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डोकलाम पर केंद्र ने हमें अंधेरे में रखाः सिक्किम के मुख्यमंत्री चामलिंग
- Author, शुभज्योति घोष
- पदनाम, बीबीसी बांग्ला, दिल्ली
देश में सबसे ज़्यादा समय तक मुख्यमंत्री का पद संभालने का रिकॉर्ड बनाने वाले सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने डोकलाम विवाद पर उनकी सरकार के साथ सूचनाओं का आदान प्रदान नहीं किया.
साल 2017 में सिक्किम के साथ लगने वाली चीनी सीमा पर भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद को लेकर गतिरोध पैदा हुआ था.
भारत ने पठारी क्षेत्र डोकलाम में चीन के सड़क बनाने की कोशिश का विरोध किया था.
भूटान और चीन दोनों इस क्षेत्र पर अपना हक़ जताते हैं. लेकिन भारत हमेशा भूटान का समर्थन करता आया है.
ये वही इलाका है जहां चीन और भारत के उत्तर-पूर्व में मौजूद सिक्किम और भूटान की सीमाएं मिलती हैं.
बीबीसी बांग्लासेवा के संवाददाता शुभज्योति घोष ने सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के साथ एक इमेल इंटरव्यू किया है.
इस इंटरव्यू के कुछ ख़ास अंश इस प्रकार हैं-
सवालः डोकलाम विवाद के बाद से भारत की रणनीतिक योजनाओं में सिक्किम की एक अहम जगह बन गई है. सिक्किम पर इस मुद्दे क्या असर पड़ा?
सिक्किम सरकार को डोकलाम के मुद्दे पर सूचनाओं के आदान-प्रदान में शामिल नहीं किया गया. हमें जो भी कुछ पता चला वह टीवी चैनल और न्यूज़पेपर से पता चला. ऐसे में सिक्किम के लोगों में डोकलाम के मुद्दे की वजह से डर की स्थिति बनी हुई थी. लेकिन हमारी सरकार देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए प्रतिबद्ध थी.
डोकलाम मुद्दा देश की सुरक्षा के लिए एक भारी ख़तरा था. इस संघर्ष का सबसे पहला असर सिक्किम पर पड़ता. लेकिन इससे एक सकारात्मक बात भी हुई. आप जानते हैं कि सिक्किम साल 1975 में ही भारत का हिस्सा बना.
तब से हम कोशिश कर रहे हैं सिक्किमवासी राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हो सकें. हमारा नारा भी यही है- 'देश हमारा हिंदुस्तान, सिक्किम हमारा सुखिस्तान.' और डोकलाम गतिरोध के बाद सिक्किमवासियों के मन में देशभक्ति की प्रबल भावना पैदा हुई है.
सवालः पश्चिम बंगाल का आरोप है कि सिक्किम सरकार के कदमों की वजह से तीस्ता नदी सूख रही है क्योंकि सिक्किम सरकार ने नदी पर कई हायडल पॉवर प्लांट और जलाशय बनाए हैं. आपका इस पर क्या कहना है?
हमारा विकास का मॉडल मानवीय और प्राकृतिक संसाधनों के दीर्घकालिक इस्तेमाल पर आधारित है. लेकिन हम ये मानते हैं कि पर्यावरण की कीमत पर विकास कभी भी नहीं हो सकता. सिक्किम में कई पॉवर प्रोजेक्ट्स हैं लेकिन मात्र सात परिवार इनकी वजह से बेघर हुए हैं. हम पर्यावरण के प्रति भी चिंतित हैं. और हमने इन परियोजनाओं को ज़िम्मेदारी के साथ बनाते हुए दूसरे प्रदेशों की चिंताओं का भी ध्यान रखा है.
सवालः गोरखालैंड आंदोलन पर आपका क्या रुख है क्योंकि पश्चिम बंगाल सरकार कहती आई है कि आपकी सरकार अलगाववादियों के प्रति नरम है?
गोरखालैंड आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारी हाइवे पर जाम लगा रहे थे. मैंने उनका समर्थन इसलिए किया था ताकि मैं उनका भरोसा जीत सकूं जिससे वे एनएच 10 हाइवे को जाम न करें क्योंकि ये हाइवे सिक्किम के लिए जीवनरेखा जैसा है.
हालांकि, मैं इसे पश्चिम बंगाल का आंतरिक मामला मानता हूं. हम पश्चिम बंगाल की सरकार के साथ सहयोग बनाए रखेंगे और मुख्यमंत्री ने भी इस हाइवे पर किसी तरह आवागमन सुचारू गति से चलाने का आश्वासन दिया है.
सवालः सिक्किम भारत में इकलौता ऐसा राज्य है जो तीन ओर से विदेशी मुल्कों से घिरा है. एक तरफ चीन, दूसरी तरफ नेपाल तो तीसरी ओर भूटान. ऐसे में सिक्किम का अपने अंतरराष्ट्रीय पड़ोसियों को लेकर क्या रुख है?
साल 1994 में जब मैं सत्ता में आया तो एक नारा दिया- 'देश हमारा हिंदुस्तान, सिक्किम हमारा सुखिस्तान', सिक्किम के लोग भावनात्मक रूप से और भौगोलिक रूप से भारत के साथ जुड़े हुए हैं. सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों और सीमावर्ती राज्यों में सिक्किम सबसे शांत प्रदेश है और ये इस बात का उदाहरण बन सकता है कि सांप्रदायिक समन्वय और शांति कैसे कायम की जाए.
हम जिन तीनों देशों के साथ सीमाएं साझा करते हैं उनके साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे हैं. हमारी सरकार ने साल 2009 में नाथुला दर्रे से तिब्बत (चीन) तक व्यापारिक रास्ते खोल दिए थे जिसकी वजह से हमारा व्यापार काफ़ी ठीक चल रहा है. भूटान और नेपाल में रहने वाली आबादी का एक बड़ा हिस्सा सिक्किम की आबादी जैसा ही है. इस वजह से हमारे उनके साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं. और इसके कारण इन दोनों देशों के लोग सिक्किम में बेरोक-टोक आ जा सकते हैं. ऐसे में सिक्किम के लोगों की नज़र में ये दोनों देश 'विदेशी मुल्क' नहीं बल्कि भारत का विस्तार हैं.
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