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बजट 2019: महिला सुरक्षा के नाम पर केवल 174 करोड़ अतिरिक्त रूपए?
- Author, भूमिका राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को केंद्र की मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार का आख़िरी बजट पेश किया.
ये बजट इसलिए भी ख़ास है क्योंकि कुछ महीनों में ही आम चुनाव होने वाले हैं, और इस कारण यह आम बजट से अलग 'अंतरिम बजट' था. मई-जून 2019 तक नई सरकार के गठन के बाद आम बजट पेश किया जाएगा.
बजट के शुरुआती भाषण में पीयूष गोयल ने दावा किया कि मौजूदा सरकार में भारत की अर्थव्यवस्था एकबार फिर पटरी पर आ गई है. महिलाओं और युवाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमने कोशिश की है कि महिलाएं और युवा अपने सपने पूरा कर सकें.
लेकिन मोदी सरकार के इस आख़िरी बजट में ऐसा कुछ भी ख़ास नहीं है जिससे महिलाएं अपने सपने को पूरा कर सकें.
पीयूष गोयल ने कहा कि 2019-20 के अंतरिम बजट में महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण मिशन के लिए 1330 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है.
2018-19 में मिशन के लिए किए जो आकलन किया गया था ये उससे केवल 174 करोड़ रूपये अधिक है.
अंतरिम बजट में महिलाओं के लिए हुई घोषणाओं पर अर्थशास्त्री नेहा शाह का कहना है कि सबसे पहले हमें ये समझना ज़रूरी है कि यह अंतरिम बजट था, जिससे बहुत अधिक उम्मीद रखना सही नहीं होगा.
ये बात सही है कि अंतरिम बजट में बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं रखनी चाहिए लेकिन मिडिल क्लास के करदाताओं के लिए सरकार ने फिर भी कुछ किया है. महिलाओं के लिए तो इस बजट में विशेष कुछ भी नहीं दिख रहा.
शायद पीयूष गोयल ने इसीलिए उन योजनाओं का सहारा लिया जो पहले से ही लागू हैं या घोषित हैं जैसे उज्जवला योजना और मैटरनिटी लीव में इज़ाफ़ा.
उन्होंने बताया कि उज्जवला योजना के तहत आठ करोड़ मुफ़्त गैस कनेक्शन देने की योजना थी और अब तक छह 6 करोड़ कनेक्शन दिये जा चुके हैं.
उन्होंने उज्ज्वला योजना को सरकार की सफलतम योजनाओं में से एक बताया.
उसी तरह मेटरनिटी लीव का ज़िक्र करते हुए पीयूष गोयल कहा कि उनकी सरकार में महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव को बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है.
इसके अलावा उन्होंने कहा कि मुद्रा योजना के तहत लाभ पाने वालों में 70 फ़ीसदी से ज़्यादा महिलाएं रहीं हैं.
नेहा शाह कहती हैं, "महिलाओं के लिए मैटरनिटी लीव की जो घोषणा की गई है अगर उसका पालन हो सके तो बहुत ही अच्छा हो जाएगा लेकिन इसका पालन हो नहीं पा रहा. अगर ये स्कीम सिर्फ़ सेंट्रल गवर्नमेंट में काम करने वाली महिलाओं के लिए है तो फिर इसका लाभ सबको तो नहीं मिल सकेगा."
उज्ज्वला योजना के बारे में नेहा शाह कहती हैं, "भले ही इससे महिलाओं को लाभ हुआ हो लेकिन एक तबक़ा अभी भी ऐसा है जो सिलेंडर के रिफ़िल को लेकर जूझ रहा है, उस तबक़े के लिए भी सोचने की ज़रूरत है."
एग्रीकल्चर ट्रेड पॉलिसी और फूड सिक्योरिटी की जानकार श्वेता सैनी इस बजट को महिलाओं के लिए विशेष फ़ायदेमंद तो नहीं मानती लेकिन ये ज़रूर मानती हैं कि टैक्स, जीएसटी और ब्याज में छूट का लाभ महिलाओं को भी मिलेगा.
हालांकि श्वेता ये ज़रूर कहती हैं कि क्योंकि वो एग्रीकल्चर पर काम करती हैं तो उन्हें लगता है कि इस बजट में खेती-किसानी से जुड़ी महिलाओं के लिए कुछ और घोषणाएं की जा सकती थीं.
"मैं ये महसूस करती हूं कि किसानी में महिलाएं आगे आ रही हैं और उन्हें प्रोत्साहन देने के लिए महिला किसानों और मज़दूरों लिए अलग से कुछ घोषणाएं की जा सकती थीं और अगर होतीं तो अच्छा होता."
अब 40 हज़ार रुपये तक के बैंक ब्याज पर टैक्स नहीं देना होगा. इससे उन महिलाओं को ख़ासतौर पर फ़ायदा होगा जो नौकरीपेशा नहीं है. मौजूदा वक़्त में यह सीमा दस हज़ार थी.
टैक्स मामलों के जानकार CA डीके मिश्रा का कहना है कि महिलाओं को लाभ दो तरह से मिल रहा है. एक तो वो जो कोई जेंडर विशेष नहीं है पर इससे लाभान्वित तो महिलाएं भी हो रही हैं.
उनके लिहाज़ से "महिलाओं के लिए अलग से भले ही इस बजट में कुछ न रहा हो लेकिन उनके लिए लाभ तो है."
अंतरिम बजट, आम बजट से अलग
आम तौर पर अंतरिम बजट (बीते वर्ष के वित्तीय विवरण की जानकारी देता है) चुनावों तक के देश के बजट का विवरण देता है. इसके अलावा आने वाले साल में राजस्व और भविष्य की सरकार के लिए ख़र्च का एक आकलन भी देता है.
हाल ही में भारत महिला प्रेस कोर सत्र में पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा था कि अंतरिम बजट में सरकार के पास नई योजनाओं के ऐलान करने का अधिकार नहीं होता.
उनका कहना था "ऐसी स्थिति में सरकार बस तीन से चार महीने तक के ख़र्च की जानकारी ही देती है. अगर सरकार चुनावी साल में संपूर्ण बजट पेश करती हैं तो ये अप्रत्यक्ष रूप से संविधान का उल्लंघन है."
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