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EVM हैकिंगः सैय्यद शुजा ने क्यों नहीं किया चुनाव आयोग की चुनौती का सामना?
भारत के निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की हैकिंग को लेकर किए गए ताज़ा दावों के बाद कहा है कि आयोग 'जिन ईवीएम का इस्तेमाल करता है, वो पूरी तरह सुरक्षित हैं.'
आयोग ने हैकिंग के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि वो ये देख रहा है कि इस मामले में 'क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है.'
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में सोमवार को इंडियन जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (आईजेए) के एक आयोजन में अमरीका स्थित एक कथित साइबर एक्सपर्ट ने दावा किया था कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है.
केंद्र की एनडीए सरकार की अगुवाई कर रही भारतीय जनता पार्टी ने ईवीएम हैकिंग के दावों को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला किया है और कहा है कि चुनाव से पहले हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की तैयारी की जा रही है.
लंदन के कार्यक्रम के दौरान कथित हैकर ने दावा किया कि वो भारत में चुनावों के दौरान ईवीएम हैक कर चुका है. हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई प्रामाणिक सबूत सामने नहीं रखा गया.
इस कार्यक्रम के बाद विपक्ष के कुछ दलों ने इस मामले को निर्वाचन आयोग के सामने उठाने की बात की.
लंदन में मौजूद बीबीसी संवाददाता गगन सबरवाल ईवीएम हैकिंग का दावा करने वाले कथित हैकर सैय्यद शुजा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थीं. गगन सबरवाल ने सैय्यद शुजा से उनके दावों पर कुछ सवाल-जवाब भी किए.
सवालः अमरीका और कांगो जैसे देशों में बिना किसी परेशानी के ईवीएम का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है?
सैय्यद शुजाः मैंने अमरीका की ईवीएम की जांच नहीं की है. मुझे उन्हें परखने का मौक़ा नहीं मिला इसलिए मैं उसके बारे में कुछ नहीं बोल सकता और कांगो के बारे में तो मुझे कुछ नहीं मालूम.
सवालः पिछले साल जब भारतीय निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को हैक करने की खुली चुनौती रखी थी तब आपने उसमें हिस्सा लेने के बारे में क्यों नहीं सोचा?
सैय्यद शुजाः मैं यहां शरण लेकर रह रहा हूं. अगर मैं भारत चला जाता तो मेरी सुरक्षा की गारंटी कौन लेता? जो लोग उसमें हिस्सा लेना चाहते थे मैंने उन्हें अपना साथ देने का विकल्प दिया था लेकिन बाद में वे लोग पीछे हट गए.
सवालः तो आज ऐसा क्या हुआ कि आप ईवीएम हैकिंग पर बात कर रहे हैं और आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस से आप क्या हासिल करने की उम्मीद लगा रहे हैं?
सैय्यद शुजाः मैं कुछ भी उम्मीद नहीं लगा रहा हूं. मैं जानता हूं कि कुछ भी बदलने वाला नहीं है. इसकी वजह है कि ईवीएम चुनावों में इस्तेमाल होती रहेगी और जो हो रहा है वह भी जारी रहेगा. कुछ भी बदलने वाला नहीं है. यहां तक कि अगर हरएक भारतीय भी यह कहने लगे कि ईवीएम की जगह बैलट पेपर से चुनाव होने चाहिए तब भी बीजेपी के पास इतनी ताकत है कि वह पैसे देकर वोट खरीद सकती है. लोगों इस बारे में सोचना होगा कि उन्हें अपने लिए किस तरह की सरकार चाहिए.
सवालः अगर ईवीएम का इस्तेमाल नहीं करें तो फिर उसकी जगह क्या इस्तेमाल में लाया जाए?
सैय्यद शुजा भारत के पास हैक ना हो सकने वाली ईवीएम भी है. लेकिन उनका इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. हमने उन्हें जो डिज़ाइन दिया है उसे हैक नहीं किया जा सकता. इस ईवीएम में किसी तरह के ट्रांसमीशन की संभावना नहीं है.
