021 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं.
ऐसे में लोकसभा चुनाव में उन्हें अपनी ताकत दिखानी होगी. पिछले कुछ सालों से वो राष्ट्रीय मुद्दों पर मुखर हैं.
नोटबंदी और नौकरी के मुद्दे पर वो मोदी सरकार को घेर रही हैं. अगर आम चुनावों के बाद कांग्रेस मज़बूत स्थिति में नहीं आती है तो क्षेत्रीय नेता प्रधानमंत्री बन सकता है.
ऐसी राजनीतिक स्थिति में ममता बनर्जी भी पीछे नहीं रहना चाहती हैं.
सुतपा पॉल कहती हैं, "जहां तक रही बात धरने की तो यह कुछ दिन और चलेगा. ममता बनर्जी का कहना है कि वो यह धरना सीबीआई के ख़िलाफ़ नहीं, लोकतंत्र को बचाने के लिए कर रही है."
"अन्य क्षेत्रीय पार्टियों का भी समर्थन ममता को मिल रहा है. कनिमोड़ी, तेजस्वी यादव उनसे मिलने पहुंचे. इस पूरे घटनाक्रम ने ममता को मज़बूत किया है. ऐसे में जाहिर है उन्हें चुनावों में इसका फायदा मिलेगा."
वहीं मोनिका अरोड़ा का कहना है विपक्षी नेता भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाली मुख्यमंत्री को अपना समर्थन दे रहे हैं. यह लोकतंत्र के लिए ख़तरे की तरह है.
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