स्पेस में जानवर नहीं रोबोट क्यों भेजेगा इसरो

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो ने तय किया है कि वो कुछ दूसरे देशों की तरह अंतरिक्ष में परीक्षण के लिए जानवर नहीं रोबोट भेजेगा.
दरअसल, इसरो की योजना है कि साल 2021 के अंत तक इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना है और उसके पहले की टेस्टिंग प्रक्रिया में वो 'मानव रोबोट्स' का सहारा लेगा.
इसरो प्रमुख के शिवन ने बीबीसी हिंदी से कहा, "अंतरिक्ष में होने वाली जटिल टेस्टिंग प्रक्रिया में बेचारे कमज़ोर जानवरों का सहारा लेने का हमारा कोई इरादा नहीं है".
भारत सरकार और इसरो ने इस बात को साफ़ कर दिया है कि 'गगनयान मिशन' के तहत भारतीय यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने की योजना पटरी पर है.
इस बीच बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि जब अमरीका, रूस और चीन जैसे देशों ने अंतरिक्ष में इंसानों के पहले जानवर भेज कर परीक्षण किया तब इसरो इस तरीके को फ़ॉलो क्यों नहीं कर रहा है.
इसरो क्यों नहीं भेज रहा जानवर
बीबीसी हिंदी ने जब ये सवाल इसरो प्रमुख के शिवन से पूछा तो उनका जवाब था, "भारत एकदम सही कदम उठा रहा है".
उन्होंने कहा, "अमरीका और रूस जब जानवरों को स्पेस में भेज रहे थे तब आज की अत्याधुनिक तकनीक मौजूद नहीं थी. मानव रोबोट्स का इजाद नहीं हुआ था इसलिए बेचारे जानवरों की जान जोखिम में डाली जा रही थी. अब हमारे पास सेंसर्स हैं, टेक्नॉलोजी है जिससे सारी टेस्टिंग हो सकती है तो क्यों न उसका सहारा लिया जाए".
'मिशन गगनयान' के लॉन्च होने के पहले इसरो की योजना दो परीक्षणों को अंजाम देने की है जिसमें मानव प्रकृति से मिलते हुए रोबॉट के प्रयोगों का सहारा लिया जाएगा.

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लेकिन जानकारों को लगता है कि ये 'काफ़ी ख़तरनाक हो सकता है क्योंकि किसी जीवित वस्तु और रोबोट्स में आखिरकार कुछ तो फ़र्क होता ही है".
विज्ञान के मामलों के जानकार पल्लव बागला के मुताबिक़, "अगर गगनयान के तहत इसरो सीधे इंसान को ही स्पेस में भेजना चाहता है तब उसे उसके पहले की दो टेस्ट उड़ानों पर लाइफ़-सपोर्ट सिस्टम टेस्ट करने की ज़रूरत है. यानी कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर, हीट सेंसर, ह्यूमिडिटी सेंसर और क्रैश सेंसर वगैरह तो रोबोट के ही हिस्से हैं. मेरे हिसाब से रिस्क बड़ा है क्योंकि भारत अंतरिक्ष में सीधे इंसानों को एक ऐसी फ़्लाइट में भेजना चाहता है जिसमें पहले कभी कोई जीवित वस्तु वहां नहीं गई. खतरा तो बड़ा है ही".
इधर, इसरो के मुताबिक़ मिशन गगनयान परियोजना बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही है और इस साल के अंत तक यात्रियों की तलाश पूरी हो जाएगी.


पीएम मोदी ने की थी घोषणा
इसरो प्रमुख के शिवन ने बीबीसी के इस सवाल का नकारात्मक जवाब दिया कि "क्या इस तरीके से पहली बार अंतरिक्ष में जाने वाले भारतीय एस्ट्रोनॉट्स की जान को ख़तरा नहीं हो सकता है?".
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो भारत के इस महत्वाकांक्षी मिशन की लागत क़रीब 10,000 करोड़ रुपए की बताई जा रही है और सरकार ने इसे हरी झंडी दे दी है.
2018 में भारतीय स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से दी गए भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने इस मिशन की घोषण की थी.

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विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय के कुछ उच्च अधिकारियों के मुताबिक, "ज़ाहिर है, इसरो और मंत्रालय पर थोड़ा दबाव भी है कि ये मिशन ट्रैक पर रहे और सफल भी हो".
इसरो चेयरमैन के शिवान के मुताबिक़, "गगनयान के लिए प्रबंधन और स्पेसफ़्लाईट सेंटर बनाया जा चुका है. पहला मानवरहित मिशन दिसंबर 2020 तक और दूसरा ऐसा मिशन जुलाई 2021 तक पूरा कर लेनी की योजना है. साथ ही भारत की पहली रियल ह्यूमन स्पेस फ़्लाईट दिसंबर 2021 तक पूरा कर लेना का टारगेट है".
अगर ये मिशन कामयाब रहा तो भारत अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने वाला चौथा देश हो जाएगा.
सबसे पहले रूस (तब सोवियत यूनियन) और उसके बाद अमरीका ने 50 से भी अधिक वर्षों से पहले अंतरिक्ष में पहले कदम रखा था.
इन दोनों देशों ने अंतरिक्ष में मानव भेजने के पहले जानवरों को भी कर ट्रायल किए थे जिसके सफल होने के बाद इंसानों को भेजा गया था.

इसके कई दशकों बाद 2003 में चीन ने भी अंतरिक्ष में कदम रखा था.


अंतरिक्ष मिशन को लेकर गोपनीयता
पल्लव बागला के मुताबिक़, "ज़्यादातर देश अपने स्पेस मिशनों के बारे में पूरी गोपनीयता बरतते हैं. मिसाल के तौर पर जब 2003 में चीन का पहला अंतरिक्ष यात्री वापस आया था तब ऐसी अपुष्ट ख़बरें आईं थीं कि वो खून से लथपथ था".
कुछ दूसरे जानकारों का मत है कि "इस तरह के मिशन मे रिस्क ज़्यादा रहता है".
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइसेंस से रिटायर हो चुके प्रोफ़ेसर आरके सिन्हा ने कहा, "ब्रिटेन, फ़्रांस, जापान जैसे देश आज तक इस तरह की चीज़ नहीं कर सके हैं. भारत ने दस हज़ार करोड़ लगा दिए हैं तो देखना होगा कि होता क्या है".
पल्लव बागला भी इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हुए कहते हैं, "दांव बहुत बड़ा है और रिस्क भी. हालांकि इसरो ज़्यादतर जो कहता है वो करता भी है".
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