बीबीसी संवाददाता ने उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल से भी कुछ सवाल पूछने चाहे. लेकिन उन्होंने कहा कि वे अपनी ओर से कोई बयान जारी नहीं करना चाहते. यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें कांग्रेस की ओर से इस कार्यक्रम में भेजा गया है. इस पर कपिल सिब्बल ने कहा कि उनके एक दोस्त ने उन्हें यहां आने का न्यौता दिया था.
आयोग ने क्या कहा
कुछ देर बाद निर्वाचन आयोग ने एक प्रेस विज्ञप्ति के जरिए इस मामले पर अपना पक्ष रखा.
निर्वाचन आयोग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, " भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के संज्ञान में आया है कि लंदन में हुए एक इवेंट में ये दिखाने का दावा किया गया है कि ईसीआई जिन वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल करता है, उनमें छेड़छाड़ की जा सकती है. चुनाव आयोग मज़बूती के साथ इस निश्चित तथ्य के साथ है कि भारत में चुनाव के दौरान आयोग जिन ईवीएम का इस्तेमाल करता है वो पूरी तरह सुरक्षित (फुल प्रूफ) हैं."
आयोग की विज्ञप्ति में आगे कहा गया है, "ये दोहराना जरूरी है कि ये ईवीएम भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड तैयार करते हैं. उस दौरान कड़ी निगरानी और कड़ी सुरक्षा रहती है. साल 2010 में गठित तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी हर चरण पर तय मानकों के मुताबिक कड़ी निगरानी करती है."
आयोग ने अपनी विज्ञप्ति में कहा है कि ये भी देखा जा रहा है कि इस मामले में क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है.
कांग्रेस पर बरसे नक़वी
उधर, भारतीय जनता पार्टी ने हैकिंग के दावे को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया है.
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता मुख्तार अब्बास नक़वी ने कहा, " कांग्रेस पार्टी चुनाव के पहले ईवीएम के सिर पर ठीकरा फोड़ने की तैयारी अभी से कर रही है. उसको इस बात का अहसास हो चुका है कि देश का माहौल क्या है? कांग्रेस और उनके कुछ साथियों की जो नकारात्मक राजनीति है, उसका हश्र 2019 में क्या होने वाला है."
नक़वी ने कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल को भी निशाने पर लिया.
उन्होंने कहा, " कपिल सिब्बल वहां इत्तेफ़ाक से नहीं पहुंचे. उन्हें कांग्रेस ने, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने भेजा था. जिन लोगों ने देश और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बदनाम करने की सुपाड़ी दी गई है. इस सुपाड़ी को लेकर यहां कोई डाकिया तो जाना चाहिए ना."
विपक्ष उठाता रहा है सवाल
हैकिंग के दावे सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर पर लिखा है कि विपक्ष ईवीएम के मुद्दे को चुनाव आयोग के सामने रखेगा.
ममता बनर्जी ने ट्विटर पर लिखा है, "हमारा महान लोकतंत्र संरक्षित होना चाहिए. आपका हर वोट कीमती है. यूनाइटेड इंडिया रैली में विपक्ष के सभी दलों ने ईवीएम के मुद्दे पर बात की थी. हम आपस में मिलकर काम कर रहे हैं और हमने 19 जनवरी को ही तय किया था कि इस मामले को लगातार निर्वाचन आयोग के सामने रखेंगे."
भारत में ईवीएम को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद विपक्ष के कई दलों ने ईवीएम पर सवाल उठाए थे.
आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा में ईवीएम से मिलती जुलती मशीन पर डेमो देकर दावा किया था कि ईवीएम से छेड़छाड़ की जा सकती है.
आयोग ने इन दावों को भी खारिज किया था.
आयोग ने देश की सभी पार्टियों को दिए ईवीएम हैकिंग का चैलेंज भी दिया था. इस चैलेंज में सिर्फ़ दो पार्टियां एनसीपी और सीपीएम हीं पहुंचीं थीं.
लेकिन इन दोनों पार्टियों ने वहां चैलेंज में हिस्सा नहीं लिया बल्कि चुनाव आयोग ने जो कुछ दिखाया उसे केवल देखा.
तब आम आदमी पार्टी ने आयोग की ओर से दी गई चुनौती को 'ड्रामा' बताते हुए कहा था कि वो इसमें हिस्सा नहीं लेगी.
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